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मोहालीः धारा 370 हटाने का विरोध, किलेबंदी के बावजूद मोहाली में घुसे प्रदर्शनकारी, काटा बवाल

Sun, 15 Sep 2019 05:39 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली Published by: ajay kumar Updated Sun, 15 Sep 2019 05:39 PM IST
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Police stopped farmers coming to Chandigarh
किसानों ने लगाया धरना - फोटो : अमर उजाला

पंजाब के विभिन्न किसान यूनियनों ने रविवार को चंडीगढ़ कूच के लिए राज्य स्तरीय रैली बुलाई थी। हालांकि पुलिस ने जिले स्तर पर ही चंडीगढ़ जा रहे किसानों को रोक लिया है। इसके बाद बड़ी संख्या में किसान और महिलाएं बीच सड़क पर ही धरना लगा कर बैठ गईं हैं। सुनाम के गांव महिला चौक के नजदीक भी किसानों का धरना जारी है। इस दौरान उन्होंने पटियाला मुख्य मार्ग को भी रोक दिया है। बताया जा रहा है कि पंजाब के कई इलाकों में ऐसी ही स्थिति है। पंजाब के बठिंडा में भी किसान धरने पर बैठ गए हैं। वहीं प्रशासन भी चौकन्ना है। बता दें कि अनुच्छेद 370 और 35A के हटाने के विरोध में पंजाब के 15 किसान संगठनों ने चंडीगढ़ में राज्य स्तरीय रैली बुलाई है।

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कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35-ए हटाए जाने के विरोध में होने वाले रोष मार्च को लेकर पुलिस प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए थे। जिले में धारा 144 लगाकर धरने, प्रदर्शन व रोष मार्च पर पाबंदी लगा दी गई थी। शनिवार रात से ही वीआईपी सिटी को सील कर दिया गया था। इसके बावजूद कुछ स्टूडेंट्स व मुलाजिम जत्थेबंदी के कार्यकर्त्ता मोहाली में घुस कर धरना देने में कामयाब हो गए। हालांकि पुलिस ने इन प्रदर्शकारी स्टूडेंट्स व मुलाजिमों को हिरासत में ले लिया। इन पर कोई पर्चा दर्ज नहीं हुआ और बाद में इन्हें छोड़ दिया गया।
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कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35-ए हटाने के विरोध में पंजाब के कई संगठनों ने मोहाली से चंडीगढ़ तक रोष मार्च निकालने का ऐलान किया था। इस रोष मार्च को निकालने के लिए भारतीय किसान यूनियन उगराहां की भूमिका अहम थी। इसके साथ ही पंजाब के कई मुलाजिम व स्टूडेंट जत्थेबंदियों ने भी इस रोष मार्च को समर्थन देते हुए शामिल होना था। हाई कोर्ट के दखल के बाद जिले में डीसी गिरीश दयालन ने धारा-144 लगाते हुए धरने, प्रदर्शन व रोष मार्च पर पाबंदी लगा दी थी। इसके चलते पुलिस ने जिले को पूरी तरह सील कर दिया था। रेपिड एक्शन फोर्स के साथ शहर में 2000 पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
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जिले के सभी एंट्री प्वाइंट सील करते हुए कुराली, मुल्लांपुर, जीरकपुर, डेराबस्सी व चुन्नी में नाकेबंदी कर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। फेज 8 के दशहरा ग्राउंड जहां जत्थेबंदियों ने एकत्रित होकर चंडीगढ़ तक रोष मार्च निकालना था, को बैरिकेड से सील कर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया था। पुलिस की इतनी किलेबंदी के बावजूद रविवार को पंजाब स्टूडेंट यूनियन ललकार के कार्यकर्त्ता दशहरा ग्राउंड के पास गुरुद्वारा अंब साहिब तक पहुंच गए और धरना देकर नारेबाजी शुरू कर दी। इस प्रदर्शन का नेतृत्व स्टूडेंट लीडर अमनदीप कौर कर रही थी।

