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Chandigarh News: पीजीआई को पहली बार आईएसजीएआर की मेजबानी, पेट की बीमारियों पर नियंत्रण पाने के लिए जुटे विशेषज्ञ
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चंडीगढ़। पीजीआई को इंडियन सोसाइटी ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंड एब्डॉमिनल रेडियोलॉजी (आईएसजीएआर) की पहली बार मेजबानी मिली है। निदेशक प्रोफेसर विवेक लाल ने शनिवार को सम्मेलन का उद्घाटन किया। भार्गव ऑडिटोरियम में आयोजित छठे वार्षिक सम्मेलन का उद्देश्य विशेषज्ञों द्वारा पेट की बीमारियों की शीघ्र पहचान और रोकथाम के प्रति जागरूकता पैदा करना है। यह सम्मेलन 19 नवंबर तक चलेगा। प्रोफेसर विवेक लाल ने पीजीआई में इस तरह के पहले सम्मेलन के आयोजन के लिए विभाग को बधाई दी और रोगी देखभाल के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की। उन्होंने फैकल्टी को भविष्य में गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल और एब्डोमिनल रेडियोलॉजी जैसी अधिक विशिष्ट फैलोशिप शुरू करने के लिए सक्रिय रूप से प्रोत्साहित किया। 2016 में गठित आईएसजीएआर सोसाइटी पूरी तरह से पेट और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल रेडियोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करती है। इसका लक्ष्य देशभर में सम्मेलन और हैंड्स ऑन वर्कशॉप आयोजित करना है। 500 से अधिक सदस्यों वाली यह सोसाइटी पेट की बीमारियों की शीघ्र पहचान और रोकथाम के लिए सामाजिक जागरूकता पैदा कर रेडियोलॉजिस्ट की भावी पीढ़ियों को पेट की बीमारियों के प्रति सचेत रहने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।
आईएसजीएआर सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. रोचिता रामानन बतौर विशिष्ट अतिथि सम्मेलन में भाग लेने के लिए चेन्नई से पहुंचीं। आयोजन के चेयरपर्सन प्रोफेसर मंदीप कांग ने कहा कि दुनियाभर से विशेषज्ञ सूजन, आंत्र रोग से लेकर विभिन्न जीआई, पेट, यकृत, अग्नाशय, गर्भाशय, डिंब ग्रंथि के कैंसर जैसे पेट की इमेजिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के लिए इस कार्यक्रम में जुटे। विश्व प्रसिद्ध एमडी एंडरसन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल यूएसए के कई वरिष्ठ फैकल्टी सम्मेलन में भाग लेने आए और व्याख्यान दिए। एमडी एंडरसन की टीम का नेतृत्व प्रोफेसर हरमीत कौर ने किया। कौर पीजीआई की पूर्व छात्रा हैं। उनके साथ उनके वरिष्ठ सहयोगी प्रोफेसर मेलिसा टैगार्ट, प्रोफेसर जेरेमी इरास्मस और प्रोफेसर वेंकटेश्वर सुरभि भी मौजूद रहे। इसके अलावा अमेरिका के नामी अस्पताल मेयो क्लिनिक रोचेस्टर के वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने भी सम्मेलन में भाग लिया। आयोजन सचिव डॉ. उज्ज्वल गोरसी ने बताया कि डॉ. आशीष खंडेलवाल और डॉ. आर सुधाकर वेंकटेश सहित अन्य विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान दिए। टोरंटो विश्वविद्यालय के डॉ. सतीश कृष्णा ने भी अपनी रिपोर्ट रखी।
सम्मेलन के कोषाध्यक्ष डॉ. अनमोल भाटिया ने बताया कि इस दौरान कई व्यावहारिक कार्यशालाएं आयोजित हुई, जहां प्रतिनिधियों को विस्तार से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। पहले दिन प्रशिक्षुओं, रेजीडेंट्स और कनिष्ठ रेडियोलॉजिस्टों ने भाग लिया। सम्मेलन के संयुक्त सचिव डॉ. हरीश भुजाडे ने कहा कि व्याख्यानों के अलावा दो दिनों में बहु-विषयक संगोष्ठियों की योजना बनाई गई है, जहां रेडियोलॉजिस्ट, चिकित्सक, सर्जन विभिन्न विकृति के नए समाधान खोजने के उद्देश्य से विचार-मंथन करेंगे।
