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पीजीआई रखे ध्यान... काम के दबाव के चलते रेजीडेंट डॉक्टरों में बढ़ रहा तनाव
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चंडीगढ़। काम का दबाव बढ़ने से पीजीआई में रेजीडेंट डॉक्टरों का तनाव बढ़ता जा रहा है। इसका सीधा असर उन युवाओं के भविष्य पर पड़ रहा है जो कड़ी मेहनत के बाद पीजीआई जैसे संस्थान में प्रवेश तो कर ले रहे हैं, लेकिन उसके बाद तनाव के कारण ऐसे कदम उठा रहे हैं जो उनके सपनों को चूर चूर कर दे रहा है। इसका ताजा उदाहरण है न्यूरो सर्जरी विभाग की रेजीडेंट डॉक्टर का तनाव में आकर खुद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास करना।
स्थिति को नियंत्रित में करने के लिए डॉक्टर को उसके लखनऊ स्थित घर तो भेज दिया गया है, लेकिन इस बात पर अभी संशय है कि वह पीजीआई दोबारा कब तक लौटेगी। इन मामलों पर पीजीआई प्रशासन कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। लेकिन रेजीडेंट डॉक्टर एक के बाद एक घटना होने के कारण काफी रोष में हैं। उनका कहना है कि एनआईआरएफ की रैंकिंग में स्थान बनाने से ज्यादा जरूरी अपने परिसर को तनाव मुक्त करने पर होना चाहिए, ताकि देश को अच्छे विशेषज्ञ मिले और चिकित्सा संस्थान शीर्ष पर पहुंचे।
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डॉ. उत्तम ठाकु र बोले- जॉब मैनुअल ही एकमात्र उपाय
पीजीआई रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. उत्तम ठाकु र का कहना है कि इस समस्या के समाधान का एकमात्र उपाय जॉब मैनुअल लागू करना है, क्योंकि रेजीडेंट डॉक्टरों को अपनी ड्यूटी करने से कोई परेशानी नहीं है। लेकिन उनसे इसके अलावा अन्य ऐसे कई कार्य कराए जा रहे हैं जिससे उनके काम के घंटे में तीन से चार घंटे अतिरिक्त जुड़ जा रहे हैं जबकि इस अतिरिक्त समय में वे अपने लिए कुछ कर सकते हैं जिससे वे वंचित रह जा रहे हैं। ऐसे में पीजीआई प्रशासन को सबसे पहले यह तय करना होगा कि रेजीडेंट डॉक्टरों का काम क्या है और उनसे उसके अलावा अन्य कार्य न कराया जाए। जॉब मैनुअल की फाइल निदेशक के स्तर पर लंबित है।
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सीनियरों के अड़ियल रवैये पर नजर रखना जरूरी
तनाव का शिकार होकर पीजीआई से इस्तीफा देने वाले न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. संदीप यादव का कहना है कि महज 10 महीने में उनके विभाग के चार रेजीडेंट डॉक्टर पीजीआई छोड़ चुके हैं, लेकिन पीजीआई प्रशासन पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा। न्यूरो सर्जरी में हुए हालिया मामले पर उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं के पीछे सीनियर का अड़ियल रवैया जिम्मेदार है। इसलिए उन पर नजर रखने की जरूरत है। अगर ऐसा संभव नहीं है तो एम्स की तर्ज पर मानव संसाधन बढ़ाया जाए। वहीं, सीनियर की प्रताड़ना का शिकार होकर पीजीआई से इस्तीफा दे चुकी पल्मोनरी मेडिसिन की अभिनंदया का कहना है कि जब तक पीजीआई में सीनियर और जूनियर के बीच का भेदभाव समाप्त नहीं होगा तब तक तनाव दूर नहीं हो सकता।
इनसेट-
ये है हालिया मामला
पीजीआई के न्यूरो सर्जरी विभाग की रेजीडेंट डॉक्टर ने 17 नवंबर की रात तनाव में आकर खुद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था। जिसे समय रहते जानकारी मिलने पर रोक लिया गया। अनहोनी की आशंका पर पीजीआई प्रशासन ने उसे अगले ही दिन दो वरिष्ट सहयोगियों के साथ उसके लखनऊ स्थिति निवास पर भेज दिया है।
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स्थिति को नियंत्रित में करने के लिए डॉक्टर को उसके लखनऊ स्थित घर तो भेज दिया गया है, लेकिन इस बात पर अभी संशय है कि वह पीजीआई दोबारा कब तक लौटेगी। इन मामलों पर पीजीआई प्रशासन कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। लेकिन रेजीडेंट डॉक्टर एक के बाद एक घटना होने के कारण काफी रोष में हैं। उनका कहना है कि एनआईआरएफ की रैंकिंग में स्थान बनाने से ज्यादा जरूरी अपने परिसर को तनाव मुक्त करने पर होना चाहिए, ताकि देश को अच्छे विशेषज्ञ मिले और चिकित्सा संस्थान शीर्ष पर पहुंचे।
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डॉ. उत्तम ठाकु र बोले- जॉब मैनुअल ही एकमात्र उपाय
पीजीआई रेजीडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. उत्तम ठाकु र का कहना है कि इस समस्या के समाधान का एकमात्र उपाय जॉब मैनुअल लागू करना है, क्योंकि रेजीडेंट डॉक्टरों को अपनी ड्यूटी करने से कोई परेशानी नहीं है। लेकिन उनसे इसके अलावा अन्य ऐसे कई कार्य कराए जा रहे हैं जिससे उनके काम के घंटे में तीन से चार घंटे अतिरिक्त जुड़ जा रहे हैं जबकि इस अतिरिक्त समय में वे अपने लिए कुछ कर सकते हैं जिससे वे वंचित रह जा रहे हैं। ऐसे में पीजीआई प्रशासन को सबसे पहले यह तय करना होगा कि रेजीडेंट डॉक्टरों का काम क्या है और उनसे उसके अलावा अन्य कार्य न कराया जाए। जॉब मैनुअल की फाइल निदेशक के स्तर पर लंबित है।
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सीनियरों के अड़ियल रवैये पर नजर रखना जरूरी
तनाव का शिकार होकर पीजीआई से इस्तीफा देने वाले न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. संदीप यादव का कहना है कि महज 10 महीने में उनके विभाग के चार रेजीडेंट डॉक्टर पीजीआई छोड़ चुके हैं, लेकिन पीजीआई प्रशासन पर इसका कोई असर नहीं पड़ रहा। न्यूरो सर्जरी में हुए हालिया मामले पर उनका कहना है कि ऐसी घटनाओं के पीछे सीनियर का अड़ियल रवैया जिम्मेदार है। इसलिए उन पर नजर रखने की जरूरत है। अगर ऐसा संभव नहीं है तो एम्स की तर्ज पर मानव संसाधन बढ़ाया जाए। वहीं, सीनियर की प्रताड़ना का शिकार होकर पीजीआई से इस्तीफा दे चुकी पल्मोनरी मेडिसिन की अभिनंदया का कहना है कि जब तक पीजीआई में सीनियर और जूनियर के बीच का भेदभाव समाप्त नहीं होगा तब तक तनाव दूर नहीं हो सकता।
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ये है हालिया मामला
पीजीआई के न्यूरो सर्जरी विभाग की रेजीडेंट डॉक्टर ने 17 नवंबर की रात तनाव में आकर खुद को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था। जिसे समय रहते जानकारी मिलने पर रोक लिया गया। अनहोनी की आशंका पर पीजीआई प्रशासन ने उसे अगले ही दिन दो वरिष्ट सहयोगियों के साथ उसके लखनऊ स्थिति निवास पर भेज दिया है।