मास्टर प्लान: जानिए, किसने क्या दिए सुझाव?
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अधिकारी तीन साल के लिए आते हैं। उन्हें शहर के लोगों की परेशानियों की कोई जानकारी नहीं होती। शहर के लिए योजना बनाने का सारा काम ऐसे ही अधिकारियों के जिम्मे है। इनकी बनी योजनाएं समस्या का समाधान न होकर नई दिक्कतें पैदा करती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि चंडीगढ़ के लिए जो भी योजनाएं बनें उनका निर्णय करने में जन प्रतिनिधियों, व्यापारिक, औद्योगिक एवं रेजिडेंट्स संगठनों के प्रतिनिधियों की भागेदारी अधिक हो।
-जगदीश अरोड़ा, अध्यक्ष, चंडीगढ़ बिजनेस काउंसिल
मुकर जाते हैं अफसर
पिछले साल हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन प्रशासन के अधिकारियों के साथ सेक्टर-45 के हाउसिंग बोर्ड के मकान देखने के लिए आए। उस समय एक अफसर ने कहा कि कितने सुंदर मकान हैं। जरूरत के अनुसार बदलाव हुए हैं, उन्हें रेगुलर किया जाना चाहिए। लेकिन हाल ही में मैं जब उन्हीं अफसर से मिला तो उनका कहना था कि वह तो उस दिन से सोए तक नहीं हैं। पता नहीं लोग कैसे रह रहे होंगे क्योंकि मकानों में काफी वायलेशन है।
- रजत मल्होत्रा, सचिव, सीएचबी रेजिडेंट्स फैंडरेशन
सचिवालय ही गलत जगह
ली कार्बूजिए ने जब इस शहर को बसाया था तब भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए प्लानिंग नहीं की गई थी। सचिवालय गलत जगह पर बनाया गया है। सचिवालय के पास कर्मचारियों के लिए घर बनते तो ट्रैफिक की समस्या कम हो जाती। अब भी प्लानिंग से काम नहीं हो रहा है। सेक्टर-17 में बैंक स्क्वेयर के सामने ओवरब्रिज बना दिया गया जिसकी जरूरत नहीं थी, क्योंकि वहां ट्रैफिक की समस्या नहीं है। जहां ट्रैफिक की समस्या है वहां ओवरब्रिज नहीं बनाए जाते हैं।
-महावीर एस जगदेव, इंजीनियर एवं एक्सपोर्टर
बाजार भाव में मकान लेने को तैयार
पुनर्वास योजना के तहत झुग्गी वालों को तो फ्लैट दिए गए हैं लेकिन कर्मचारी जो बाजार भाव पर मकान लेने को तैयार है उन्हें प्रशासन मकान देने को तैयार नहीं। साल 2008 में हाउसिंग बोर्ड ने कर्मचारियों के लिए हाउसिंग स्कीम लांच की है जबकि उस समय जमीन का कोई प्रावाधान नहीं था।
-राजकुमार, अध्यक्ष, गवर्नमेंट प्रैस इंपालाइज यूनियन
पीजीआई में बाहर की भीड़, इलाज के लिए कहां जाएं
मुझे हार्ट प्रॉब्लम हुई तो इलाज के लिए मोहाली क्यों जाना पड़ा? मैं अफसरों से यही सवाल पूछता हूं। पीजीआई और जीएमसीएच-32 में पड़ोसी राज्यों की काफी भीड़ है। मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। चंडीगढ़ के मरीज कहां जाएं। मजबूरी में पंचकूला और मोहाली का ही रास्ता बचता है। प्राइवेट अस्पतालों को जगह दी जाए। लोगों को अपने ही शहर में सही इलाज की सुविधा तो मिले।
-डॉ.नीरज नागपाल, अध्यक्ष, मेडिको एक्शन लीगल ग्रुप
सुरक्षा का मुद्दा
राउंड टेबल कान्फ्रेंस में फासवेक के अध्यक्ष एवं सलाहकार समिति के सदस्य बलजिंदर सिंह बिट्टू ने शहर में सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पुलिस किराएदारों और नौकरों का वेरिफिकेशन देने के लिए तो दबाव बनाती है मगर रिहाइशी इलाकों में जो फेरी वाले घूमते हैं, उन पर ध्यान नहीं दिया जाता।
पुलिस और प्रशासन के बीच फंसे
इंडस्ट्रीयल एरिया में झुग्गी बस्ती भी है। हमारे प्लाटों के पिछली तरफ बरामदे खुले हुए हैं, जिन्हें बायलाज के चलते कवर नहीं कर सकते है। जब चोरी हो जाती है तो पुलिस कहती है कि बरमादे खुले क्यों रखते हो? अगर इन्हें कवर कर दिया जाए तो प्रशासन वायलेश का नोटिस भेज देता है।
-अरुण महाजन, अध्यक्ष, चंडीगढ़ इंड्रस्ट्रलिस्ट एसोसिएशन
नई व्यवस्था की तत्काल जरूरत
मास्टर प्लान में और मल्टीलेवल पार्किंग बनाने की तो बात की गई है, लेकिन इसके लिए कोई विशेष जगह चिन्हित नहीं की गई, जबकि शहर के ज्यादातर सेक्टरों में ऐसी किसी नई व्यवस्था की तत्काल जरूरत है। शहर के अस्पतालों में अभी इनफ्रास्ट्रक्शन और डॉक्टर दोनों की कमी है। अगर कोई प्राइवेट अस्पताल शुरू करेगा, वो उसे चलाने के लिए खुद इंप्लायमेंट कर ही लेगा।
चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष चरंजीव सिंह
कर्मचारियों को घर मिले
प्रशासन अपने ही कर्मचारियों को स्थायी तौर पर मकान देना नहीं चाहता। कर्मचारी 35 से 40 साल काम करते हैं और गांव जाने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं होता। जबकि शहर के विकास में कर्मचारियों का अहम योगदान है। ऐसा नहीं है कि शहर में कर्मचारियों के मकान के लिए जगह नहीं है। मास्टर प्लान में कर्मचारियों के मकानों के लिए जगह तय होनी चाहिए।
- आनंद गुप्ता, प्रैस सचिव, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड इंपलाइज कोआडिनेशन कमेटी
पब्लिक ट्रासपोर्ट में सुधार किया जाए
शहर का पब्लिक ट्रासपोर्ट सिस्टम की हालत काफी बिगड़ी हुई है। बेशक मेट्रो प्रोजेक्ट न बने लेकिन ट्रासपोर्ट सिस्टम में सुधार होना चाहिए। रात को यह हालत होती है कि आटो चालक मनमानी रेट वसूलते है और शहर के हर जगह जाने के लिए आटो तैयार नही होते। रात को लोकल मिनी बसे चलाई जानी चाहिए।
- हितेश पुरी, अध्यक्ष, आरडब्ल्यूए-43