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पंजाब के ‘फीस एक्ट’ को हाईकोर्ट में चुनौती, जानिए किसने और आखिर क्यों दी गई

Thu, 25 May 2017 03:29 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 25 May 2017 03:29 PM IST
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petition file in punjab haryana highcourt against punjab govt school fees act
हाईकोर्ट
बड़ी सटीक सी दलील देते हुए पंजाब रेगुलेशन ऑफ फीस ऑफ अनएडेड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस एक्ट-2016 को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इंडेपेंडेंट स्कूल ऐसोसिएशन ने इसे स्कूलों के विकास में बाधक करार देते हुए इस पर रोक लगाने की अपील की है। याचिका में कहा गया कि पंचकूला, चंडीगढ़ व मोहाली में उनके 72 स्कूल हैं। ऐसोसिएशन से जुड़े स्कूल सरकार से किसी भी तरह की वित्तीय सहायता नही लेते और बच्चों को बेहतर शिक्षा देने का काम कर रहे हैं।
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आय का एकमात्र साधन फीस है और ऐसे में केवल 8 प्रतिशत फीस वृद्घि का बंधन स्कूल प्रबंधन के लिए मुसीबत खड़ी करने वाला है। याचिकाकर्ता इंडेपेंडेंट स्कूल ऐसोसिएशन के वकील ने कोर्ट को बताया कि पंजाब सरकार का यह एक्ट वास्तविकता से परे व राजनीतिक लाभ के लिए ज्यादा हैं। पंजाब सरकार ने इस बिल से सरकारी सहायता न लेने वाले स्कूलों के विकास में रोड़ा अटका दिया हैं।
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इस बिल के तहत सरकारी सहायता न प्राप्त करने वाले स्कूलों को केवल सालाना 8 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी करने की छूट दी है, जो इन स्कूलों को बंद करने के लिए मजबूर कर देगा। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि इस बिल के कारण स्कूल न तो अपने स्टाफ का वेतन बढ़ा पाएंगे और न ही स्कूल समय के साथ अपग्रेड़ कर पाएगा, इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ेगा। इतना ही नहीं, पंजाब सरकार का यह बिल सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के कई फैसलों के खिलाफ है।
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इन फैसले में स्पष्ट है कि जो स्कूल सरकार से किसी भी तरह की सहायता नहीं लेते उनकी फीस तय करने का सरकार को कोई हक नही हैं। याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की कि वो पंजाब सरकार के इस  बिल पर रोक लगाने का आदेश दे। हाईकोर्ट ने कहा कि वह बगैर पक्ष सुने इस बिल पर रोक नहीं लगा सकता। इस मामले में याचिकाकर्ता  ने पंजाब सरकार समेत सीबीएसई व अन्य को प्रतिवादी बनाया। हाईकोर्ट ने सभी प्रतिवादी को 25 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब देने का आदेश दिया है।
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