दावों की खुली पोल: चंडीगढ़ में कैसे रूकेगा कोरोना... जांच कराने में मरीजों के छूट रहे पसीने
- चंद घंटों का काम होने में गुजर जा रहे कई दिन
- संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए लगाने पड़ रहे कई दिनों तक चक्कर
- कई का खो जा रहा सैंपल तो कई रिपोर्ट के लिए घिस रहे एड़ियां
विस्तार
कोरोना महामारी से बचाव के तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। स्थिति यह है कि संदिग्ध मरीजों को अस्पतालों में कोरोना की जांच के लिए कई दिनों तक भटकना पड़ रहा है। इतना ही नहीं किसी मरीज का जांच का नमूना संबंधित सेंटर पर पहुंचने से पहले ही गुम हो जा रहा है या फिर चंद घंटों की जांच रिपोर्ट के लिए उन्हें कई दिनों तक अस्पताल में एड़ियां घिसनी पड़ रही है। यह स्थिति जीएमएसएच- 16 में शुक्रवार को देखने को मिली।
यहां फ्लू क्लीनिक में जांच कराने आने वाले संदिग्ध मरीजों की जांच करने की बजाय उन्हें वापस कर दिया जा रहा है। इसको लेकर मरीज और उनके परिजन परेशान हैं। उनका कहना है कि खतरा मोल कर अस्पताल जाने की बजाय निजी लैब में पैसे खर्च करके जांच कराना ज्यादा सही है, क्योंकि अस्पताल में कई बार बुला कर भी जांच की सुविधा नहीं दी जा रही।
वहीं, अस्पताल प्रशासन का दावा है कि कोरोना के संदिग्ध मरीजों को जांच से लेकर इलाज तक की सभी व्यवस्थाएं मुहैया कराई जा रही हैं। जहां तक अस्पताल में संक्रमण से बचाव की बात है तो सभी गेट पर थर्मल स्क्रीनिंग के साथ ही सभी डिपार्टमेंट में सैनिटाइजर देने और बिना मास्क के प्रवेश वर्जित करने का निर्देश है।
ये है जांच की पूरी प्रक्रिया
जीएमएसएच- 16 में कोरोना की जांच कराने के लिए आने वाले संदिग्ध मरीज की फ्लू क्लीनिक में स्क्रीनिंग के बाद कमरा नंबर- 108 में जांच का नमूना लिया जाता है। वहां आरटीपीसीआर के साथ ही रेपिड किट टेस्ट की जाती है। गंभीर मरीजों की आरटीपीसीआर और कम गंभीर मरीजों की किट से जांच की जाती है।
किट की जांच रिपोर्ट 15 से 20 मिनट में मिल जाती है, जबकि आरटीपीसीआर की रिपोर्ट आने में 2 से 10 दिन का समय लगता है। यहां मरीजों का नमूना लेकर उसे पीजीआई भेज दिया जाता है। नमूना लेने के बाद मरीजों को हिदायत दी जाती है कि जब तक रिपोर्ट न आ जाए तब तक वे खुद को आइसोलेट रखें। वहीं, गंभीर मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर लिया जाता है।
निजी लैब की रिपोर्ट भी आती है अस्पताल में
शहर में अलग-अलग स्थानों पर निजी लैब में किए जा रहे हैं। कोरोना जांच की रिपोर्ट भी मरीजों तक सीधे पहुंचने की बजाय आईडीएसपी के पास आती है। वहां से संबंधित जोन के अस्पताल में वह रिपोर्ट फॉरवर्ड कर दी जाती है। जीएमएसएच- 16 में अस्पताल के मरीजों के अलावा सेक्टर 22, सेक्टर 45, मनीमाजरा के मरीजों की रिपोर्ट आती है। जहां से संबंधित मरीजों से संपर्क कर उनके रिपोर्ट की जानकारी देकर इलाज की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है।
क्या कहते हैं जांच कराने आए लोग
पांच दिन से आ रहा बुखार, नहीं हो रही जांच
मुझे 5 दिनों से बुखार आ रहा है। अस्पताल की फ्लू क्लीनिक में दो बार दिखा चुका हूं,लेकिन कोरोना जांच के लिए मेरा सैंपल नहीं लिया जा रहा। हर बार यह कह कर वापस कर दिया जा रहा है कि कोई ऐसे लक्षण नहीं दिख रहे हैं जिसके आधार पर कोरोना की जांच कराई जाए। -संदीप कुमार, धनास
4 दिन पहले दिया जांच का नमूना खो गया
मैंने अपनी मां के जांच का सैंपल 4 दिन पहले दिया था। आज रिपोर्ट लेने के लिए बुलाया गया था। यहां आई तो पता चला कि नमूना खो गया है। अब दोबारा मां को यहां लाकर उनका जांच का नमूना देना पड़ेगा । इससे अच्छा था कि हम कहीं प्राइवेट में ही जांच करा लेते हैं। -अंजू सिंह, इंडस्ट्रियल एरिया फेज- 1
मरीजों की अनदेखी से बढ़ रहा कोरोना
फ्लू क्लीनिक में भीड़ को नियंत्रित करने की कोई व्यवस्था नहीं है। लोग सामाजिक दूरी की अनदेखी कर एक दूसरे के पास खड़े रहते हैं। इसे लेकर अस्पताल प्रशासन भी अनदेखी कर रहा है। मरीजों की तेजी से बढ़ती संख्या इस अनदेखी का ही नतीजा है। -अमर सिंह, मलोया
लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए फ्लू क्लीनिक और अन्य सम्बंधित यूनिट में सभी व्यवस्था की गई है। अगर किसी को कही असुविधा हो रही है तो वो इसकी शिकायत कर सकता है। डॉ वीके नागपाल, मेडिकल सुपरिटेंडेंट, जीएमएसएच 16