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Chandigarh News: पेंशनधारी पूछ रहे हैं... आठ साल में महंगाई कहां से कहां पहुंची, फिर क्यों नहीं बढ़ी पेंशन?
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चंडीगढ़। पिछले आठ साल में बहुत कुछ बदल चुका है। महंगाई कहां से कहां पहुंच गई है लेकिन नहीं बढ़ी है तो शहर के करीब 25 हजार वृद्धावस्था, दिव्यांग और विधवाओं की मासिक पेंशन। जो पेंशन आठ साल पहले मिलती थी, अभी भी शहर के इन बुजुर्ग-दिव्यांग और विधवाओं को उतने ही रुपये मिलते हैं। महज 1000 रुपये, जबकि पड़ोसी राज्य कई बार पेंशन बढ़ा चुके हैं। दुख की बात है कि राजनीतिक दलों ने भी कभी पुरजोर तरीके से इसको लेकर आवाज नहीं उठाई। पेंशनधारी प्रशासन से पूछ रहे हैं कि महंगाई सरपट दौड़ रही है, फिर आठ साल से पेंशन वहीं क्यों खड़ी हैऊ दो राज्यों की राजधानी व केंद्र शासित प्रदेश में पूरे उत्तर भारत में सबसे कम वृद्धावस्था, दिव्यांग और विधवा पेंशन है जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में इससे तीन गुना पेंशन मिलती है। पंजाब में भी ज्यादा है। वृद्ध, दिव्यांग व असहाय विधवाओं को अपनों की नजर में उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। पिछले कई वर्षों से शहर में पेंशन की राशि को बढ़ाने की मांग हो रही है, लेकिन अब तक बढ़ाई नहीं गई है। राजनीतिक पार्टियां बुजुर्गों के कल्याण के वादे तो करती हैं लेकिन इन आठ सालों में उन्होंने पेंशन की राशि बढ़ाने के लेकर न कभी प्रदर्शन किया, न ही पुरजोर तरीके से इसकी मांग की। नेताओं ने धीमी आवाज में हामी जरूर भरी। कुछ ने प्रेस विज्ञप्ति भी जारी किए, लेकिन आठ साल तक एक रुपये पेंशन नहीं बढ़ने को लेकर किसी ने सड़क पर उतरने की जहमत नहीं उठाई। यह अपनेआप में साबित करता है कि शहर के नेता बुजुर्ग-दिव्यांग और विधवाओं के कितने हितैषी हैं। हालांकि अब चुनाव सिर पर है। फिर से पेंशन बढ़ाने के दावे होने लगे हैं।
आखिरी बार 2016 में बढ़ी थी पेंशन, तब से हरियाणा आठ बार बढ़ा चुका
यूटी प्रशासन ने आखिरी बार फरवरी 2016 में पेंशन बढ़ाया था। सात साल पहले वृद्धावस्था पेंशन को 500 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये किया गया था। उसके बाद से एक भी पेंशन नहीं बढ़ी है। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत लगभग सभी राज्य कई बार पेंशन की राशि को बढ़ा चुके हैं। हरियाणा ने तो पिछले आठ साल में आठ बार पेंशन बढ़ाई है। 2016 में हरियाणा में पेंशन करीब 1400 रुपये थी जो अब 3000 रुपये है। अन्य राज्यों में भी तीन से चार बार पेंशन की राशि बढ़ चुकी है, लेकिन चंडीगढ़ के वृद्ध, दिव्यांग व असहाय विधवाओं की पेंशन एक रुपये भी नहीं बढ़ी है।
हर राज्य के लिए बड़ा मुद्दा, चंडीगढ़ में उल्टा
हर राज्य के चुनाव में पेंशन एक बड़ा मुद्दा होता है क्योंकि किसी भी सरकार को बनाने और बिगाड़ने में पेंशनधारक बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए राज्य सरकार हर बार पेंशन को बढ़ाने के वादे करती है और कई बार बढ़ाए भी जाते हैं। चंडीगढ़ में उल्टा है, यहां अफसरशाही है। प्रस्ताव बनाकर दिल्ली भेज दिया गया, अब केंद्र के ऊपर है कि वो कितने साल बाद प्रस्ताव को पास करते हैं। वर्तमान में भी प्रशासन ने पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव कई साल पहले केंद्र को भेजा है लेकिन न तो सांसद किरण खेर ने कभी दिल्ली में यह मुद्दा उठाया और न ही अन्य किसी नेता ने। हालांकि पूर्व सलाहकार धर्मपाल ने दिल्ली जाकर केंद्र के अधिकारियों के साथ बैठक की लेकिन उसका भी कुछ नतीजा नहीं निकला।
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शहर में पेंशन की स्थिति
पेंशन वर्ग संख्या राशि (रुपये)
दिव्यांग 4650 1000 (0-69 फीसदी) और 2000 (70 फीसदी से ज्यादा)
विधवा 8592 1000 रुपये
वृद्धावस्था 12,192 1000 रुपये
-- - वर्जन -- -
