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Chandigarh News: पानी नहीं, 'जहर' पी रहे 17 जिलों के लोग
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-50 गुना ज्यादा मिली हरियाणा के पीने के पानी में आर्सेनिक व फ्लोराइड की मात्रा
चंडीगढ़। हरियाणा के 17 जिलों के लोग 'जहरीले पानी'का सेवन कर रहे हैं। हाल ही में संसद में पेश केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक 17 जिलों के पानी में आर्सेनिक व फ्लोराइड की मात्रा तय सीमा से ज्यादा मिली है। बोर्ड को आर्सेनिक की मात्रा प्रति लीटर .0़5 से .50 मिलीग्राम मिली। जबकि फ्लोराइड की पांच मिलीग्राम तक। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, आर्सेनिक की मात्रा प्रति लीटर .01 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस रिपोर्ट के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने स्वत: संज्ञान लेते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर इसकी रोकथाम व बचाव के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी।
-पिछले दिनों हरियाणा विधानसभा में पेश हुई कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते पांच साल में जलजनित बीमारियों के करीब 3 हजार मामले सामने आए। 14 लोगों की मौत भी हुई।
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यहां चिंताजनक स्थिति
भिवानी, अंबाला, फरीदाबाद, फतेहाबाद, झज्जर, जींद, करनाल, पानीपत, रोहतक, सिरसा, सोनीपत, यमुनानगर, पलवल, महेंद्रगढ़, पंचकूला, रेवाड़ी और कैथल के पानी में आर्सेनिक व फ्लोराइड की मात्रा तय सीमा से ज्यादा मिली है।
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कारण
पीजीआई चंडीगढ़ के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर रविंद्रा खैवाल ने बताया कि जहां भूमिगत पानी का दोहन अत्यधिक मात्रा में होता है, वहां भूमि से आर्सेनिक व फ्लोराइड रिसाव की संभावना बढ़ जाती है। खेतों में अंधाधुंध कीटनाशक व फर्टिलाइजर के इस्तेमाल से भी अर्सेनिक सतही जल में घुलता है।
असर
पीजीआई चंडीगढ़ के न्यूरो साइंस के प्रोफेसर अक्षय आनंद का कहना है कि आर्सेनिकयुक्त पानी लगातार पीने से शुरुआत में लोगों के नाखून काले पड़ते हैं। इससे कैंसर व अल्जाइमर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। हमारे शरीर को फ्लोराइड की जरूरत भी है, मगर तय सीमा से ज्यादा फ्लोराइड के शरीर में जाने से यह हड्डियों को कमजोर करने लगता है।
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84 प्रतिशत गांवों में तेजी से गिर रहा भूजल स्तर
कुल गांव : 7287
रेड जोन में : 1948
रेड जोन की ओर बढ़ रहे : 6150 गांव
ग्रीन जोन में 1304
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खंडों में स्थिति
कुल खंड : 141
सुरक्षित : 30
क्रिटिकल : 12
सेमी-क्रिटिकल : 14
अति-शोषित : 85
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14 लाख करोड़ लीटर कम मिल रहा पानी
मांग : 34,96,276 करोड़ लीटर
उपलब्धता : 20,93,598 करोड़ लीटर
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सरकार ने ये उठाए कदम
- 11.85 लाख नल कनेक्शन दिए गांवों में
- 17 नए जलघर स्थापित
- 404 नए नलकूप व 75 बूस्टिंग स्टेशन लगे
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भविष्य की योजना
-फसल विविधीकरण : 3.14 लाख एकड़ क्षेत्र कवर कर 1.05 लाख करोड़ लीटर पानी बचेगा।
-धान की सीधी बिजाई : 4.75 लाख एकड़ में 0.51 लाख करोड़ लीटर की बचत।
-संरक्षण जुताई : 27.53 लाख एकड़ से 1.18 लाख करोड़ लीटर बचत।
-उच्च किस्मों का प्रयोग : 3.49 लाख एकड़ से 0.47 लाख करोड़ लीटर।
-हरी खाद का उपयोग : 9.73 लाख एकड़ से 0.35 लाख करोड़ लीटर।
-प्राकृतिक खेती : 0.43 लाख एकड़ से 0.27 लाख करोड़ लीटर की बचत।
