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Punjab: रूठों को मनाने में सफल नहीं हो रहे राजनीतिक दल, तमाम प्रयासों के बाद भी नहीं रुक रहा दल-बदल का खेल
Thu, 02 May 2024 01:31 PM IST
निवेदिता वर्मा
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 02 May 2024 01:31 PM IST
सार
पंजाब में 7 मई से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो जाएगी और सभी उम्मीदवार 14 मई तक अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 17 मई तक नाम वापस लिया जा सकेगा और 1 जून को प्रदेश की 13 सीटों पर मतदान होगा। इस सब के बीच दल-बदल का खेल जारी है, क्योंकि रूठों को मनाने में राजनीतिक दल पूरी तरह से असफल हो रहे हैं।
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पंजाब में दल बदल का खेल जारी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में लोकसभा चुनाव के मतदान के लिए अब एक महीने का समय रह गया है। चुनाव नजदीक आते ही राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। अब तक कई नेता एक छोड़ दूसरे दल में छलांग लगा चुके हैं। साथ ही कई नेता ऐसे भी हैं, जो दूसरी पार्टी में जाकर उम्मीदवार बन गए हैं और अपनों को ही चुनौती दे रहे हैं।
कांग्रेस के पूर्व विधायक दलवीर सिंह गोल्डी ने बुधवार को आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। गोल्डी ने पिछले कल ही कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। वह पार्टी से नाराज चल रहे थे, क्योंकि कांग्रेस ने विधायक सुखपाल खैरा को संगरूर से चुनाव मैदान में उतारा है। पार्टी ने गोल्डी की नाराजगी दूर करने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी।
इसी तरह जालंधर से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव मैदान में उतारने के चलते नाराज चौधरी परिवार ने भी पार्टी से दूरी बनाने का फैसला लिया। कांग्रेस ने चौधरी परिवार को मनाने के लिए काफी जद्दोजहद की, लेकिन बावजूद इसके पूर्व सांसद स्वर्गीय संतोख सिंह चौधरी की पत्नी करमजीत कौर ने भाजपा का हाथ थाम लिया था। इसके बाद ही कांग्रेस ने उनके बेटे विधायक विक्रमजीत सिंह पार्टी विरोधी गतिविधियों को हवाला देते हुए पार्टी से निलंबित भी कर दिया था।
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इससे पहले सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह के निर्दलीय चुनाव लड़ने की चर्चा ने भी कांग्रेस की परेशानी बढ़ा दी थी। यही कारण है कि विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा समेत अन्य कांग्रेसी नेता उनको मनाने पहुंचे थे और कांग्रेस काफी हद तक उनको मनाने में सफल भी रही। यही कारण है कि बलकौर सिंह पार्टी उम्मीदवार का समर्थन के लिए राजी हो गए। पहले उनके बठिंडा से चुनाव लड़ने की चर्चा चल रही थी।
भाजपा नेता व पूर्व मंत्री विजय सांपला के करीबी रिश्तेदार रॉबिन सांपला हाल ही में भारतीय जनता पार्टी को छोड़ आप में शामिल हो गए थे। रॉबिन भाजपा एससी मोर्चा के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। बता दें कि विजय सांपला होशियारपुर से भाजपा सांसद रह चुके हैं, लेकिन पार्टी ने इस बार अनिता सोमप्रकाश को इस सीट से उम्मीदवार बनाया है। इस कारण सांपला नाराज चल रहे थे। पंजाब भाजपा प्रभारी विजय रुपाणी भी भी उनको मनाने पहुंचे थे। हालांकि इस बीच उनके करीबी रिश्तेदार रॉबिन आप में चले गए।
ये नेता अपनों के खिलाफ ही उतरे चुनाव मैदान में
शिरोमणि अकाली दल के नेता व दो बार के विधायक पवन कुमार टीनू ने पिछले महीने अकाली दल छोड़ आप का दामन थाम लिया था। आप ने जालंधर सीट से ही उनको चुनाव में उतार दिया है। इसी तरह वह अब वह अपनी ही पार्टी को यहां से चुनौती दे रहे हैं। टीनू के सामने शिअद से पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी चुनाव लड़ रहे हैं। केपी खुद कांग्रेस छोड़ शिअद में शामिल हुए हैं।
इसी तरह वह अपनी पुरानी पार्टी के नेता पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के लिए चुनौती बन गए हैं। इस सीट पर आप प्रत्याशी टीनू के सामने भी आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए सुशील कुमार रिंकू मैदान में हैं। आप ने इस सीट पर रिंकू को अपना प्रत्याशी तक घोषित कर दिया था, लेकिन बावजूद इसके वह भाजपा में चले गए थे।
चन्नी को छोड़कर इस सीट पर सभी उम्मीदवार एक छोड़ दूसरी पार्टी से उम्मीदवार बने हैं, इसलिए यहां पर मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। इसी तरह आप छोड़कर कांग्रेस में आए डॉ. धर्मवीर गांधी आप प्रत्याशी डॉ. बलवीर सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। गांधी के सामने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आई पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में यहां अपने ही अपनों को चुनौती दे रहे हैं।
कांग्रेस छोड़ भाजपा से लड़ रहे बिट्टू