पहले ही केंद्र को भेजा जा चुका है प्रस्ताव
पेंशन की राशि बढ़ाने के लिए केंद्र को पहले ही प्रस्ताव भेजा जा चुका है। किन्हीं कारणों की वजह से उसे मंजूरी नहीं मिल पाई है। भाजपा ने इसे प्राथमिकता पर रखा हुआ है और कोशिश है कि जल्द से जल्द इस मुद्दे को सुलझाया जाए ताकि शहर के वृद्ध, दिव्यांग व विधवाओं को पेंशन की राशि बढ़ कर मिल सके। - जेपी मल्होत्रा, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
भाजपा ने वृद्ध, दिव्यांग व विधवाओं का मजाक उड़ाया
आठ साल में एक रुपया पेंशन न बढ़ाकर भाजपा ने चंडीगढ़ के हजारों वृद्ध, दिव्यांग व असहाय विधवाओं का मजाक उड़ाया है। इससे शर्म की बात नहीं हो सकती। कांग्रेस के चुनाव जीतने के बाद हम सबसे पहले वृद्धावस्था, दिव्यांग और विधवा पेंशन को बढ़ाने का काम करेंगे। जरूरत पड़ी तो इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय तक जाएंगे। - एचएस लक्की, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस
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आखिरी बार 2016 में बढ़ी थी पेंशन, तब से हरियाणा आठ बार बढ़ा चुका
यूटी प्रशासन ने आखिरी बार फरवरी 2016 में पेंशन बढ़ाया था। सात साल पहले वृद्धावस्था पेंशन को 500 रुपये से बढ़ाकर एक हजार रुपये किया गया था। उसके बाद से एक भी पेंशन नहीं बढ़ी है। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश समेत लगभग सभी राज्य कई बार पेंशन की राशि को बढ़ा चुके हैं। हरियाणा ने तो पिछले आठ साल में आठ बार पेंशन बढ़ाई है। 2016 में हरियाणा में पेंशन करीब 1400 रुपये थी जो अब 3000 रुपये है। अन्य राज्यों में भी तीन से चार बार पेंशन की राशि बढ़ चुकी है, लेकिन चंडीगढ़ के वृद्ध, दिव्यांग व असहाय विधवाओं की पेंशन एक रुपये भी नहीं बढ़ी है।
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हर राज्य के लिए बड़ा मुद्दा, चंडीगढ़ में उल्टा
हर राज्य के चुनाव में पेंशन एक बड़ा मुद्दा होता है क्योंकि किसी भी सरकार को बनाने और बिगाड़ने में पेंशनधारक बहुत बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए राज्य सरकार हर बार पेंशन को बढ़ाने के वादे करती है और कई बार बढ़ाए भी जाते हैं। चंडीगढ़ में उल्टा है, यहां अफसरशाही है। प्रस्ताव बनाकर दिल्ली भेज दिया गया, अब केंद्र के ऊपर है कि वो कितने साल बाद प्रस्ताव को पास करते हैं। वर्तमान में भी प्रशासन ने पेंशन बढ़ाने का प्रस्ताव कई साल पहले केंद्र को भेजा है लेकिन न तो सांसद किरण खेर ने कभी दिल्ली में यह मुद्दा उठाया और न ही अन्य किसी नेता ने। हालांकि पूर्व सलाहकार धर्मपाल ने दिल्ली जाकर केंद्र के अधिकारियों के साथ बैठक की लेकिन उसका भी कुछ नतीजा नहीं निकला।
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शहर में पेंशन की स्थिति
पेंशन वर्ग संख्या राशि (रुपये)
दिव्यांग 4650 1000 (0-69 फीसदी) और 2000 (70 फीसदी से ज्यादा)
विधवा 8592 1000 रुपये
वृद्धावस्था 12,192 1000 रुपये
पहले ही केंद्र को भेजा जा चुका है प्रस्ताव
पेंशन की राशि बढ़ाने के लिए केंद्र को पहले ही प्रस्ताव भेजा जा चुका है। किन्हीं कारणों की वजह से उसे मंजूरी नहीं मिल पाई है। भाजपा ने इसे प्राथमिकता पर रखा हुआ है और कोशिश है कि जल्द से जल्द इस मुद्दे को सुलझाया जाए ताकि शहर के वृद्ध, दिव्यांग व विधवाओं को पेंशन की राशि बढ़ कर मिल सके। - जेपी मल्होत्रा, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा
भाजपा ने वृद्ध, दिव्यांग व विधवाओं का मजाक उड़ाया
आठ साल में एक रुपया पेंशन न बढ़ाकर भाजपा ने चंडीगढ़ के हजारों वृद्ध, दिव्यांग व असहाय विधवाओं का मजाक उड़ाया है। इससे शर्म की बात नहीं हो सकती। कांग्रेस के चुनाव जीतने के बाद हम सबसे पहले वृद्धावस्था, दिव्यांग और विधवा पेंशन को बढ़ाने का काम करेंगे। जरूरत पड़ी तो इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय तक जाएंगे। - एचएस लक्की, प्रदेश अध्यक्ष, कांग्रेस