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बच्चों के हाथों में किताबों की जगह कटोरा क्यों, शिक्षा का अधिकार या भिक्षा का

Wed, 18 Jul 2018 09:47 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 18 Jul 2018 09:47 AM IST
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Petition filed in the High Court against children seeking child labor and begging in Chandigarh
फाइल फोटो
सिटी ब्यूटीफुल, स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल मॉर्डन शहर में बच्चों के हाथ में किताबों के स्थान पर कटोरा थमा दिया गया है। शिक्षा का अधिकार अब शहर में भिक्षा का अधिकार बन रहा है। ऐसे में बच्चों को उनका हक दिलाने के लिए एडवोकेट प्रद्युम्न गर्ग ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। स्थिति पर दुख और चिंता जताते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका पर यूटी प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब तलब कर लिया है।
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याचिका दाखिल करते हुए एडवोकेट प्रद्युम्न गर्ग ने कहा कि शिक्षा के अधिकार के तहत 14 वर्ष तक की आयु के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान है। सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि इन बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करवाई जाए। बच्चों को शिक्षा उपलब्ध करवाने के स्थान पर प्रशासन आंखें मूंदे बैठा है। याची ने कोर्ट को बताया कि शहर मे हर चौराहे और लाइट प्वाइंट पर बच्चे भीख मांगते नजर आते हैं। यह सब पुलिस की आंखों के सामने होता है।
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चंडीगढ़ में भीख मांगने के खिलाफ कानून मौजूद है और चाइल्ड लेबर रोकने के प्रावधान के बावजूद पुलिस और प्रशासन इस दिशा में कोई काम नहीं कर रहे। याची ने बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत काफी पैसा प्रशासन को जारी किया जाता है। लेकिन यह पैसा या तो इस्तेमाल ही नहीं किया जाता या फिर कागजी योजनाओं में लगा दिया जाता है।
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जागरूकता के नाम पर केवल विज्ञापनबाजी
इसके साथ ही याची ने चंडीगढ़ में बढ़ रही चाइल्ड लेबर का भी मुद्दा उठाया। याची ने कहा कि स्मार्ट शहर की दौड़ में शामिल इस शहर में बच्चों से काम करवाया जा रहा है। जागरूकता के नाम पर केवल विज्ञापन जारी कर प्रशासन अपनी जिम्मेदारी पूरी समझ लेता है। न तो कोई छापेमारी होती है और न ही कोई ठोस कार्रवाई। पुलिस की नाक तले बच्चे रेड लाइट पर वाहन सवारों से भीख मांगते हैं लेकिन पुलिस उनके पुनर्वास के लिए उचित कदम उठाने के स्थान पर आंखे मूंदे रहती है।

याची ने हाईकोर्ट से अपील की कि वह प्रशासन व केंद्र की को आदेश जारी करे कि बच्चों के लिए पुनर्वास की जो योजनाएं हैं उनको लागू करें। शिक्षा के अधिकार के तहत बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवाने के लिए प्रशासन कदम उठाए।


कोर्ट ने की याचिका की तारीफ
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने प्रशासन से पूछा कि यह एक गंभीर मामला है और चाइल्ड लेबर कमीशन व प्रशासन से अगली सुनवाई पर बताएं कि इस मामले में क्या कदम उठाए जा सकते हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका में उठाए गए मुद्दे की तारीफ करते हुए कहा कि जनहित याचिकाओं के माध्यम से ऐसे ही जनहित से जुड़े मुद्दे उठाए जाने चाहिए जिससे समाज के हित के लिए कदम उठाए जा सकें। 
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