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कांस्टेबल भर्ती के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका, ये रही चुनौती देने की वजह
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 05 Nov 2016 02:32 PM IST
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पंजाब पुलिस भर्ती प्रक्रिया में पहली बार प्रतिभागियों का डोप टेस्ट
- फोटो : अमर उजाला
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कांस्टेबल भर्ती की प्रक्रिया को चुनौती देते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इसके पीछे बड़ी वजह सामने आई है। याचिका पर शुक्रवार को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने प्रदेश के डीजीपी को 6 दिसंबर के लिए नोटिस जारी किया है।
जस्टिस जसवंत सिंह की अदालत में याचिकाकर्ता पटियाला के रोहित कुमार और परविंदर सिंह की ओर से उपस्थित एडवोकेट राव पीएस गिरवर ने हाईकोर्ट को बताया कि कांस्टेबलों की नियुक्ति प्रक्रिया में पंजाब सरकार की ओर से जारी विज्ञापन में क्लॉज-9 के जरिये शैक्षणिक योग्यता के अंकों का लाभ देने के लिए इन अंकों को 10-10 के स्लैब में बांट दिया गया है।
12वीं में 40-50 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के लिए 11 अंक देने का प्रावधान किया गया। इस तरह 50-60, 60-70, 70-80 और 80 प्रतिशत से अधिक अंकों के स्लैब बना दिए गए हैं।
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जस्टिस जसवंत सिंह की अदालत में याचिकाकर्ता पटियाला के रोहित कुमार और परविंदर सिंह की ओर से उपस्थित एडवोकेट राव पीएस गिरवर ने हाईकोर्ट को बताया कि कांस्टेबलों की नियुक्ति प्रक्रिया में पंजाब सरकार की ओर से जारी विज्ञापन में क्लॉज-9 के जरिये शैक्षणिक योग्यता के अंकों का लाभ देने के लिए इन अंकों को 10-10 के स्लैब में बांट दिया गया है।
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12वीं में 40-50 प्रतिशत अंक हासिल करने वाले उम्मीदवारों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के लिए 11 अंक देने का प्रावधान किया गया। इस तरह 50-60, 60-70, 70-80 और 80 प्रतिशत से अधिक अंकों के स्लैब बना दिए गए हैं।
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याचिका में ये दलील दी गई
पंजाब पुलिस भर्ती प्रक्रिया में पहली बार प्रतिभागियों का डोप टेस्ट
- फोटो : अमर उजाला
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस क्लाज के कारण एक स्लैब के दायरे में आने वाले सभी आवेदकों को एक समान लाभ मिलेगा। यानी 60 प्रतिशत अंक पाने वाले को 69 प्रतिशत अंक पाने वाले आवेदक के बराबर ही अंक दिए जाएंगे। इस तरह अधिक अंक वाले उम्मीदवारों को नुकसान होना तय है।
याचिका में आगे कहा गया कि इस भर्ती में अधिक उम्र वाले उम्मीदवारों को भी तरजीह दी जा रही है, जिससे एक ही स्लैब में अधिक उम्र वाले उम्मीदवार शैक्षणिक अंक का लाभ उठाककर कम उम्र वाले आवेदकों से आगे निकल जाएंगे।
याचिका में कहा गया है कि इस स्लैब प्रणाली के स्थान पर अंक प्रतिशतता के आधार पर मेरिट लिस्ट बनाने की मांग करते हुए उन्होंने पुलिस विभाग के समक्ष रिप्रेजेंटेशन भी दी और लीगल नोटिस भी भेजा, लेकिन इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की है कि पुलिस कांस्टेबल भरती प्रक्रिया में शामिल किए गए उक्त क्लाज-9 को रद किया जाए।
याचिका में आगे कहा गया कि इस भर्ती में अधिक उम्र वाले उम्मीदवारों को भी तरजीह दी जा रही है, जिससे एक ही स्लैब में अधिक उम्र वाले उम्मीदवार शैक्षणिक अंक का लाभ उठाककर कम उम्र वाले आवेदकों से आगे निकल जाएंगे।
याचिका में कहा गया है कि इस स्लैब प्रणाली के स्थान पर अंक प्रतिशतता के आधार पर मेरिट लिस्ट बनाने की मांग करते हुए उन्होंने पुलिस विभाग के समक्ष रिप्रेजेंटेशन भी दी और लीगल नोटिस भी भेजा, लेकिन इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से मांग की है कि पुलिस कांस्टेबल भरती प्रक्रिया में शामिल किए गए उक्त क्लाज-9 को रद किया जाए।