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कॉलोनी के विकास के लिए याचिका दायर
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 22 Nov 2013 01:37 AM IST
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश जारी किए हैं कि धनास मिल्क कॉलोनी के विकास और अन्य समस्याओं को लेकर दाखिल याचिका की जल्द रिप्रेजेंटेशन डिसाइड करें।
धनास निवासी जतिंद्र पाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर यह मामला उठाया है।
याचिका में 1986 के ले आउट प्लान के तहत मिल्क कॉलोनी की डेवलपमेंट के निर्देश जारी करने और नियमों के तहत जानवरों को न रखने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
वीरवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस एजी मसीह पर आधारित खंडपीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश जारी कर मामले का निपटारा कर दिया।
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दाखिल याचिका में कहा गया है कि 23 दिसंबर 1986 को धनास के विकास के लिए ले आउट प्लान तैयार किया गया था। लेकिन आज तक इस प्लान के तहत इलाके का विकास नहीं हो पाया।
जानवरों के कारण पूरे धनास में गंदगी का माहौल बना हुआ है। चंडीगढ़ प्रशासन ने 1998 में गाय पालकों के लिए गोबर रखने के स्थान निर्धारित किए थे।
इनका आकार 22.22 स्कवेयर यार्ड था। इसके बावजूद गाय पालक किसी भी स्थान पर गोबर डंप कर देते हैं। इससे रिहायशी इलाकों में गंदगी पसरी हुई है।
याचिका में कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन के सामने कई बार यह समस्याएं उठाई गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यहां तक इलाके को जो मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए, प्रशासन वह सुविधाएं भी मुहैया नहीं करवा रहा।
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धनास निवासी जतिंद्र पाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर यह मामला उठाया है।
याचिका में 1986 के ले आउट प्लान के तहत मिल्क कॉलोनी की डेवलपमेंट के निर्देश जारी करने और नियमों के तहत जानवरों को न रखने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी करने का आग्रह किया है।
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वीरवार को मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस संजय किशन कौल एवं जस्टिस एजी मसीह पर आधारित खंडपीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन को निर्देश जारी कर मामले का निपटारा कर दिया।
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दाखिल याचिका में कहा गया है कि 23 दिसंबर 1986 को धनास के विकास के लिए ले आउट प्लान तैयार किया गया था। लेकिन आज तक इस प्लान के तहत इलाके का विकास नहीं हो पाया।
जानवरों के कारण पूरे धनास में गंदगी का माहौल बना हुआ है। चंडीगढ़ प्रशासन ने 1998 में गाय पालकों के लिए गोबर रखने के स्थान निर्धारित किए थे।
इनका आकार 22.22 स्कवेयर यार्ड था। इसके बावजूद गाय पालक किसी भी स्थान पर गोबर डंप कर देते हैं। इससे रिहायशी इलाकों में गंदगी पसरी हुई है।
याचिका में कहा कि चंडीगढ़ प्रशासन के सामने कई बार यह समस्याएं उठाई गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई है। यहां तक इलाके को जो मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए, प्रशासन वह सुविधाएं भी मुहैया नहीं करवा रहा।