कोटआर्सेनिक व फ्लोराइड पानी की समस्या से निपटने के लिए कई रणनीतियों पर काम किया जा रहा है। भूमिगत जल दोहन रोकने के लिए हमने अगले दो साल की विशेष कार्ययोजना तैयार की। जन स्वास्थ्य विभाग भी समय-समय पर सैंपल लेकर लोगों को शुद्ध पानी देने की दिशा में काम कर रहा है।
- केशनी आनंद अरोड़ा, अध्यक्ष, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण
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रिपोर्ट : अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। हरियाणा के 17 जिलों के लोग 'जहरीले पानी'का सेवन कर रहे हैं। हाल ही में संसद में पेश केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक 17 जिलों के पानी में आर्सेनिक व फ्लोराइड की मात्रा तय सीमा से ज्यादा मिली है। बोर्ड को आर्सेनिक की मात्रा प्रति लीटर .0़5 से .50 मिलीग्राम मिली। जबकि फ्लोराइड की पांच मिलीग्राम तक। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, आर्सेनिक की मात्रा प्रति लीटर .01 मिलीग्राम से अधिक नहीं होनी चाहिए। इस रिपोर्ट के बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने स्वत: संज्ञान लेते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर इसकी रोकथाम व बचाव के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी।
-पिछले दिनों हरियाणा विधानसभा में पेश हुई कैग की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते पांच साल में जलजनित बीमारियों के करीब 3 हजार मामले सामने आए। 14 लोगों की मौत भी हुई।
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भिवानी, अंबाला, फरीदाबाद, फतेहाबाद, झज्जर, जींद, करनाल, पानीपत, रोहतक, सिरसा, सोनीपत, यमुनानगर, पलवल, महेंद्रगढ़, पंचकूला, रेवाड़ी और कैथल के पानी में आर्सेनिक व फ्लोराइड की मात्रा तय सीमा से ज्यादा मिली है।
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पीजीआई चंडीगढ़ के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर रविंद्रा खैवाल ने बताया कि जहां भूमिगत पानी का दोहन अत्यधिक मात्रा में होता है, वहां भूमि से आर्सेनिक व फ्लोराइड रिसाव की संभावना बढ़ जाती है। खेतों में अंधाधुंध कीटनाशक व फर्टिलाइजर के इस्तेमाल से भी अर्सेनिक सतही जल में घुलता है।
असर
पीजीआई चंडीगढ़ के न्यूरो साइंस के प्रोफेसर अक्षय आनंद का कहना है कि आर्सेनिकयुक्त पानी लगातार पीने से शुरुआत में लोगों के नाखून काले पड़ते हैं। इससे कैंसर व अल्जाइमर जैसी बीमारियां हो सकती हैं। हमारे शरीर को फ्लोराइड की जरूरत भी है, मगर तय सीमा से ज्यादा फ्लोराइड के शरीर में जाने से यह हड्डियों को कमजोर करने लगता है।
84 प्रतिशत गांवों में तेजी से गिर रहा भूजल स्तर
कुल गांव : 7287
रेड जोन में : 1948
रेड जोन की ओर बढ़ रहे : 6150 गांव
ग्रीन जोन में 1304
खंडों में स्थिति
कुल खंड : 141
सुरक्षित : 30
क्रिटिकल : 12
सेमी-क्रिटिकल : 14
अति-शोषित : 85
14 लाख करोड़ लीटर कम मिल रहा पानी
मांग : 34,96,276 करोड़ लीटर
उपलब्धता : 20,93,598 करोड़ लीटर
सरकार ने ये उठाए कदम
- 11.85 लाख नल कनेक्शन दिए गांवों में
- 17 नए जलघर स्थापित
- 404 नए नलकूप व 75 बूस्टिंग स्टेशन लगे
भविष्य की योजना
-फसल विविधीकरण : 3.14 लाख एकड़ क्षेत्र कवर कर 1.05 लाख करोड़ लीटर पानी बचेगा।
-धान की सीधी बिजाई : 4.75 लाख एकड़ में 0.51 लाख करोड़ लीटर की बचत।
-संरक्षण जुताई : 27.53 लाख एकड़ से 1.18 लाख करोड़ लीटर बचत।
-उच्च किस्मों का प्रयोग : 3.49 लाख एकड़ से 0.47 लाख करोड़ लीटर।
-हरी खाद का उपयोग : 9.73 लाख एकड़ से 0.35 लाख करोड़ लीटर।
-प्राकृतिक खेती : 0.43 लाख एकड़ से 0.27 लाख करोड़ लीटर की बचत।
कोटआर्सेनिक व फ्लोराइड पानी की समस्या से निपटने के लिए कई रणनीतियों पर काम किया जा रहा है। भूमिगत जल दोहन रोकने के लिए हमने अगले दो साल की विशेष कार्ययोजना तैयार की। जन स्वास्थ्य विभाग भी समय-समय पर सैंपल लेकर लोगों को शुद्ध पानी देने की दिशा में काम कर रहा है।
- केशनी आनंद अरोड़ा, अध्यक्ष, हरियाणा जल संसाधन प्राधिकरण
रिपोर्ट : अमर उजाला ब्यूरो