करीब उसी समय मोहाली के रेलवे स्टेशन पर भी मुलाजिम व स्टूडेंट्स जत्थेबंदियों के कुछ सदस्य पहुंच गए और सॉलिडैरिटी कमेटी फॉर कश्मीरी नेशनल स्ट्रगल पंजाब के बैनर तले धरना देकर नारेबाजी शुरू कर दी। ये लोग केंद्र सरकार व भारतीय सेना के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इन लोगों की पुलिस के साथ धक्कामुक्की भी हुई। इसके बाद पुलिस ने हलका बल प्रयोग करते हुए सभी को हिरासत में ले लिया। पुलिस सभी प्रदर्शनकारियों को बसों में भर कर जिले से बाहर ले गई और सभी को देर शाम छोड़ दिया गया।

रेलवे स्टेशन पर प्रदर्शन कर रहे जत्थेबंदियों के सदस्यों में शामिल जगदीश सिंह का कहना था कि वे लोग आने वाले दिनों में राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेेंगे। इन्हीं प्रदर्शनकारियों में शामिल अश्विनी कुमार का कहना था कि कश्मीर में लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं, वे बाहर की दुनिया से कट चुके हैं। प्रदर्शनकारी घाटी में तत्काल संचार सुविधा बहाल करने की मांग भी कर रहे थे।

Police stopped farmers coming to Chandigarh
बठिंडा में भी धरने पर बैठे किसान - फोटो : अमर उजाला

मानसा : किसानों ने बठिंडा-पटियाला सड़क पर लगाया जाम
कश्मीर मसले के हल को लेकर जनतक जत्थेबंदियों द्वारा रविवार को रैली में शामिल होने के लिए जा रहे किसानों को मानसा पुलिस ने कैंचियां स्थित बठिंडा-पटियाला रोड पर रोक लिया गया। इस पर भारतीय किसान यूनियन एकता उगराहां के जिला अध्यक्ष राम सिंह भैणीवाघा की अगुवाई में किसानों ने सड़क पर जाम लगा दिया, जो कई घंटे जारी रहा। भैणीवाघा ने कहा कि सरकार मसले का हल नहीं करना चाहती, अगर मांगों को लेकर लोक या जनतक जत्थेबंदियां शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष का रास्ता अपनाती है तो उन पर पाबंदी लगा दी जाती है। 

संगरूर : किसानों ने पटियाला-बठिंडा मुख्य मार्ग पर लगाया धरना
मोहाली में प्रदर्शन करने जा रहे किसानों को पुलिस ने संबंधित जिलों में ही रोक दिया। संगरूर के किसानों समेत अन्य संगठनों से संबंधित प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने गांव महिलां चौक में पटियाला मुख्य मार्ग पर रोक दिया। गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने मुख्य सड़क पर धरना लगाकर सरकार के खिलाफ रोष जताया। हजारों प्रदर्शनकारियों ने चक्का जाम कर दिया। दोपहर दो बजे प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार की अर्थी फूंककर आंदोलन समाप्त कर दिया। इस दौरान भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां, दरबारा सिंह, अमरीक सिंह और सुखपाल सिंह मौजूद रहे।

रैली की नहीं मिली मंजूरी
कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के विरोध में पंद्रह सितंबर यानि आज होने वाली रैली को सुरक्षा कारणों के चलते प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी है। यह फैसला जिला मजिस्ट्रेट कम डिप्टी कमिश्नर गिरीश दियालन की तरफ से लिया गया। जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि रैली के लिए झंडा सिंह निवासी जेठुके, लखविंदर सिंह व कमलप्रीत पन्नू ने 13 सितंबर को शाम चार बजे ईमेल के माध्यम से अर्जी भेजी थी। रैली 15 सितंबर को सुबह 11 बजे से शाम चार बजे तक दशहरा ग्राउंड से यूटी चंडीगढ़ तक करने की योजना थी। इसमें 7500 पुरुष, 500 औरतों व 100 के करीब बच्चों के शामिल होने की संभावना है।

