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रिसर्च में खुलासा: वर्ल्ड में कौन से नंबर पर है PGI, यहां देखिए
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Sun, 24 Apr 2016 12:22 AM IST
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पीजीआई चंडीगढ़
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मेडिकल रिसर्च पेपर के पब्लिकेशन में चंडीगढ़ का पीजीआई विश्व में पांचवे नंबर पर है। पहले नंबर पर अमेरिका का मैसाच्यूसेट्स जनरल हास्पिटल है, जिसने 2005-2014 तक कुल 46 हजार 311 रिसर्च पेपर पब्लिश किए। दूसरे नंबर अमेरिका का मायो क्लीनिक (37 हजार 633), तीसरे नंबर पर दिल्ली का एम्स (11 हजार 377), चौथे नंबर पर चाइना का पेकिंग यूनियन मेडिकल कॉलेज (10 हजार 102) और पांचवें नंबर पर चंडीगढ़ पीजीआई है। पीजीआई ने 2005 से 2014 के दौरान कुल 8 हजार 145 रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं। दसवें नंबर पर लखनऊ पीजीआई (3 हजार 499), 11वें नंबर पर पाकिस्तान की अगा खान यूनिवर्सिटी (2 हजार 332) और 12वें नंबर पर दिल्ली का सर गंगा राम हॉस्पिटल (1 हजार 67) है।
ऐसे किया आकलन
नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम हास्पिटल के डिपार्टमेंट ऑफ सर्जिकल गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी एंड लीवर ट्रांसप्लांट के शोधकर्ता समर्थ राय, इशान शाह, सिमरन नंदी ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) से एफिलिऐटेड 579 इंडियन मेडिकल इंस्टीट्यूशन व हास्पिटल्स को शामिल किया। इन सभी इंस्टीट्यूट के साल 2005 से 2014 के बीच पब्लिश होने वाले ऑरिजनल आर्टिकल्स, रिव्यू, केस रिपोर्ट व रिपोर्ट ऑफ सिंपोजिया को शामिल किया गया है। शोधकर्ताओं ने स्कोपस (साइंटिस्ट सर्च इंजन) का इस्तेमाल कर सभी मेडिकल इंस्टीट्यूट के रिसर्च आउटपुट, राज्यों के आउटपुट, देश के चुनिंदा और विदेशों के नामी इंस्टीट्यूट का तुलनात्मक अध्ययन किया। शोधकर्ताओं की रिसर्च करंट मेडिसिन रिसर्च एंड प्रैक्टिस में पब्लिश हुई है।
बाकी इंस्टीट्यूट की हालत बद से बदतर
शोधकर्ताओं ने जांच में पाया है कि 579 मेडिकल इंस्टीट्यूट में से 500 इंस्टीट्यूट की हालत बद से बदतर है। 57 प्रतिशत इंस्टीट्यूट तो ऐसे हैं, जिन्होंने दस वर्षों में एक भी रिसर्च नहीं की है। सिर्फ 25 ऐसे इंस्टीट्यूट हैं, जो हर साल 100 से ज्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश कर रहे हैं। रिसर्च की हालत पतली होने के पीछे कॉलेजों ने दलील दी है कि उन पर क्लिनिकल बोझ ज्यादा है, जिस कारण उन्हें एकेडमिक एक्टिविटीज की तरफ समय नहीं मिलता। लेकिन शोधकर्ता मानते हैं कि इसके पीछे मुख्य वजह मार्गदर्शन और रोल मॉडल की कमी का होना है। यह भी सामने आया है कि कई इंस्टीट्यूट रिसर्च प्रोजेक्ट को सपोर्ट नहीं करते हैं। यह भी सत्य है कि वर्ल्ड के जो चुनिंदा मेडिकल इंस्टीट्यूट पेशेंट केयर के साथ पब्लिकेशन में भी नंबर वन है।
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ऐसे किया आकलन
