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अवैध शराबः नहीं मानते अधिकारी, 75 दिन भी नहीं टिके सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के आदेश
Sun, 02 Aug 2020 01:36 PM IST
खुशबू गोयल
सुरिंदर पाल, जालंधर
सुरिंदर पाल, जालंधर
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 02 Aug 2020 01:36 PM IST
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कैप्टन अमरिंदर सिंह
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मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और डीजीपी दिनकर गुप्ता ने 15 मई को एक बयान जारी किया था कि अगर सूबे में अवैध शराब की फैक्टरी पाई गई तो उस इलाके के आला अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। कैप्टन और डीजीपी के आदेशों की उनके मातहत एसएसपी ने कितनी परवाह की, यह 75 दिन बाद ही सामने आ गया। बार्डर जोन के तीन जिलों में 60 से ज्यादा लोगों को जहरीली शराब ने निगल लिया। मई में ही पंजाब की खुफिया एजेंसियों की तरफ से एक रिपोर्ट गृह विभाग को भेजी गई थी कि पंजाब में दरिया के किनारे अवैध शराब की खेप तैयार होती है।
इन रिपोर्ट को भी गंभीरता से नहीं लिया गया और शराब के कारण कई घरों के चिराग बुझ गए। कर्फ्यू व लॉकडाउन के दौरान पंजाब में अवैध शराब की बिक्री ने सरकार को हिलाकर रख दिया था। 15 मई को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पुलिस विभाग को सूबे में शराब की तस्करी, अवैध शराब बनाने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। सीएम ने डीजीपी से कहा था कि उन सब-डिवीजनों के डीएसपी और एसएचओ के विरुद्ध तुरंत एक्शन लें, जिनके इलाके में ऐसी गतिविधियां सामने आई हैं।
डीजीपी दिनकर गुप्ता ने सभी पुलिस कमिश्नरों और जिला पुलिस प्रमुखों को 23 मई तक जिला और पुलिस थाना स्तर पर शराब तस्करों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने के आदेश जारी किए थे। सभी थानों खासकर सरहदों के नजदीकी क्षेत्रों के थानों के एसएचओ को हर समय चौकस रहने और पंजाब के अंदर शराब की तस्करी को रोकने के निर्देश दिए गए थे। डीजीपी ने सख्त चेतावनी दी थी कि अगर किसी क्षेत्र में शराब की कोई भी गैर-कानूनी फैक्टरी चलती पाई गई आला अधिकारी का अन्य क्षेत्र में तबादला करके कार्रवाई की जाएगी।
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पंजाब में अवैध शराब को लेकर खुफिया एजेंसियों ने भी अपनी जांच की और एक रिपोर्ट बनाई कि पंजाब में दरियाई क्षेत्रों में अवैध शराब की फैक्टरियां लगाकर लाखों लीटर शराब रोजाना तैयार कर गांवों में सप्लाई की जा रही है। दो दिन में 60 से ज्यादा मौतों के बावजूद किसी राजपत्रित अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई है।
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इन रिपोर्ट को भी गंभीरता से नहीं लिया गया और शराब के कारण कई घरों के चिराग बुझ गए। कर्फ्यू व लॉकडाउन के दौरान पंजाब में अवैध शराब की बिक्री ने सरकार को हिलाकर रख दिया था। 15 मई को मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पुलिस विभाग को सूबे में शराब की तस्करी, अवैध शराब बनाने और बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए थे। सीएम ने डीजीपी से कहा था कि उन सब-डिवीजनों के डीएसपी और एसएचओ के विरुद्ध तुरंत एक्शन लें, जिनके इलाके में ऐसी गतिविधियां सामने आई हैं।
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डीजीपी दिनकर गुप्ता ने सभी पुलिस कमिश्नरों और जिला पुलिस प्रमुखों को 23 मई तक जिला और पुलिस थाना स्तर पर शराब तस्करों की पहचान कर सख्त कार्रवाई करने के आदेश जारी किए थे। सभी थानों खासकर सरहदों के नजदीकी क्षेत्रों के थानों के एसएचओ को हर समय चौकस रहने और पंजाब के अंदर शराब की तस्करी को रोकने के निर्देश दिए गए थे। डीजीपी ने सख्त चेतावनी दी थी कि अगर किसी क्षेत्र में शराब की कोई भी गैर-कानूनी फैक्टरी चलती पाई गई आला अधिकारी का अन्य क्षेत्र में तबादला करके कार्रवाई की जाएगी।
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पंजाब में अवैध शराब को लेकर खुफिया एजेंसियों ने भी अपनी जांच की और एक रिपोर्ट बनाई कि पंजाब में दरियाई क्षेत्रों में अवैध शराब की फैक्टरियां लगाकर लाखों लीटर शराब रोजाना तैयार कर गांवों में सप्लाई की जा रही है। दो दिन में 60 से ज्यादा मौतों के बावजूद किसी राजपत्रित अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई है।