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हरियाणा एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड में प्लॉट आवंटन घोटाला, सरकार को कई करोड़ रुपये की चपत

Mon, 24 Dec 2018 09:35 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 24 Dec 2018 09:35 AM IST
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Plot allocation scam in Haryana Agricultural Marketing Board
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

हरियाणा एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड में प्लॉट आवंटन घोटाला सामने आया है। बोर्ड के तत्कालीन मुख्य प्रशासक और वर्तमान में सीनियर आईएएस अफसर पर इसे अंजाम देने का आरोप है। आरोप है कि सीनियर आईएएस ने बतौर मुख्य प्रशासक नियमों को ताक पर रखकर 95 जब्त प्लॉट और 41 नए प्लॉट का आवंटन किया। 

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इससे सरकार को 61.39 करोड़ रुपये के राजस्व की चपत लगी। मुख्यमंत्री को 2015 में इस संबंध में कई शिकायतें प्राप्त हुई थीं। जिनके आधार पर मुख्यमंत्री की ओर से तत्कालीन प्रधान सचिव संजीव कौशल ने सीएम उड़नदस्ते को विशेष जांच टीम गठित कर पूरे मामले की छानबीन के आदेश दिए थे।
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सीएम उड़नदस्ते की विशेष जांच टीम और उसके बाद तत्कालीन आईजी सुरक्षा ने भी प्लॉट आवंटन की जांच की। दोनों की जांच में प्लॉट आवंटन में घोटाला सामने आया और इसके लिए तत्कालीन मुख्य प्रशासक को दोषी पाया। 
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सीएम उड़नदस्ते के तत्कालीन एसपी के साथ ही आईजी सुरक्षा की जांच रिपोर्ट भी सरकार को कार्रवाई के लिए भेजी जा चुकी है। रिपोर्ट में लिखा है कि जरूरी कार्रवाई का निर्णय सरकार को अपने स्तर पर लेना है। रिपोर्ट सरकार के पास मौजूद है, अब इस प्लॉट आवंटन घोटाले में सीनियर आईएएस अफसर पर कार्रवाई का इंतजार है।

Plot allocation scam in Haryana Agricultural Marketing Board
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : amar ujala

 दोषी सीनियर आईएएस इस समय सरकार के बड़े महकमे में उच्च पद पर आसीन हैं। मार्केटिंग बोर्ड के तत्कालीन न्यायवादी और प्रबंधक पर भी प्लॉट आवंटन घोटाले में संलिप्त होने के आरोप लगे थे, लेकिन दोनों ही जांच में उनकी कोई भूमिका नहीं पाई गई।

पहली मार्च से 31 अक्तूबर 2014 के बीच आवंटित किए प्लॉट
जांच रिपोर्ट के अनुसार मार्केटिंग बोर्ड पंचकूला के तत्कालीन मुख्य प्रशासक ने अपने कार्यकाल के दौरान पहली मार्च 2014 से 31 अक्तूबर 2014 के बीच पंजाब कृषि उत्पादन मार्केटिंग एक्ट 1961 व हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अचल संपत्ति नियम 2000 और लिमिटेशन एक्ट की धारा-5 के नियमों का उल्लंघन करते हुए पद का दुरुपयोग कर विभिन्न मंडियों में जब्त 95 प्लॉट बहाल कर दोबारा मूल कीमत पर ही आवंटित कर दिए। 

इससे सरकार को 35.13 करोड़ रुपये की अनुमानित हानि हुई। इसी तरह पद का दुरुपयोग कर उन्होंने विभिन्न मंडियों में 41 नए प्लॉट भी आवंटित कर दिए। जिससे सरकार को 26.26 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ। 

सीएम सिटी में सबसे ज्यादा जब्त प्लॉट नियमों के खिलाफ रिलीज किए
तत्कालीन मुख्य प्रशासक ने सीएम सिटी करनाल में सबसे अधिक 66, रोहतक में नौ, गन्नौर में नौ, जींद में पांच, जुंडला में दो, मतलोडा में दो, नारनौल व भिवानी में एक-एक प्लॉट पुराने मूल्य पर दोबारा आवंटित किया।

नोटिस देने पर भी जमा नहीं कराई थी राशि, तब प्लॉट हुए जब्त

सीएम उड़नदस्ते ने जांच रिपोर्ट में लिखा है कि मार्केटिंग बोर्ड की विभिन्न मंडियों में वर्ष 1988 से 2011 के बीच प्लॉटों को खुली बोली पर बेचा गया था। प्लॉट आवंटियों ने 25 फीसदी राशि मौके पर ही जमा करा दी। बकाया राशि आवंटन के 30 दिन में जमा करानी थी। लेकिन उन्होंने बार-बार नोटिस देने पर भी राशि जमा नहीं कराई।

 इस पर संबंधित मार्केट कमेटियों ने प्रस्ताव पारित कर प्लॉट जब्त कर लिए। इसके बाद मंडियों में काम सुचारु रूप से चालू होने पर प्लॉट की कीमत कई गुणा हो गई। जिसे देखते हुए आवंटियों ने कोर्ट व मुख्य प्रशासक के समक्ष मूल कीमत पर दोबारा प्लॉट आवंटित करने की अपीलें दायर कीं। इनमें आवंटियों ने आधारहीन तथ्य पेश किए थे, जिन्हें स्वीकार करते हुए तत्कालीन मुख्य प्रशासक ने सभी जब्त प्लॉट मूल कीमत पर ही बहाल कर दिए।

इन मंडियों में नियमों के विपरीत नए प्लॉट आवंटित
तत्कालीन मुख्य प्रशासक ने गोहाना में 11, करनाल में 9, सफीदों में 6, हिसार, गन्नौर, सोनीपत व असंध में तीन-तीन, फरीदाबाद में दो व चरखी दादरी में एक प्लॉट नियमों को दरकिनार कर आवंटित किया। 

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