नई दिल्ली स्थित सर गंगा राम हास्पिटल के डिपार्टमेंट ऑफ सर्जिकल गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी एंड लीवर ट्रांसप्लांट के शोधकर्ता समर्थ राय, इशान शाह, सिमरन नंदी ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन (एनबीई) से एफिलिऐटेड 579 इंडियन मेडिकल इंस्टीट्यूशन व हास्पिटल्स को शामिल किया। इन सभी इंस्टीट्यूट के साल 2005 से 2014 के बीच पब्लिश होने वाले ऑरिजनल आर्टिकल्स, रिव्यू, केस रिपोर्ट व रिपोर्ट ऑफ सिंपोजिया को शामिल किया गया है। शोधकर्ताओं ने स्कोपस (साइंटिस्ट सर्च इंजन) का इस्तेमाल कर सभी मेडिकल इंस्टीट्यूट के रिसर्च आउटपुट, राज्यों के आउटपुट, देश के चुनिंदा और विदेशों के नामी इंस्टीट्यूट का तुलनात्मक अध्ययन किया। शोधकर्ताओं की रिसर्च करंट मेडिसिन रिसर्च एंड प्रैक्टिस में पब्लिश हुई है।
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बाकी इंस्टीट्यूट की हालत बद से बदतर
शोधकर्ताओं ने जांच में पाया है कि 579 मेडिकल इंस्टीट्यूट में से 500 इंस्टीट्यूट की हालत बद से बदतर है। 57 प्रतिशत इंस्टीट्यूट तो ऐसे हैं, जिन्होंने दस वर्षों में एक भी रिसर्च नहीं की है। सिर्फ 25 ऐसे इंस्टीट्यूट हैं, जो हर साल 100 से ज्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश कर रहे हैं। रिसर्च की हालत पतली होने के पीछे कॉलेजों ने दलील दी है कि उन पर क्लिनिकल बोझ ज्यादा है, जिस कारण उन्हें एकेडमिक एक्टिविटीज की तरफ समय नहीं मिलता। लेकिन शोधकर्ता मानते हैं कि इसके पीछे मुख्य वजह मार्गदर्शन और रोल मॉडल की कमी का होना है। यह भी सामने आया है कि कई इंस्टीट्यूट रिसर्च प्रोजेक्ट को सपोर्ट नहीं करते हैं। यह भी सत्य है कि वर्ल्ड के जो चुनिंदा मेडिकल इंस्टीट्यूट पेशेंट केयर के साथ पब्लिकेशन में भी नंबर वन है।
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ये हैं भारत के टॉप पांच इंस्टीट्यूट
एम्स
इंस्टीट्यूट स्टेट पब्लिकेशन (2005-2014)
एम्स नई दिल्ली 11,377
पीजीआई चंडीगढ़ 8145
सीएमसी तमिलनाडु (वीलौर) 3742
पीजीआई लखनऊ 3499
केजीएमसी लखनऊ 2878
---------------------------------------------------
ये हैं वर्ल्ड के टॉप मेडिकल इंस्टीट्यूट
इंस्टीट्यूट देश पब्लिकेशन (2005-2014)
मैसाच्यूसेट्स जनरल हास्पिटल अमेरिका 46311
मायो क्लीनिक अमेरिका 37633
एम्स नई दिल्ली 11377
पीकिंग यूनियन कॉलेज बीजिंग 10102
पीजीआई चंडीगढ़ 8145
कोट
अगर एम्स की फैकल्टी और पीजीआई की फैकल्टी का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो पीजीआई की परफार्मेंस काफी बेहतर है। इंस्टीट्यूट की कोशिश है कि वह रिसर्च के मामले में नंबर वन बने। हम लगातार इस ओर प्रयास कर रहे हैं।
-डॉ. अशोक, प्रवक्ता पीजीआई चंडीगढ़।
एम्स नई दिल्ली 11,377
पीजीआई चंडीगढ़ 8145
सीएमसी तमिलनाडु (वीलौर) 3742
पीजीआई लखनऊ 3499
केजीएमसी लखनऊ 2878
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ये हैं वर्ल्ड के टॉप मेडिकल इंस्टीट्यूट
इंस्टीट्यूट देश पब्लिकेशन (2005-2014)
मैसाच्यूसेट्स जनरल हास्पिटल अमेरिका 46311
मायो क्लीनिक अमेरिका 37633
एम्स नई दिल्ली 11377
पीकिंग यूनियन कॉलेज बीजिंग 10102
पीजीआई चंडीगढ़ 8145
कोट
अगर एम्स की फैकल्टी और पीजीआई की फैकल्टी का तुलनात्मक अध्ययन किया जाए तो पीजीआई की परफार्मेंस काफी बेहतर है। इंस्टीट्यूट की कोशिश है कि वह रिसर्च के मामले में नंबर वन बने। हम लगातार इस ओर प्रयास कर रहे हैं।
-डॉ. अशोक, प्रवक्ता पीजीआई चंडीगढ़।