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पंजाबः मुख्यमंत्री आवास घेरने जाते आप विधायकों को पुलिस ने लिया हिरासत में
Sat, 13 Nov 2021 11:14 PM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Sat, 13 Nov 2021 11:14 PM IST
सार
मुख्यमंत्री का चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास घेरने जा रहे आम आदमी पार्टी के विधायकों को चंडीगढ़ पुलिस हिरासत में ले लिया। पुलिस सभी विधायकों और पार्टी वर्करों को दो घंटे बाद रिहा कर दिया।
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आप कार्यकर्ताओं को रोकते पुलिसकर्मी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में बेरोजगारी के खिलाफ मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास घेरने जा रहे आम आदमी पार्टी (आप) के विधायकों को चंडीगढ़ पुलिस ने सेक्टर-4 स्थित एमएलए हॉस्टल के गेट पर हिरासत में ले लिया। पुलिस सभी विधायकों और पार्टी वर्करों को सेक्टर-3 थाने ले गई, जहां दो घंटे बैठाए रखने के बाद रिहा कर दिया।
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नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा की अगुवाई में शनिवार को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले विधायकों में सरवजीत कौर माणुके, कुलतार सिंह संधवां, मीत हेयर, कुलवंत सिंह पंडोरी, मनजीत सिंह बिलासपुर और जैस सिंह रोडी शामिल थे। तय कार्यक्रम के अनुसार, आप विधायकों को एमएलए हॉस्टल पर एकत्र होकर मुख्यमंत्री आवास की ओर कूच करना था।
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लेकिन चंडीगढ़ पुलिस ने हॉस्टल के दोनों गेटों पर बैरिकेडिंग करके भारी फोर्स तैनात कर दी। आप विधायकों के आगे बढ़ने के प्रयास के दौरान पुलिस से से नोकझोंक और बहस भी हुई। आखिरकार पुलिस हरपाल चीमा समेत सभी विधायकों को हिरासत में ले लिया और बस में बैठाकर सेक्टर-3 पुलिस थाने ले गई।
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मंत्रियों, विधायकों के परिजनों, रिश्तेदारों को मिली नौकरी
इस मौके पर हरपाल चीमा ने पत्रकारों को बताया कि 2017 में कांग्रेस ने घर-घर नौकरी के गारंटी कार्ड भरे थे। लेकिन पौने पांच वर्षों में 55 लाख परिवारों के 5500 नौजवानों को भी नौकरियां नहीं दी गईं। यदि किसी को नौकरी मिली है तो वह दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते, कैबिनेट मंत्री हरकीरत सिंह कोटली के भाई, सांसद रवनीत सिंह बिट्टू के भाई, कैबिनेट मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा के दामाद, पूर्व कैबिनेट मंत्री गुरप्रीत सिंह कांगड़ के दामाद और विधायक राकेश पांडेय के बेटे को।
विधायक फतेहजंग सिंह बाजवा के बेटे और सांसद सदस्य प्रताप सिंह बाजवा का भतीजा भी इस सूची में शामिल था। लेकिन लोगों के विरोध के कारण बाजवा परिवार को अपने बेटे की अफसरी का बलिदान देने पड़ा। चीमा ने कहा कि आम घरों के बेटे-बेटियों के बजाय कांग्रेसियों ने अपने बेटे और दामादों को रेवड़ियों की तरह नौकरियां बांटी।