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए रवनीत सिंह बिट्टू लुधियाना से चुनाव लड़ रहे हैं। लुधियाना से उनके सामने कांग्रेस ने पार्टी प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस तरह लुधियाना सीट पर भी कड़ा मुकाबला होने की चर्चा है। यहां पर आप से अशोक पप्पी पराशर और शिअद से रणजीत सिंह ढिल्लों मैदान में हैं। इसी तरह गुरप्रीत सिंह जीपी व चब्बेवाल भी अपनों के खिलाफ ही चुनाव मैदान में उतरे हुए हैं। कांग्रेस के पूर्व विधायक जीपी पार्टी अनुशासन न होने का आरोप लगाते हुए आप में शामिल हुए थे, जिसके बाद ही आप ने उनको फतेहगढ़ साहिब की सीट से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था। उनके सामने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. अमर सिंह मैदान में हैं। होशियारपुर से कांग्रेस छोड़ आप में शामिल हुए डॉ. राजकुमार चब्बेवाल चुनाव लड़ रहे हैं। चब्बेवाल के सामने यहां कांग्रेस से यामिनी गोमर प्रत्याशी हैं।
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कांग्रेस के पूर्व विधायक दलवीर सिंह गोल्डी ने बुधवार को आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। गोल्डी ने पिछले कल ही कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। वह पार्टी से नाराज चल रहे थे, क्योंकि कांग्रेस ने विधायक सुखपाल खैरा को संगरूर से चुनाव मैदान में उतारा है। पार्टी ने गोल्डी की नाराजगी दूर करने के लिए काफी प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी।
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इसी तरह जालंधर से पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव मैदान में उतारने के चलते नाराज चौधरी परिवार ने भी पार्टी से दूरी बनाने का फैसला लिया। कांग्रेस ने चौधरी परिवार को मनाने के लिए काफी जद्दोजहद की, लेकिन बावजूद इसके पूर्व सांसद स्वर्गीय संतोख सिंह चौधरी की पत्नी करमजीत कौर ने भाजपा का हाथ थाम लिया था। इसके बाद ही कांग्रेस ने उनके बेटे विधायक विक्रमजीत सिंह पार्टी विरोधी गतिविधियों को हवाला देते हुए पार्टी से निलंबित भी कर दिया था।
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इससे पहले सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह के निर्दलीय चुनाव लड़ने की चर्चा ने भी कांग्रेस की परेशानी बढ़ा दी थी। यही कारण है कि विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा समेत अन्य कांग्रेसी नेता उनको मनाने पहुंचे थे और कांग्रेस काफी हद तक उनको मनाने में सफल भी रही। यही कारण है कि बलकौर सिंह पार्टी उम्मीदवार का समर्थन के लिए राजी हो गए। पहले उनके बठिंडा से चुनाव लड़ने की चर्चा चल रही थी।
भाजपा नेता व पूर्व मंत्री विजय सांपला के करीबी रिश्तेदार रॉबिन सांपला हाल ही में भारतीय जनता पार्टी को छोड़ आप में शामिल हो गए थे। रॉबिन भाजपा एससी मोर्चा के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। बता दें कि विजय सांपला होशियारपुर से भाजपा सांसद रह चुके हैं, लेकिन पार्टी ने इस बार अनिता सोमप्रकाश को इस सीट से उम्मीदवार बनाया है। इस कारण सांपला नाराज चल रहे थे। पंजाब भाजपा प्रभारी विजय रुपाणी भी भी उनको मनाने पहुंचे थे। हालांकि इस बीच उनके करीबी रिश्तेदार रॉबिन आप में चले गए।
ये नेता अपनों के खिलाफ ही उतरे चुनाव मैदान में
शिरोमणि अकाली दल के नेता व दो बार के विधायक पवन कुमार टीनू ने पिछले महीने अकाली दल छोड़ आप का दामन थाम लिया था। आप ने जालंधर सीट से ही उनको चुनाव में उतार दिया है। इसी तरह वह अब वह अपनी ही पार्टी को यहां से चुनौती दे रहे हैं। टीनू के सामने शिअद से पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी चुनाव लड़ रहे हैं। केपी खुद कांग्रेस छोड़ शिअद में शामिल हुए हैं।
इसी तरह वह अपनी पुरानी पार्टी के नेता पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के लिए चुनौती बन गए हैं। इस सीट पर आप प्रत्याशी टीनू के सामने भी आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में आए सुशील कुमार रिंकू मैदान में हैं। आप ने इस सीट पर रिंकू को अपना प्रत्याशी तक घोषित कर दिया था, लेकिन बावजूद इसके वह भाजपा में चले गए थे।
चन्नी को छोड़कर इस सीट पर सभी उम्मीदवार एक छोड़ दूसरी पार्टी से उम्मीदवार बने हैं, इसलिए यहां पर मुकाबला दिलचस्प होने वाला है। इसी तरह आप छोड़कर कांग्रेस में आए डॉ. धर्मवीर गांधी आप प्रत्याशी डॉ. बलवीर सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं। गांधी के सामने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आई पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में यहां अपने ही अपनों को चुनौती दे रहे हैं।
कांग्रेस छोड़ भाजपा से लड़ रहे बिट्टू
कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए रवनीत सिंह बिट्टू लुधियाना से चुनाव लड़ रहे हैं। लुधियाना से उनके सामने कांग्रेस ने पार्टी प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस तरह लुधियाना सीट पर भी कड़ा मुकाबला होने की चर्चा है। यहां पर आप से अशोक पप्पी पराशर और शिअद से रणजीत सिंह ढिल्लों मैदान में हैं। इसी तरह गुरप्रीत सिंह जीपी व चब्बेवाल भी अपनों के खिलाफ ही चुनाव मैदान में उतरे हुए हैं। कांग्रेस के पूर्व विधायक जीपी पार्टी अनुशासन न होने का आरोप लगाते हुए आप में शामिल हुए थे, जिसके बाद ही आप ने उनको फतेहगढ़ साहिब की सीट से अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था। उनके सामने कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. अमर सिंह मैदान में हैं। होशियारपुर से कांग्रेस छोड़ आप में शामिल हुए डॉ. राजकुमार चब्बेवाल चुनाव लड़ रहे हैं। चब्बेवाल के सामने यहां कांग्रेस से यामिनी गोमर प्रत्याशी हैं।