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पहली बार : पीजीआई ने प्लाज्मा थेरेपी से आठ साल के बच्चे का लकवा किया दूर, लौटी आंखों की रोशनी
Thu, 07 Jan 2021 10:51 AM IST
निवेदिता वर्मा
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Thu, 07 Jan 2021 10:51 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़।
- फोटो : फाइल फोटो
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चंडीगढ़ पीजीआई के विशेषज्ञों ने नर्वस सिस्टम से जुड़ी जटिल बीमारी का प्लाज्मा थेरेपी से इलाज तलाश कर मिसाल कायम की है। सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी ‘एक्यूट डिसेमिनेटेड एनसेपलो’ नामक बीमारी का पहली बार प्लाज्मा एक्सचेंज तकनीकी से सफल इलाज कर हाथ-पैर में लकवा और आंखों की देखने की क्षमता खो चुके 8 साल के एक बच्चे को ठीक करने में सफलता हासिल की गई है।
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पांच से आठ के बच्चों में होती है यह गंभीर बीमारी
एक्यूट डिसेमिनेटेड एनसेपलो नामक बीमारी से ग्रसित बच्चा सेंट्रल नर्वस सिस्टम से जुड़ी जटिल बीमारी से ग्रस्त था। यह 5 से 8 साल के बीच के बच्चों में होने वाली एक गंभीर बीमारी है। कुछ केस में यह भी पता चलता है कि बसंत और तीव्र ठंड में यह अचानक अटैक करती है।
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विकसित देशों में एक लाख की आबादी में इसके .3 से .6 प्रतिशत तक मरीज पाए जाते हैं। इस ऑटोइम्यून बीमारी में शरीर को बीमारियों से बचाने वाले मॉलिक्यूलर ही संक्रमण के साथ मिलकर काम करने लगते हैं। कुछ मामलों में यह वायरल संक्रमण और टीकाकरण के बाद ही देखने को मिलता है। इसमें शरीर के सेल्स में कई तरह के बदलाव आते हैं।
ये हैं बीमारी के लक्षण
इस बीमारी में दिमाग में रक्त स्राव के साथ ही सूजन व रक्त वाहनियों में सूजन आ जाती है। शुरुआती दौर में या फिर धीरे धीरे यह लक्षण सामने आ सकते हैं। इसमें मरीज को किसी को पहचानने में और समय बताने में परेशानी होती है। हाथ पैर की क्रियाशीलता रुक जाती है। यह दिमाग से अन्य अंगों में सीधे संपर्क स्थापित न होने से संकेत मिलना बंद हो जाने से होता है। आंखों की कोशिकाओं में सूजन आ जाने से देखने की क्षमता चली जाती है।
ऐसे किया इलाज
डॉक्टरों ने इलाज के दौरान बच्चे के भर्ती होने के 12 घंटे बाद मिथाइल प्रेडनिसोलोन का हाईडोज इंजेक्शन दिया गया। यह प्रक्रिया 3 दिनों तक लगातार चली। इससे फायदा नहीं होने पर उसे इम्यून सिस्टम मजबूत करने वाला हाइ डोज इंजेक्शन 2 दिनों तक लगातार दिया गया। उससे भी कोई फायदा न होने पर तीसरे दिन बच्चे का प्लाज्मा एक्सचेंज करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें 1 दिन छोड़कर 5 सत्र में प्लाज्मा एक्सचेंज किया गया। प्लाज्मा एक्सचेंज के दौरान पहले दिन बच्चे को उल्टी, कंपकंपी और लो बीपी की शिकायत मिली, लेकिन अगले दिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। बाकी के 4 सत्र में उसे कोई परेशानी नहीं हुई। प्लाज्मा एक्सचेंज करने के 18 दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।3 महीने बाद हुआ पूरी तरह ठीक
अस्पताल से छुट्टी होने के दौरान वह अपने पैरों पर चलकर गया और उसे देखने में भी किसी तरह की परेशानी नहीं हुई। उसे 1 महीने बाद फॉलोअप के लिए बुलाया गया। उस दौरान भी उसे कुछ दवाइयां दी गई। अगले फॉलोअप में 2 महीने बाद भी उसे कुछ दवाइयों की डोज दी गई। 3 महीने बाद के फॉलोअप में वह 100 प्रतिशत ठीक पाया गया। अब वह सामान्य बच्चों की तरह खेलकूद और अन्य गतिविधियों में शामिल होता है।
इन्होंने मिलकर किया काम
पीजीआई ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के डॉ. पीपी त्रिपाठी, आर हंस, आरआर शर्मा, डीएस लंबा, पीडियाट्रिक मेडिसिन विभाग के एन संख्यान, सी. भागवत और रेडियो डायग्नोस्टिक एंड इमेजेस विभाग के डॉ. पी सिंह ने मिलकर उस बच्चे का इलाज किया।