दियालन ने कहा कि प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देश व पंजाब सरकार की एडवाइजरी के संदर्भ में आई एप्लीकेशन पर विचार किया। उन्होंने कहा कि इन दिशा निर्देशों में स्पष्ट है कि ऐसे समागम की मंजूरी के लिए कम से कम सात दिन पहले आवेदन करना होता है।। लेकिन यह अर्जी लेट प्राप्त हुई है। ऐसे में अलग-अलग विभागों से रिपोर्ट मांगी गई। समय की कमी के कारण सारे विभागों से रिपोर्ट प्राप्त नहीं हो सकी है।

 

पुलिस पर आरोप, घरों पर मारे छापे, बनाया दबाव
इस रोष मार्च में अहम भूमिका अदा कर रहे भारतीय किसान यूनियन के सीनियर वाइस प्रधान झंडा सिंह जेठूके का अरोप है कि पुलिस ने रोष मार्च से पहले ही जत्थेबंदियों के सदस्यों व नेताओं के घरों पर छापे मार उन्हें हिरासत में ले लिया था। जेठूके ने कहा कि शनिवार शाम उन्होंने फेज 8 में धरने के लिए टेंट लगवाना था पर पुलिस ने उन्हें टेंट नहीं लगाने दिया और टेंट मालिक को भी हिरासत में ले लिया।

हाई कोर्ट ने डीजीपीज को सौंपी थी जिम्मेदारी, मांगी है स्टेटस रिपोर्ट
कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35-ए हटाने के विरोध में पंजाब के कई संगठनों ने मोहाली से चंडीगढ़ तक रोष मार्च निकालने का ऐलान किया था। इस रोष मार्च को लेकर एक जनहित याचिका भी हाई कोर्ट में दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी डीजीपीज को सौंपी थी। कोर्ट ने पंजाब सरकार व यूटी प्रशासन के अलावा पंजाब व चंडीगढ़ के डीजीपीज और मोहाली के डीसी व एसएसपी को भी नोटिस जारी किया था। यूटी प्रशासन सहित सभी से ही अगली सुनवाई पर स्टेटस रिपोर्ट भी मांगी है। हाईकोर्ट ने किसान संगठनों को भी इस मामले में नोटिस जारी कर प्रतिवादी बनाया था।

डीसी द्वारा धरने-प्रदर्शन व रोष मार्च की अनुमति नहीं दिए जाने के बाद लॉ एंड आर्डर के मद्देनजर पुलिस प्रदर्शन नहीं होने दे सकती थी। कुछ प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशन पहुंच गए थे, लेकिन उन्हें तुरंत वहां से हटा दिया गया। जिले में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। शाम को हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया।
- कुलदीप सिंह चहल, एसएसपी मोहाली

कश्मीर से अनुच्छेद 370 व 35ए हटाने के विरोध में थी रैली
यह रैली कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के विरोध में 15 सितंबर को होनी थी। रैली को लेकर चंडीगढ़ के एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में केस दायर किया था। उसने कहा था कि रैली से इलाके में स्थिति तनावपूर्ण बन सकती है। जैसे ही मामला हाईकोर्ट पहुंचा था। उसके बाद हाईकोर्ट ने पंजाब और चंडीगढ़ दोनों के डीजीपी को सुरक्षा की कमान संभालने के आदेश दिए थे।
 
साथ ही कहा था कि किसी भी कीमत पर जान माल का नुकसान नहीं होना चाहिए। उसके बाद 12 सितंबर को मोहाली जिला प्रशासन ने पूरे जिले में दस नवंबर तक धारा 144 लागू कर दी थी। इसके तहत धरने, रैलियों, प्रदर्शन, हड़ताल व नारेबाजी आदि पर पाबंदी लगा दी गई थी।
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