पंजाब : वेटिंग में मुक्तसर का श्मशान, टूटा दिन ढलने के बाद शव न जलाने का विधान
कोरोना मरीजों की मृत्यु दर बढ़ने से सूर्यास्त के बाद भी मृतकों का अंतिम संस्कार हो रहा है। बता दें कि हिंदू धर्म में दिन ढलने के बाद संस्कार नहीं करने का विधान है। मगर कोरोना मृतकों के शव को रख नहीं सकते, क्योंकि उससे इन्फेक्शन फैलने का डर रहता है। जिसके चलते शाम व रात के बाद भी संस्कार हो रहे हैं।
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पंजाब के मुक्तसर जिले में जलालाबाद रोड स्थित शिव धाम (श्मशान घाट) में कोरोना मृतकों के अंतिम संस्कार के लिए अब वेटिंग शुरू हो गई है। कोरोना मृत्यु दर में इजाफा और इसी श्मशान घाट में इलेक्ट्रॉनिक्स भट्ठी होने की वजह से यहां अधिक शव पहुंच रहे हैं।
हालांकि बताया जाता है कि गांव दोदा में एक इलेक्ट्रॉनिक्स भट्ठी है, मगर वह खराब है। कोरोना मरीजों की मृत्यु दर बढ़ने से सूर्यास्त के बाद भी मृतकों का अंतिम संस्कार हो रहा है। बता दें कि हिंदू धर्म में दिन ढलने के बाद संस्कार नहीं करने का विधान है। मगर कोरोना मृतकों के शव को रख नहीं सकते, क्योंकि उससे इन्फेक्शन फैलने का डर रहता है। जिसके चलते शाम व रात के बाद भी संस्कार हो रहे हैं।
गौरतलब है कि मुक्तसर में अब तक कुल 193 कोरोना मरीजों की मौत हो चुकी है। जिले में पिछले कई दिनों से चार से पांच मौतें हो रही हैं। मगर दिक्कत ये है कि एक ही इलेक्ट्रॉनिक भट्ठी होने के कारण जलालाबाद रोड स्थित शिव धाम में कोरोना मृतकों के शवों को संस्कार के लिए लाया जा रहा है। जिससे दो से तीन घंटे की वेटिंग चल रही है। तब तक शवों को फ्रिजर में रखना पड़ता है।
जलालाबाद रोड स्थित शिव धाम कमेटी के प्रबंधक कृष्ण कुमार शम्मी तेरिया ने बताया कि कोरोना मृतकों का संस्कार इलेक्ट्रॉनिक्स भट्टी में किया जाता है। कुछ दिनों से कोरोना से मौतों का सिलसिला तेज हो गया है। जिससे संस्कार के लिए आम दिनों से ज्यादा शव लाए जा रहे हैं। मगर एक ही भट्ठी होने से अब जहां रात को संस्कार करने पड़ रहे हैं।
वहीं खुले में भी अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। हालांकि उनकी कोशिश रहती है कि कोरोना मृतकों के शवों का संस्कार इलेक्ट्रॉनिक्स भट्ठी में हो, मगर इसमें ढाई से तीन घंटे का समय लगने के कारण वेटिंग चल रही है। पूरे जिले में एक ही इलेक्ट्रॉनिक्स भट्ठी होने के कारण संस्कार के लिए शव मुक्तसर-जलालाबाद रोड शिव धाम में आ रहे हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स भट्ठी में संस्कार के बाद लगभग तीन-चार घंटे में मृतक की अस्थियां उठाई जा सकती हैं। जिसके बाद ही दोबारा वहां संस्कार हो सकता है। इलेक्ट्रॉनिक्स भट्ठी में मृतक देह से उठने वाला धुआं बाहर अन्य लोगों को अपने प्रभाव में नहीं ले पाता। ऐसे में कोरोना मृतकों के ज्यादा शव आने से अब दो से तीन घंटे का इंतजार करना पड़ रहा है। बुधवार को भी इस शिव धाम में सात मृतकों के संस्कार हुए हैं। जिनमें पांच कोरोना मृतक थे। इनमें से दो के संस्कार तो रात ग्यारह बजे के आसपास हुए।
कपड़ों व अन्य सामान को लेकर लापरवाही दिखा रहे लोग
शिव धाम में कोरोना मृतकों के परिजनों की लापरवाही भी सामने आ रही है, क्योंकि लोग अपने परिजनों की अंतिम शैय्या के कपड़ों व सामान को सैनिटाइज करके अग्निभेंट करने के स्थान पर शिव धाम में ही यहां-वहां फेंक कर जा रहे हैं। उनकी यह लापरवाही संक्रमण को बढ़ावा दे सकती है। लोगों की इस लापरवाही से शिव धाम कमेटी के सदस्य भी चिंतित हैं। शम्मी तेरिया ने कोरोना मृतकों के परिजनों से उनके सामान को सैनिटाइज करने के बाद आग में नष्ट करने की अपील की है, ताकि कपड़ों के संपर्क में आने से किसी को इंफेक्शन न हो।