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पराली जलाने से निपटने को जल्द बनेगी नीति

Sat, 04 Jan 2014 02:47 PM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 04 Jan 2014 02:47 PM IST
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policy to stop burning of prali
मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा है कि पराली जलाने की समस्या के हल के लिए जल्द ही किसान पक्षीय नीति बनाई जाएगी। ताकि एक तरफ वातावरण प्रदूषण की समस्या से निपटा जा सके।
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दूसरी तरफ किसानों को पराली बेचकर अच्छी आमदनी हो। उन्होंने गैर परंपरागत ऊर्जा सोर्सेज से बिजली पैदा करने के लिए पराली के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल पर जोर दिया।
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मुख्यमंत्री शुक्रवार को पंजाब भवन में पंजाब राज्य साइंस व तकनीकी काउंसिल व प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा आयोजित कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब में धान की पराली समेत बड़े स्तर पर बायोमास पैदा होता है। जिसका इस्तेमाल बिजली पैदा करने में करना चाहिए। ताकि पराली बेकार न जाए, किसानों को आर्थिक फायदा हो।
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इस समय किसानों के पास पराली जलाने के  अलावा कोई चारा नहीं है। इससे वातावरण प्रदूषण फैलता है, जमीन की उपजाऊ शक्ति भी कम होती है।

उन्होंने पराली जलाने को राष्ट्रीय समस्या बताते हुए इसके हल के लिए जल्द ही इस संबंध में प्रधानमंत्री व केंद्रीय मंत्रियों से मिलने की बात कही। क्योंकि राज्य सरकार तब तक इस समस्या को नहीं हल कर सकती, जब तक केंद्र सरकार मदद नहीं करती।

वह केंद्र के समक्ष बायोमॉस से पैदा होने वाली ईथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने की मौजूदा मात्रा पांच फीसदी से बढ़ा कर दस फीसदी करने की मांग भी उठाएंगे। दूसरे सेशन में बादल ने माहिरों से बायोमॉस आधारित बिजली पैदा करने के बारे में जानकारी हासिल की।

उद्यमियों की मांग पर उन्होंने उद्योग विभाग को हिदायत दी कि बायोमॉस के इस्तेमाल में दिलचस्पी लेने वाली इंडस्ट्री को छूट के संबंध में योजना तैयार की जाए। सीएम ने विभिन्न संस्थानों से बायोमॉस प्रोजेक्ट विकसित करने को तकनीकी सहयता की भी मांग की।


कैबिनेट मंत्री बिक्रमजीत सिंह मजीठिया ने कहा केंद्र सरकार को बायोमॉस से पैदा होने वाली बिजली की दरें 6.24 रुपये प्रति यूनिट से बढ़ा कर 7.50 रुपये प्रति यूनिट करनी चाहिए। ताकि निवेशक आकर्षित हो सकें।

 इससे पहले विभाग की सचिव सीमा जैन ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। इस मौके केंद्र व राज्य सरकार के कई अधिकारी और माहिर मौजूद रहे।

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