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Hindi News ›   Chandigarh ›   Play School for Childrens of Government Employees under Maternity Benefit Act 1961

देखिए, कहीं घोषणा बनकर ही न रह जाए क्रेच की सुविधा...जानिए क्या है प्रावधान और नियम

Sun, 13 Jan 2019 04:08 PM IST
खुशबू गोयल सीमा एस आनंद, अमर उजाला, चंडीगढ़
सीमा एस आनंद, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sun, 13 Jan 2019 04:08 PM IST
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Play School for Childrens of Government Employees under Maternity Benefit Act 1961
प्ले स्कूल
50 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले ऑफिस में क्रेच की सुविधा दिए जाने का भले ही कानूनी प्रावधान कर दिया गया हो, लेकिन पंजाब, हरियाणा सरकार के ज्यादातर विभाग इससे इत्तेफाक नहीं रखते। चंडीगढ़ स्थित सरकारी दफ्तरों का जायजा लिया गया तो क्रेच कहीं नहीं मिला। आला अफसरों से बात की गई तो सामने आया कि कहीं संबंधित विभाग ही नहीं चाहते कि क्रेच बने तो कहीं फंड की कमी आड़े आ गई। सिविल एविएशन विभाग हरियाणा सेक्टर 17-बी, चंडीगढ़, श्रम आयुक्त हरियाणा, चंडीगढ़, हरियाणा स्टेट फेडरेशन ऑफ को-आपरेटिव शुगर मिल, पंचकूला और खादी भवन, पंचकूला, पानीपत और गुरुग्राम ने तो साफ-साफ कह दिया है कि उनके यहां क्रेच की जरूरत ही नहीं है।
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ऐसे में यह क्रेच की सुविधा कहीं घोषणा ही बनकर न रह जाए। पंजाब की सोशल सिक्योरिटी एंड डेवलपमेंटऑफ वुमन एंड चिल्ड्रेन विभाग की कैबिनेट मंत्री अरुणा चौधरी ने तो इसका सारा दोष केंद्र सरकार पर मंढ दिया है। वे बोलीं कि इसके लिए एक तिहाई फंड कें द्र को देना था। लेकिन वह देने को तैयार नहीं है और हमारे पास फंड है नहीं। हर दो-तीन माह बाद रिमाइंडर प्रपोजल भेजा जाता है, लेकिन फंड मिल नहीं रहा। जैसे ही मिलेगा इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
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बता दें कि मैटरनिटी बैनिफिट एक्ट 1961 में सुधार के बाद 1 अप्रैल 2017 को नया एक्ट मातृत्व लाभ (संशोधन) अधिनियम को लाया गया था, जिसमें मैटरनिटी लीव 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह करने और गोद लेने की स्थिति में बच्चे को पालने के लिए मां को (गोद लेने की तारीख से) 12 सप्ताह की मैटरनिटी लीव का प्रावधान किया गया है। साथ ही जिस सरकारी या निजी ऑफिस में 50 या इससे अधिक कर्मचारी (चाहे महिला या पुरुष) हैं, वहां क्रेच का होना जरूरी कर दिया गया है। चूंकि बच्चे की परवरिश की जिम्मेदारी माता-पिता दोनों की होती है। इसलिए संस्थान में केवल पुरुष कर्मचारी होने पर भी क्रेच होना जरूरी होगा और यह सुविधा बिल्कुल मुफ्त दी जाएगी।
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इस सुविधा से कार्यक्षमता बढ़ेगी

‘कार्यस्थल पर बच्चे की केयर के लिए क्रेच खुलना किसी आशीर्वाद से कम नहीं है। इससे आप काम के साथ-साथ बच्चे की डेली ग्रोथ भी देखते रहते हैं। मेरा बच्चा दो साल का है। कभी माताजी तो कभी सासु मां को बच्चे की देखभाल के लिए आना पड़ता है। कार्यस्थल पर क्रेच होगा तो दफ्तर के काम के साथ-साथ महिलाएं अपने मां होने का फर्ज भी अदा कर पाएंगी। ’नैक’ (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) की टीम तो यह तक कहकर जाती है कि कॉलेज में पढ़ाई के दौरान यदि छात्रा की शादी हो जाती है और फाइनल में आते-आते कोई बच्चा भी हो जाता है तो उसकी रिपोर्ट बनाकर दी जाए।’
- मोनिका एस जाखड़, लेक्चरर, गवर्नमेंट कालेज, हिसार

करियर के साथ बच्चे की देखभाल
‘कार्यस्थल पर क्रेच की सुविधा होना तो बहुत जरूरी है। मैं यूएस एमएनसी ‘शिकागो ब्रिज एंड इम्पोर्ट’ कंपनी में कार्यरत थी। बच्चों की केयर के लिए ही मुझे अपनी जॉब छोड़नी पड़ी। अगर यह सुविधा होती तो मैं बच्चे की केयर के साथ-साथ अपनी जॉब भी सिक्योर कर लेती। यह सुविधा मिल जाए तो मांएं बच्चों की देखभाल के साथ जॉब भी कंटीन्यू रख सकती हैं।’
- शीतल बजाज, वर्किंग वुमेन, गुरुग्राम

क्या कहती हैं अधिकारी   
‘17 अक्तूबर 2018 को सभी जिलों के डिप्टी कमिश्नरों को पत्र लिखे जा चुके हैं। जैसे ही वहां से जवाब आता है, यह कार्य शुरू कर दिया जाएगा।’
- राजबाला कटारिया, डिप्टी डायरेक्टर, डब्ल्यूसीडी विभाग, हरियाणा

‘26 नवंबर 2018 को डीपीओ को पत्र लिखकर क्रेच खुलवाने के स्टेटस केबारे में पूछा गया था। छह जिलों से रिपोर्ट आई है कि उनके यहां क्रेच की जरूरत ही नहीं है।’
- बबीता, प्रोजेक्ट ऑफिसर, डब्ल्यूसीडी विभाग, हरियाणा
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