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Chandigarh: मेयर सरबजीत कौर के निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका रद्द, आप पार्षद पहुंचीं थीं हाईकोर्ट

Thu, 01 Dec 2022 10:11 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 01 Dec 2022 10:11 AM IST
सार

याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन ने सवाल उठाते हुए कहा था कि यह याचिका वैध नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अनिल मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने जो मांगपत्र दी है वह वास्तविक नहीं है।

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Petition challenging election of Chandigarh Municipal Corporation Mayor cancelled by Punjab Haryana High Court
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

विस्तार

चंडीगढ़ नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर पद के लिए आठ जनवरी को हुए निर्वाचन को चुनौती देने वाली याचिका को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वोटर की पहचान बताने वाला वोट रद्द होना चाहिए।

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मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पद के लिए हुए चुनाव के खिलाफ आम आदमी पार्टी की पार्षद अंजू कत्याल सहित अन्य दो लोगों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। अदालत को बताया गया था कि चंडीगढ़ नगर निगम के 35 वार्डों के लिए 24 दिसंबर को चुनाव हुए थे और आम आदमी पार्टी सबसे बड़े दल के तौर पर सामने आई थी। आप को 14, भाजपा को 12 और कांग्रेस को 8 सीटें मिली थीं। बाद में कांग्रेस की एक पार्षद भाजपा में शामिल हो गईं थीं। सांसद का एक वोट भाजपा के खाते में पहले से ही थी। इस तरह दोनों दलों के पास 14-14 वोट हो गए थे। इसके बाद मेयर पद के लिए 8 जनवरी को चुनाव कराए गए। 
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मतदान प्रक्रिया के बाद चुनाव अधिकारी ने आम आदमी पार्टी (आप) के एक वोट को अवैध करार देकर रद्द कर दिया और इस तरह भाजपा की उम्मीदवार सरबजीत कौर को मेयर पद पर विजयी घोषित कर दिया गया। इसी चुनाव को आप के उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए इसे रद्द कर नए सिरे से इन पदों पर चुनाव करवाने की मांग की थी। 
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याचिका पर सवाल उठाते हुए प्रशासन ने की थी रद्द करने की मांग  
याचिका पर चंडीगढ़ प्रशासन ने सवाल उठाते हुए कहा था कि यह याचिका वैध नहीं है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। चंडीगढ़ के सीनियर स्टैंडिंग काउंसिल अनिल मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने जो मांगपत्र दी है वह वास्तविक नहीं है। पहले दिया गया मांगपत्र सिर्फ अंजू कत्याल का था, जबकि याचिका में दिया गया मांगपत्र तीनों प्रत्याशियों का है। साथ ही जो मांगपत्र दिया गया था उसमें फटे हुए मतपत्रों को लेकर आपत्ति थी लेकिन याचिका में इसका जिक्र ही नहीं है। याचिका में मार्क किए मतपत्रों के बारे में कहा गया है। याचिकाकर्ताओं ने तब जो आपत्तियां दर्ज की थीं, उनका निपटारा कर दिया गया था। ऐसे में निपटारा किए जाने के आदेश को ही कैसे चुनौती दी जा सकती थी। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 31 अक्तूबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। हाईकोर्ट ने याचिका पर विस्तृत आदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया कि यदि किसी वोट पर निशान लगा हो या इसे पहचान बताते हुए निशान लगाकर दिया गया हो तो इसे खारिज किया जा सकता है।

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