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नौकरी के लिए दो युवक हाईकोर्ट की शरण में आए, पंजाब बोर्ड कठघरे में खड़ा है
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 02 May 2017 04:38 PM IST
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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क्लर्क पद के लिए चुने गए दो युवाओं ने न्याय के लिए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले में पंजाब बोर्ड कठघरे में खड़ा है। युवाओं को पंजाब सबॉर्डिनेट सर्विसेज बोर्ड (पीएसएसबी) के सचिव की ओर से नई शर्तें लगाकर नियुक्ति नहीं दी गई थी। जस्टिस जयश्री ठाकुर ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सोमवार को पीएसएसबी के सचिव को 19 जुलाई के लिए नोटिस जारी किया है।
एडवोकेट डा. राव पीएस गिरवार के माध्यम से बठिंडा निवासी गुरप्रीत कौर और अन्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि दोनों याचिकाकर्ताओं ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से वर्ष 2002 में दसवीं और 2004 में जमा दो की परीक्षा पास की। इसके बाद सोलन (हिमाचल प्रदेश) स्थित मानव भारती यूनिवर्सिटी से 2012 में ग्रेजुएशन पूरी की है। पंजाब के मुख्य सचिव के माध्यम से पीएसएसबी द्वारा 2013 में क्लर्क के 1192 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया, इसके आधार पर दोनों याचिकाकर्ताओं ने भी अपने आवेदन दाखिल किए।
दोनों अभ्यर्थी पंजाबी टाइपिंग टेस्ट में पास भी हो गए, लेकिन पीएसएसबी के सचिव ने मानव भारती यूनिवर्सिटी और उसकी ग्रेजुएशन डिग्री पर सवाल उठाते हुए दोनों की नियुक्ति रोक दी और जांच के लिए मानव भारती यूनिवर्सिटी को पत्र लिखा। याचिका में आगे कहा गया है कि जब मानव भारती यूनिवर्सिटी की ओर से पीएसएसबी सचिव के पत्र का समुचित उत्तर दे दिया गया तो बोर्ड के सचिव की ओर कई अनावश्यक सवाल जैसे- दसवीं, बारहवीं और ग्रेजुएशन के अंकों में अंतर क्यों है?
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बीए के लिए एंट्रेंस टेस्ट कब लिया?, जून 2012 में बीए पास हुए विद्यार्थियों की सूची उनके अंकों के साथ भेजें, मानव भारती यूनिवर्सिटी से फिर से पूछे गए। याचिकाकर्ताओं ने पीएसएसबी सचिव के इस व्यवहार पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट से मांग की है कि उन्हें क्लर्क पद पर तुरंत नियुक्ति दी जाए।
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एडवोकेट डा. राव पीएस गिरवार के माध्यम से बठिंडा निवासी गुरप्रीत कौर और अन्य की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि दोनों याचिकाकर्ताओं ने पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड से वर्ष 2002 में दसवीं और 2004 में जमा दो की परीक्षा पास की। इसके बाद सोलन (हिमाचल प्रदेश) स्थित मानव भारती यूनिवर्सिटी से 2012 में ग्रेजुएशन पूरी की है। पंजाब के मुख्य सचिव के माध्यम से पीएसएसबी द्वारा 2013 में क्लर्क के 1192 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया, इसके आधार पर दोनों याचिकाकर्ताओं ने भी अपने आवेदन दाखिल किए।
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दोनों अभ्यर्थी पंजाबी टाइपिंग टेस्ट में पास भी हो गए, लेकिन पीएसएसबी के सचिव ने मानव भारती यूनिवर्सिटी और उसकी ग्रेजुएशन डिग्री पर सवाल उठाते हुए दोनों की नियुक्ति रोक दी और जांच के लिए मानव भारती यूनिवर्सिटी को पत्र लिखा। याचिका में आगे कहा गया है कि जब मानव भारती यूनिवर्सिटी की ओर से पीएसएसबी सचिव के पत्र का समुचित उत्तर दे दिया गया तो बोर्ड के सचिव की ओर कई अनावश्यक सवाल जैसे- दसवीं, बारहवीं और ग्रेजुएशन के अंकों में अंतर क्यों है?
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बीए के लिए एंट्रेंस टेस्ट कब लिया?, जून 2012 में बीए पास हुए विद्यार्थियों की सूची उनके अंकों के साथ भेजें, मानव भारती यूनिवर्सिटी से फिर से पूछे गए। याचिकाकर्ताओं ने पीएसएसबी सचिव के इस व्यवहार पर सवाल उठाते हुए हाईकोर्ट से मांग की है कि उन्हें क्लर्क पद पर तुरंत नियुक्ति दी जाए।