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2600 वर्ष पुराने सिक्के और 250 मिलियन वर्ष पुराने फॉसिल्स देख लोग हुए अचंभित

Mon, 21 Feb 2022 02:23 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Mon, 21 Feb 2022 02:23 AM IST
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People were surprised to see 2600 year old coins and 250 million year old fossils
चंडीगढ़। पंजाब के अहमदगढ़ के रहने वाले परमिंदर सिंह ने टैगोर थिएटर में प्रदर्शनी लगाई है। प्रदर्शनी में 2600 वर्ष पहले का सिक्के के अलावा डायनासोर के समय के यानी करीब 250 मिलियन वर्ष पहले के फॉसिल भी रखा गया है। प्रथम विश्वयुद्ध के समय का एक इंच का कुरान सबको आकर्षित कर रहा है। इसे चांदी के डब्बे में रखा जाता है। यह प्रदर्शनी सिख लेंस की ओर से सिख आर्ट एवं फिल्म फेस्टिवल के तहत लगाई गई है।
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परमिंदर सिंह ने बताया कि उनके दादा श्याम सिंह के दिए पुराने समय के सिक्कों ने उन्हें प्रेरणा दी। इसके बाद उन्होंने सिक्कों का संग्रह करना शुरू कर दिया। पिछले 30 वर्षों में उन्होंने पुुराने सिक्के, ग्रंथ और फॉसिल का संग्रह किया है। उनकी प्रदर्शनी को आए हुए लोगों ने काफी गौर से देखा।
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प्रदर्शनी में 16वीं शताब्दी में हाथों से लिखा गया योग साधना ग्रंथ के अलावा सनातन धर्म, सिख और मुस्लिम धर्म ग्रंथ भी प्रदर्शन में शामिल किया गया। समुद्री जीवों के फॉसिल में लकड़ी, क्रिस्टल, सीपी, घोंघे शामिल हैं। बड़ी संख्या में सिक्कों का संग्रह है। इसमें सिख एंपायर और रियासतों के सिक्के हैं। एक पैसा से लेकर एक रुपये का सिक्का तांबा और सिल्वर के हैं। सिक्कों पर फारसी में लिखे हैं। उनके पास अब तक 18 हजार सिक्कों का संग्रह है।
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प्रदर्शनी में भागवत गीता भी है। इस ग्रंथ में हाथ से बनाई पेंटिंग है। इन पेंटिंग में सोने की पेंटिंग है। परमिंदर सिंह ने बताया कि यह गीता जम्मू के महाराजा गुलाब सिंह ने अपने लेखक केसर सिंह से लिखवाया था। उन्होंने बताया कि नौ सौ साल पुुराना पत्तों पर लिखा रामायण भी है। तार (पाम) के 150 पत्तों पर लिखी गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1920 से लेकर सभी माचिस के 14 हजार डब्बे का भी संग्रह है।
पेशे से कारपेंटर परमिंदर सिंह का कहना है कि अपनी जिंदगी की कमाई इस संग्रह में लगा दिया। उन्होंने कहा कि उनका मकसद इतिहास को एकत्र कर नई पीढ़ी को दिखाना है, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों को पहचान सके। उन्होंने बताया कि उनका बेटा हरबक्श सिंह भी साथ देता है। अभी वह पढ़ाई कर रहा है। इस संग्रह को रखने के लिए अपने घर के दो कमरे रखे हैं। उनकी यह 193वीं प्रदर्शनी है। चंडीगढ़ में पहली बार प्रदर्शनी लगाई गई है। उन्होंने पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी प्रदर्शनी लगाई है।
खास आकर्षण
प्रदर्शनी में भगवत गीता ने सबका ध्यान आकर्षित किया। इस ग्रंथ में हाथ से बनाई पेंटिंग है। इन पेंटिंग में सोने की पेंटिंग है। इस भगवत गीता को जम्मू के महाराजा गुलाब सिंह ने अपने लेखक केसर सिंह से लिखवाया था।

हथियारों की भी प्रदर्शनी
हथियारों की भी प्रदर्शनी लगाई है। इसमें तीर, तलवार, खंजर, कटार, बिसुए, छुरे, नेजे की अलग अलग किस्मों की प्रदर्शनी लगाई है।
धार्मिक पुस्तकों की प्रदर्शनी
सिख साहित्य की प्रदर्शनी भी लगाई गई। यहां पर हिंदी, पंजाबी और अंग्रेजी में है। सेक्टर- 34 के गुरुद्वारा साहिब से मोहन सिंह पुस्तक प्रदर्शनी लेकर आए थे। यहां पर लोगों ने पुस्तकों को देखा। कई लोगों ने पुस्तकों की फोटो भी खींचकर ले गए ताकि सेक्टर- 34 के गुरुद्वारा साहिब जाकर खरीद सकें।
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