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12 घंटे लोगों ने खुद को घरों में रखा कैद, वजह चौंकानें वाली
अमर उजाला ब्यूरो, डेराबस्सी
Updated Wed, 03 Aug 2016 09:46 PM IST
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मकंदपुर वासी
- फोटो : file photo
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आधुनिकता के इस दौर में जब इंसान चांद पर पहुंच गया है। वहीं डेराबस्सी के एक गांव मकंदपुर में अंधविश्वास का एक गंभीर मामला देखने का सामने आया है। जहां एक बावा के कहने पर गांव सभी परिवारों ने खुद को बीती रात 12 घंटे तक गांव की सीमा में कैद करके रखा।
न कोई चूल्हा जला, न कोई गांव छोड़कर बाहर गया। मकंदपुर गांव गूज्जर बिरादरी बहुल गांव है जहां अधिकतर परिवार मवेशियों के दूध के कारोबार पर आश्रित हैं। यहां बीते दो माह से करीब एक दर्जन भैंसें अज्ञात बीमारी का शिकार दम तोड़ गईं और सिलसिला थम नहीं रहा था। ब्लॉक समिति सदस्य जसमेर सिंह ने बताया कि कुछ लोग पास ही एक ऐतिहासिक तीर्थ के बाबा के पास छुटकारा पाने के लिए पहुंचे। बाबा के अनुयायियों ने बताया कि गांव पर बुरे साए का प्रकोप है जिससे बचने के लिए पूरे गांवों को मिलकर उपाय करना होगा। मंगलवार की रात उपायों के लिए तय की गई।
पूरे गांव में संदेश पहुंचा दिया गया कि सात बजे के बाद कोई चूल्हा न जलाए। जो लोग गांव में हैं, वे गांव छोड़कर न जाएं। जो सात बजे घर से बाहर हों, वे गांव पहुंचने की बजाय बाहर ही अपने ठहरने का इंतजाम करें। उपाय यकीनी बनाने की गरज से कुछ ग्रामीणों ने रातभर पहरा दिया जबकि बच्चों व महिलाओं समेत परिवार गांव के खेड़े पर पूजा अर्चना करते रहे। दस क्वींटल दूध के साथ सुबह खीर का प्रसाद बांटने के बाद लोगों ने खुद को बंधनमुक्त किया।
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इन दकियानूसी उपायों को हवा देने वालों की वजह से गांव मकंदुपुर के सभी लोगों को फजीहत का सामना करन पड़ रहा है। गांव के पढ़े लिखे व नए जमाने के लोग दबी जुबान से ऐसे उपायों की निंदा करते नजर आए। गांव में ज्यादातर बच्चे स्कूल नहीं जा सके और काम से लौटे नौकरीपेश लोग घर नहीं पहुंच सके। लिंक सड़क से गुजरने वालों के साथ बदस्लूकी के कारण अन्य गांवों के लोग भी मकंदपुर वासियों को कोसते नजर आए।
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न कोई चूल्हा जला, न कोई गांव छोड़कर बाहर गया। मकंदपुर गांव गूज्जर बिरादरी बहुल गांव है जहां अधिकतर परिवार मवेशियों के दूध के कारोबार पर आश्रित हैं। यहां बीते दो माह से करीब एक दर्जन भैंसें अज्ञात बीमारी का शिकार दम तोड़ गईं और सिलसिला थम नहीं रहा था। ब्लॉक समिति सदस्य जसमेर सिंह ने बताया कि कुछ लोग पास ही एक ऐतिहासिक तीर्थ के बाबा के पास छुटकारा पाने के लिए पहुंचे। बाबा के अनुयायियों ने बताया कि गांव पर बुरे साए का प्रकोप है जिससे बचने के लिए पूरे गांवों को मिलकर उपाय करना होगा। मंगलवार की रात उपायों के लिए तय की गई।
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पूरे गांव में संदेश पहुंचा दिया गया कि सात बजे के बाद कोई चूल्हा न जलाए। जो लोग गांव में हैं, वे गांव छोड़कर न जाएं। जो सात बजे घर से बाहर हों, वे गांव पहुंचने की बजाय बाहर ही अपने ठहरने का इंतजाम करें। उपाय यकीनी बनाने की गरज से कुछ ग्रामीणों ने रातभर पहरा दिया जबकि बच्चों व महिलाओं समेत परिवार गांव के खेड़े पर पूजा अर्चना करते रहे। दस क्वींटल दूध के साथ सुबह खीर का प्रसाद बांटने के बाद लोगों ने खुद को बंधनमुक्त किया।
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इन दकियानूसी उपायों को हवा देने वालों की वजह से गांव मकंदुपुर के सभी लोगों को फजीहत का सामना करन पड़ रहा है। गांव के पढ़े लिखे व नए जमाने के लोग दबी जुबान से ऐसे उपायों की निंदा करते नजर आए। गांव में ज्यादातर बच्चे स्कूल नहीं जा सके और काम से लौटे नौकरीपेश लोग घर नहीं पहुंच सके। लिंक सड़क से गुजरने वालों के साथ बदस्लूकी के कारण अन्य गांवों के लोग भी मकंदपुर वासियों को कोसते नजर आए।