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Chandigarh: मनीषा गुलाटी को झटका, पंजाब महिला आयोग के चेयरमैन पद से हटाने के खिलाफ दायर याचिका खारिज
Tue, 28 Mar 2023 10:48 AM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 28 Mar 2023 10:48 AM IST
सार
मनीषा गुलाटी ने कोर्ट में कहा था कि पंजाब सरकार ने 31 जनवरी को यह कहते हुए उनकी एक्सटेंशन के आदेश रद्द कर दिया था कि एक्ट का उल्लंघन कर उन्हें एक्सटेंशन दी गई थी। जिस अथॉरिटी और एक्ट के तहत उन्हें नियुक्ति दी गई है, उसी के तहत उन्हें एक्सटेंशन भी दी जा सकती है।
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मनीषा गुलाटी।
- फोटो : फाइल
विस्तार
पंजाब राज्य महिला आयोग की चेयरपर्सन पद से हटाने को चुनौती देने वालीं मनीषा गुलाटी की याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। सभी पक्षों को सुनने के बाद मंगलवार को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।
यह भी पढ़ें: देश में पहली बार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने किया ChatGPT का इस्तेमाल, आरोपी की जमानत की खारिज
पंजाब सरकार ने मनीषा गुलाटी को दूसरी बाद पद से हटाया था। पहली बार भी वे हाईकोर्ट पहुंची थी, जिसके बाद सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया था। अब दोबारा पद से हटाने का कारण स्पष्ट न होने और तकनीकी कारणों को आधार बनाते हुए आदेश को रद्द करने की हाईकोर्ट से मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
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मनीषा गुलाटी ने सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि उनकी नियुक्ति तय प्रक्रिया के तहत तीन वर्ष के लिए 13 मार्च 2018 को की गई थी। उन्हें 18 सितंबर 2020 से 19 मार्च 2021 तक और फिर बाद में 18 मार्च 2024 तक एक्सटेंशन दे दी गई थी। उन्हें यह एक्सटेंशन भी तय प्रक्रिया के तहत दी गई थी।
याची ने बताया कि पंजाब सरकार ने 31 जनवरी को यह कहते हुए उनकी एक्सटेंशन के आदेश रद्द कर दिया था कि एक्ट का उल्लंघन कर उन्हें एक्सटेंशन दी गई थी। गुलाटी ने याचिका में कहा था है कि जिस अथॉरिटी और एक्ट के तहत उन्हें नियुक्ति दी गई है, उसी के तहत उन्हें एक्सटेंशन भी दी जा सकती है। ऐसे में उनकी एक्सटेंशन रद्द करने का आदेश गलत है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।
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पंजाब सरकार ने मनीषा गुलाटी को दूसरी बाद पद से हटाया था। पहली बार भी वे हाईकोर्ट पहुंची थी, जिसके बाद सरकार ने अपना फैसला वापस ले लिया था। अब दोबारा पद से हटाने का कारण स्पष्ट न होने और तकनीकी कारणों को आधार बनाते हुए आदेश को रद्द करने की हाईकोर्ट से मांग की गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया।
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मनीषा गुलाटी ने सीनियर एडवोकेट चेतन मित्तल के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट को बताया कि उनकी नियुक्ति तय प्रक्रिया के तहत तीन वर्ष के लिए 13 मार्च 2018 को की गई थी। उन्हें 18 सितंबर 2020 से 19 मार्च 2021 तक और फिर बाद में 18 मार्च 2024 तक एक्सटेंशन दे दी गई थी। उन्हें यह एक्सटेंशन भी तय प्रक्रिया के तहत दी गई थी।
याची ने बताया कि पंजाब सरकार ने 31 जनवरी को यह कहते हुए उनकी एक्सटेंशन के आदेश रद्द कर दिया था कि एक्ट का उल्लंघन कर उन्हें एक्सटेंशन दी गई थी। गुलाटी ने याचिका में कहा था है कि जिस अथॉरिटी और एक्ट के तहत उन्हें नियुक्ति दी गई है, उसी के तहत उन्हें एक्सटेंशन भी दी जा सकती है। ऐसे में उनकी एक्सटेंशन रद्द करने का आदेश गलत है और इसे रद्द किया जाना चाहिए।