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Chandigarh News: पीजीआई के सारथी खुद बेसहारा, मरीजों की मदद में लाचार

Mon, 02 Mar 2026 02:28 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Mar 2026 02:28 AM IST
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PGI's charioteer is helpless himself, helpless in helping patients
चंडीगढ़। मरीजों और उनके परिजनों की सहायता के लिए शुरू किया गया पीजीआई का प्रोजेक्ट सारथी इन दिनों सवालों के घेरे में है। प्रशासन जहां स्वयंसेवकों को विधिवत प्रशिक्षण और टूलकिट देने का दावा करता है, वहीं अस्पताल परिसर में तैनात कई सारथी स्वयंसेवक ओपीडी की भारी भीड़ के बीच असहाय नजर आ रहे हैं।
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मौके पर देखने में आया कि कई स्वयंसेवकों को अलग-अलग फ्लोर पर स्थित विभागों, काउंटरों और प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं है। मरीज जब किसी खास विभाग या जांच कक्ष के बारे में पूछते हैं तो कई बार स्वयंसेवक खुद स्टाफ से जानकारी लेते दिखाई देते हैं। इससे न केवल मरीजों का समय बर्बाद होता है बल्कि परियोजना की तैयारी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। खासतौर पर छात्राओं को ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबी ड्यूटी के दौरान घंटों खड़े रहकर सेवा देनी पड़ती है। कुछ स्वयंसेवकों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि ऑन-ग्राउंड ओरिएंटेशन और विभागवार व्यावहारिक प्रशिक्षण नहीं दिया जा रहा है।
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मरीजों के परिजनों का कहना है कि यदि स्वयंसेवकों को अस्पताल की पूरी मैपिंग, विभागों की लोकेशन और प्रक्रियाओं की सही जानकारी दी जाए तो वे वास्तव में मददगार साबित हो सकते हैं। फिलहाल कई बार स्थिति ऐसी बन जाती है कि सारथी स्वयंसेवक खुद ही व्यवस्था के बीच भटके हुए दिखते हैं।
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सारथी बना चुके हैं रिकॉर्ड
पीजीआई के प्रोजेक्ट सारथी ने सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। संस्थान प्रशासन के अनुसार अब तक करीब 1,700 छात्र स्वयंसेवक 1,00,000 से अधिक सेवा घंटे पूरे कर चुके हैं। इन स्वयंसेवकों ने मरीजों को विभागों तक पहुंचाने, बुजुर्गों और दिव्यांगों की सहायता करने, ओपीडी और आपातकालीन सेवाओं में सहयोग देने जैसी जिम्मेदारियां निभाई हैं।पीजीआई प्रशासन का दावा है कि स्वयंसेवकों को प्रोजेक्ट सारथी टीम की ओर से विधिवत प्रशिक्षण दिया जाता है।

इसके लिए एक विशेष टूलकिट तैयार की गई है जिससे उन्हें अपने कार्य और जिम्मेदारियों की जानकारी मिलती है। स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन सारथी टीम और सिक्योरिटी ऑफिसर करते हैं। कार्यक्रम में शामिल छात्राओं की सुरक्षा के लिए विशेष मानक भी निर्धारित किए गए हैं। 15 दिनों की ड्यूटी पूरी करने के बाद स्वयंसेवकों को पीजीआई के डायरेक्टर की ओर से प्रमाणपत्र प्रदान किया जाता है। अब तक 13 कॉलेज और 6 स्कूल इस पहल से जुड़ चुके हैं, जबकि कुल 1,845 स्वयंसेवक इस परियोजना के अंतर्गत सेवाएं दे चुके हैं।
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