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Chandigarh News: पीजीआई में मरीजों को मिली मेटाबोलिक क्लिनिक की सौगात
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चंडीगढ़। पीजीआई में लिवर का इलाज कराने आने वाले मरीजों को मेटाबोलिक लिवर क्लीनिक की सौगात मिल गई है। क्लीनिक के शुरू होने से लिवर के अलग-अलग रोगों से ग्रस्त मरीजों को एक ही जगह इलाज मिलना शुरू हो गया है। सोमवार को पीजीआई के निदेशक प्रो. विवेक लाल ने मेटाबोलिक क्लिनिक का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि इससे मरीजों को काफी लाभ मिलेगा।
हेपेटोलॉजी विभाग ने एंडोक्रिनोलॉजी और डायटेटिक्स विभाग के सहयोग से सोमवार और शुक्रवार को न्यू ओपीडी कॉम्प्लेक्स में लिवर क्लिनिक में आने वाले मरीजों के लिए यह नई सेवा शुरू की है। हेपेटोलॉजी के प्रमुख प्रो. अजय दुसेजा ने बताया कि लिवर क्लिनिक के अंदर मेटाबोलिक क्लिनिक शुरू करने का उद्देश्य क्रोनिक लिवर रोग वाले रोगियों को एक ही छत के नीचे एकीकृत, वन-स्टॉप देखभाल प्रदान करना है। क्रोनिक लिवर रोग की शुरुआत और हेपेटिक फाइब्रोसिस के विकास के साथ शरीर में बहुत सारे मेटाबॉलिक परिवर्तन होते हैं। कई रोगियों में लीवर सिरोसिस के विकास के बाद मधुमेह मेलिटस विकसित होता है। मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़े स्टीटोटिक लिवर रोग (एमएएसएलडी) के मरीज जिन्हें पहले नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (एनएएफएलडी) कहा जाता था, आमतौर पर उन मरीजों में होते हैं जिनमें मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और लिपिड विकारों के मेटाबोलिक जोखिम कारक होते हैं।
रोगियों को एक ही दिन आहार विशेषज्ञ से परामर्श लेने की मिलेगी सुविधा
प्रो. अजय दुसेजा ने बताया कि लिवर प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों में प्रत्यारोपण के बाद शरीर का वजन बढ़ने, रक्त शर्करा में वृद्धि, रक्तचाप और रक्त लिपिड की गड़बड़ी होने की संभावना होती है। सामान्य तौर पर इन रोगियों को लिवर क्लिनिक में देखे जाने के बाद इन मेटाबॉलिक रिस्क फैक्टर के प्रबंधन के लिए एंडोक्रिनोलॉजी और डायटेटिक्स विभाग में भेजा जाता है। एंडोक्रिनोलॉजी ओपीडी के अलग-अलग दिनों में होने और बाहरी राज्यों से आने वाले कई रोगियों के कारण काफी लोग इन विशेष क्लीनिकों तक पहुंचने में सक्षम नहीं है। लिवर क्लिनिक के भीतर एक एकीकृत ‘मेटाबोलिक क्लिनिक’ होने से इन रोगियों को उसी दिन एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और आहार विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सुविधा मिलेगी जो मेटाबोलिक क्लिनिक का प्रबंधन करेंगे।
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हेपेटोलॉजी विभाग ने एंडोक्रिनोलॉजी और डायटेटिक्स विभाग के सहयोग से सोमवार और शुक्रवार को न्यू ओपीडी कॉम्प्लेक्स में लिवर क्लिनिक में आने वाले मरीजों के लिए यह नई सेवा शुरू की है। हेपेटोलॉजी के प्रमुख प्रो. अजय दुसेजा ने बताया कि लिवर क्लिनिक के अंदर मेटाबोलिक क्लिनिक शुरू करने का उद्देश्य क्रोनिक लिवर रोग वाले रोगियों को एक ही छत के नीचे एकीकृत, वन-स्टॉप देखभाल प्रदान करना है। क्रोनिक लिवर रोग की शुरुआत और हेपेटिक फाइब्रोसिस के विकास के साथ शरीर में बहुत सारे मेटाबॉलिक परिवर्तन होते हैं। कई रोगियों में लीवर सिरोसिस के विकास के बाद मधुमेह मेलिटस विकसित होता है। मेटाबॉलिक डिसफंक्शन से जुड़े स्टीटोटिक लिवर रोग (एमएएसएलडी) के मरीज जिन्हें पहले नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (एनएएफएलडी) कहा जाता था, आमतौर पर उन मरीजों में होते हैं जिनमें मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और लिपिड विकारों के मेटाबोलिक जोखिम कारक होते हैं।
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रोगियों को एक ही दिन आहार विशेषज्ञ से परामर्श लेने की मिलेगी सुविधा
प्रो. अजय दुसेजा ने बताया कि लिवर प्रत्यारोपण कराने वाले मरीजों में प्रत्यारोपण के बाद शरीर का वजन बढ़ने, रक्त शर्करा में वृद्धि, रक्तचाप और रक्त लिपिड की गड़बड़ी होने की संभावना होती है। सामान्य तौर पर इन रोगियों को लिवर क्लिनिक में देखे जाने के बाद इन मेटाबॉलिक रिस्क फैक्टर के प्रबंधन के लिए एंडोक्रिनोलॉजी और डायटेटिक्स विभाग में भेजा जाता है। एंडोक्रिनोलॉजी ओपीडी के अलग-अलग दिनों में होने और बाहरी राज्यों से आने वाले कई रोगियों के कारण काफी लोग इन विशेष क्लीनिकों तक पहुंचने में सक्षम नहीं है। लिवर क्लिनिक के भीतर एक एकीकृत ‘मेटाबोलिक क्लिनिक’ होने से इन रोगियों को उसी दिन एंडोक्रिनोलