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पीजीआई को हुआ गलती का एहसास, बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण पर पैनी नजर
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चंडीगढ़। पीजीआई में सीवर ओवरफ्लो का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। पिछले दिनों पीजीआई चौक के पास सीवर जाम होने की शिकायत पर सफाई करने पहुंचे नगर निगम के कर्मचारियों को सीवर लाइन में काफी मात्रा में मेडिकल वेस्ट मिला था। इसके बाद पीजीआई प्रशासन ने यह माना है कि बायो मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन में कहीं ना कहीं लापरवाही की जा रही है। इस पर लगाम के लिए उन्होंने संबंधित कर्मचारियों को निर्देश दे दिया है।
पीजीआई के डीडीए व प्रवक्ता कुमार गौरव ने बताया कि परिसर से प्रतिदिन करीब 3000 किलोग्राम बायो मेडिकल वेस्ट निकलता है, जिसे कचरा प्रबंधन नियमों के अनुसार निस्तारित किया जाता है। इसके लिए संस्थान का बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी के साथ अनुबंध है। लेकिन सीवर में बायो मेडिकल वेस्ट मिलने से यह आशंका जताई जा रही है कि परिसर में काफी संख्या में ठहरने वाले मरीज व उनके परिजन इसे यहां वहां फेंक देते होंगे, जिसके बाद वो किसी तरह सीवर में पहुंच जा रहा है। इसलिए पीजीआई प्रशासन ने संस्थान में स्थित सरायों में बायो मेडिकल वेस्ट और अन्य कचरे के सही निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसकी जांच कर स्थिति का आंकलन भी किया जाएगा।
गौरतलब है चंद दिनों पहले पीजीआई के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के बाहर सीवर का पानी बहने से मरीजों और उनके परिजनों के साथ ही संस्थान के कर्मचारियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी। अमर उजाला ने इस समस्या के कारणों का पता लगाया तो यह बात सामने आई कि संस्थान के बायो मेडिकल वेस्ट से ही उसका सीवर जाम हो रहा है। इस गंभीर समस्या को अमर उजाला ने 25 जून के अंक में ‘मेडिकल वेस्ट को प्लांट भेजने के बजाय सीवर में बहा रहा पीजीआई’ शीर्षक के साथ प्रकाशित किया था। इसके बाद मामले को संज्ञान में लेकर पीजीआई प्रशासन ने तत्काल संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को वास्तविक स्थिति का पता लगाने व बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर की जा रही लापरवाही पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
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पीजीआई के डीडीए व प्रवक्ता कुमार गौरव ने बताया कि परिसर से प्रतिदिन करीब 3000 किलोग्राम बायो मेडिकल वेस्ट निकलता है, जिसे कचरा प्रबंधन नियमों के अनुसार निस्तारित किया जाता है। इसके लिए संस्थान का बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी के साथ अनुबंध है। लेकिन सीवर में बायो मेडिकल वेस्ट मिलने से यह आशंका जताई जा रही है कि परिसर में काफी संख्या में ठहरने वाले मरीज व उनके परिजन इसे यहां वहां फेंक देते होंगे, जिसके बाद वो किसी तरह सीवर में पहुंच जा रहा है। इसलिए पीजीआई प्रशासन ने संस्थान में स्थित सरायों में बायो मेडिकल वेस्ट और अन्य कचरे के सही निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसकी जांच कर स्थिति का आंकलन भी किया जाएगा।
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गौरतलब है चंद दिनों पहले पीजीआई के स्पोर्ट्स कांप्लेक्स के बाहर सीवर का पानी बहने से मरीजों और उनके परिजनों के साथ ही संस्थान के कर्मचारियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी। अमर उजाला ने इस समस्या के कारणों का पता लगाया तो यह बात सामने आई कि संस्थान के बायो मेडिकल वेस्ट से ही उसका सीवर जाम हो रहा है। इस गंभीर समस्या को अमर उजाला ने 25 जून के अंक में ‘मेडिकल वेस्ट को प्लांट भेजने के बजाय सीवर में बहा रहा पीजीआई’ शीर्षक के साथ प्रकाशित किया था। इसके बाद मामले को संज्ञान में लेकर पीजीआई प्रशासन ने तत्काल संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों को वास्तविक स्थिति का पता लगाने व बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण को लेकर की जा रही लापरवाही पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।
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