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अब पेट की कई बीमारियों का आसानी से किया जा सकता है इलाज
विभाग के प्रमुख और सम्मेलन के संरक्षक प्रो. एमएस संधू ने बताया कि पिछले दो दशकों में मल्टीडिटेक्टर सीटी स्कैनर, हाई फील्ड एमआर स्कैनर और डिजिटल घटाव एंजियोग्राफी तकनीक और इंटरवेंशनल हार्डवेयर में महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति के साथ, पेट की कई बीमारियों का अब इंटरवेंशनल गैस्ट्रोरेडियोलॉजिस्ट द्वारा न्यूनतम इनवेसिव उपचार (सिवनी रहित सर्जरी) आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन, क्रायोएब्लेशन, माइक्रोवेव एब्लेशन और ट्रांसएर्टरियल केमोएम्बोलाइजेशन जैसी प्रक्रियाओं ने हाल के दिनों में कैंसर के इलाज को बदल दिया है।
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आईएसजीएआर सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. रोचिता रामानन बतौर विशिष्ट अतिथि सम्मेलन में भाग लेने के लिए चेन्नई से पहुंचीं। आयोजन के चेयरपर्सन प्रोफेसर मंदीप कांग ने कहा कि दुनियाभर से विशेषज्ञ सूजन, आंत्र रोग से लेकर विभिन्न जीआई, पेट, यकृत, अग्नाशय, गर्भाशय, डिंब ग्रंथि के कैंसर जैसे पेट की इमेजिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करने के लिए इस कार्यक्रम में जुटे। विश्व प्रसिद्ध एमडी एंडरसन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल यूएसए के कई वरिष्ठ फैकल्टी सम्मेलन में भाग लेने आए और व्याख्यान दिए। एमडी एंडरसन की टीम का नेतृत्व प्रोफेसर हरमीत कौर ने किया। कौर पीजीआई की पूर्व छात्रा हैं। उनके साथ उनके वरिष्ठ सहयोगी प्रोफेसर मेलिसा टैगार्ट, प्रोफेसर जेरेमी इरास्मस और प्रोफेसर वेंकटेश्वर सुरभि भी मौजूद रहे। इसके अलावा अमेरिका के नामी अस्पताल मेयो क्लिनिक रोचेस्टर के वरिष्ठ संकाय सदस्यों ने भी सम्मेलन में भाग लिया। आयोजन सचिव डॉ. उज्ज्वल गोरसी ने बताया कि डॉ. आशीष खंडेलवाल और डॉ. आर सुधाकर वेंकटेश सहित अन्य विशेषज्ञों ने अपने व्याख्यान दिए। टोरंटो विश्वविद्यालय के डॉ. सतीश कृष्णा ने भी अपनी रिपोर्ट रखी।
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सम्मेलन के कोषाध्यक्ष डॉ. अनमोल भाटिया ने बताया कि इस दौरान कई व्यावहारिक कार्यशालाएं आयोजित हुई, जहां प्रतिनिधियों को विस्तार से प्रशिक्षण प्रदान किया गया। पहले दिन प्रशिक्षुओं, रेजीडेंट्स और कनिष्ठ रेडियोलॉजिस्टों ने भाग लिया। सम्मेलन के संयुक्त सचिव डॉ. हरीश भुजाडे ने कहा कि व्याख्यानों के अलावा दो दिनों में बहु-विषयक संगोष्ठियों की योजना बनाई गई है, जहां रेडियोलॉजिस्ट, चिकित्सक, सर्जन विभिन्न विकृति के नए समाधान खोजने के उद्देश्य से विचार-मंथन करेंगे।
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विभाग के प्रमुख और सम्मेलन के संरक्षक प्रो. एमएस संधू ने बताया कि पिछले दो दशकों में मल्टीडिटेक्टर सीटी स्कैनर, हाई फील्ड एमआर स्कैनर और डिजिटल घटाव एंजियोग्राफी तकनीक और इंटरवेंशनल हार्डवेयर में महत्वपूर्ण तकनीकी प्रगति के साथ, पेट की कई बीमारियों का अब इंटरवेंशनल गैस्ट्रोरेडियोलॉजिस्ट द्वारा न्यूनतम इनवेसिव उपचार (सिवनी रहित सर्जरी) आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन, क्रायोएब्लेशन, माइक्रोवेव एब्लेशन और ट्रांसएर्टरियल केमोएम्बोलाइजेशन जैसी प्रक्रियाओं ने हाल के दिनों में कैंसर के इलाज को बदल दिया है।