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RSS पर बैन लगाने की मांग, हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका, जानिए मामला?

Sun, 25 Dec 2016 11:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली Updated Sun, 25 Dec 2016 11:20 AM IST
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petition filed in punjab haryana highcourt to ban rss and related organizations
rss - फोटो : File Photo
राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा बताते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में आरएसएस और इससे संबंधित संगठनों के खिलाफ याचिका दायर की गई है। हाईकोर्ट ने याचिका का अध्ययन करने के लिए सुनवाई को 17 जनवरी तक टाल दिया है।
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मामले में याचिका दाखिल करते हुए मोहाली के एडवोकेट हरबिंदर सिंह वैदवान ने कहा कि आरएसएस के एजेंडेा के चलते पंजाब में किसानों के साथ लूट हो रही है। आरएसएस को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित कर इसे और इससे संबंधित संगठनों को बैन किया जाना चाहिए।
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याची ने लिबराहन आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आयोग ने अयोध्या मामले में दी गई रिपोर्ट में गैर संवैधानिक करार दिया था। इस बात को केंद्र ने नहीं माना था।
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याची ने कहा कि पंजाब के कंसोलिडेशन एक्ट को संशोधित कर इसमें सेक्शन 42ए शामिल किया गया है, जो बिल्कुल गलत है। यह सीधे तौर पर आरएसएस की सोच का नतीजा है।

याची ने अपनी याचिका में ये सभी दलीलें दी

petition filed in punjab haryana highcourt to ban rss and related organizations
RSS - फोटो : Amar Ujala
याची ने कहा कि आरएसएस मनु स्मृति का अनुसरण करता है, जो वर्ण व्यवस्था का समर्थन करने वाली है। भारत के संविधान निर्माताओं ने इस व्यवस्था को देश हित के लिए खतरा मानते हुए इसे संविधान में शामिल करने से इनकार कर दिया था।

कंसोलिडेशन एक्ट में संशोधन के तहत जमीन को शामलात भूमि घोषित करने संबंधित परिवर्तन शिअद-भाजपा सरकार ने किए थे। इसके स्थान पर जमीन को गरीब परिवारों को दे दिया जाना चाहिए, जिससे समाज का पिछड़ा तबका अपने रहने खाने का इंतजाम कर सके।

इसके खिलाफ विचारधारा होना अपने आप में ही देश के लिए खतरा है। याची ने हाईकोर्ट के सामने दलील देते हुए कहा कि यदि इसे नहीं रोका गया तो जो यूपी और गुजरात में हुआ, वही पंजाब में भी दोहराया जाएगा।

सिखों और मुस्लिमों के साथ क्या होगा, यह बताने की जरूरत नहीं है क्योंकि आरएसएस हिंदू राष्ट्र की बात करता है। याची ने कहा कि किसी को अपने धर्म को प्रचारित करने का अधिकार है, लेकिन किसी और धर्म के मर्दन की भावना रखने को संविधान अनुमति नहीं देता है।
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