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सांस की नली में बादाम फंसने से रिवांश की मौत की जांच करेगा पीजीआई, होगी कड़ी कार्रवाई

Mon, 08 Apr 2019 02:18 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 08 Apr 2019 02:18 PM IST
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PGI Chandigarh Decision to do Complete Enquiry of Revansh Death Case
pgi chandigarh
सांस की नली में बादाम फंसने से 11 माह के बच्चे रिवांश की मौत के मामले में परिजनों ने पीजीआई डायरेक्टर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और पीएमओ ऑफिस को शिकायत भेजी है। परिजनों का कहना है कि इस पूरे मामले में पीजीआई के डाक्टरों की घोर लापरवाही रही है। डाक्टरों के पास पूरा वक्त था। वह कोशिश करते तो आज उनका बच्चा जीवित होता।
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उन्होंने यह भी कहा है कि उनके पास इस बात के पूरे सुबूत हैं कि डाक्टरों ने कैसे उनकी गुहार को नजरअंदाज किया और अपने बच्चे की मौत के जिम्मेदार डॉक्टरों को वह किसी भी हालत में नहीं छोड़ेंगे। उधर, इस मामले में पीजीआई डायरेक्टर प्रोफेसर जगतराम का कहना है कि उन्हें इस घटना की जानकारी मिल चुकी है। वह इस मामले की पब्लिक ग्रीवांस कमेटी से जांच करवाएंगे।
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यदि उसमें कोई दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि परिजनों ने अनुमति दे दी थी और उसके बावजूद इलाज नहीं किया गया तो यह गंभीर मामला है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
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बच्चे की मौत के मामले की जानकारी मिली है। यदि परिजनों नेे स्वीकृति दे दी थी और उसके बाद भी इलाज नहीं हुआ है तो यह गंभीर है। इसकी जांच करवाऊंगा। जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- प्रोफेसर जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई

 

बच्चे की सांस की नली में फंस गया था बादाम

सेक्टर-18 निवासी रोहित तायल के मुताबिक, उनके 11 महीने के बेटे ने बादाम गटक लिया था। वह बादाम उसके सांस की नली में फंस गया। वे पहले उसे पंचकूला के एक अस्पताल लेकर गए। वहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई में डॉक्टरों ने परिजनों से ब्रोंकोस्कोपी की अनुमति मांगी लेकिन यह कहकर डरा दिया कि इस दौरान बच्चे की मौत भी हो सकती है। इससे वह घबरा गए।

डॉक्टर चाहते तो इसे तरीके से बता सकते थे, लेकिन उनके व्यवहार में काफी तल्खी थी। उन्होंने बिल्कुल भी सोचने का वक्त नहीं दिया। हालांकि करीब एक घंटे बाद उन्होंने ब्रोंकोस्कोपी की अनुमति दे दी लेकिन डॉक्टर इलाज करने के लिए तैयार नहीं हुए। डॉक्टर इस बात पर अड़े रहे कि उन्होंने पहले उन्हें अनुमति क्यों नहीं दी। परिजनों का कहना है कि वे कई बार डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाए लेकिन डाक्टरों के व्यवहार में नरमी नहीं आई। बच्चा दो अप्रैल को शाम छह बजे पीजीआई पहुंच गया था और तीन अप्रैल को सुबह छह बजे तक उसे इलाज नहीं मिला।

जब बच्चे ने सांस लेना बंद कर दिया, तब डॉक्टर आए और इलाज की कोशिश की लेकिन तब तक बच्चा दम तोड़ चुका था। हालांकि पीजीआई का कहना है कि उनके इस बात के पुख्ता रिकार्ड है कि बच्चे के परिजनों ने ब्रोंकोस्कोपी की अनुमति नहीं दी थी। ओटी तो सुबह चार बजे तक चलती रही। यदि वे अनुमति देते तो हम बच्चे का आपरेशन जरूर करते। परिजनों के पास प्राइवेट हॉस्पिटल का एक सीटी स्कैन भी था, जिसमें लिखा था कि बच्चे के अंदर कोई फारेन बाडी (बादाम) नहीं है, इसलिए वह निश्चिंत थे। हमने कई बार पूछा, लेकिन वे तैयार नहीं हुए।
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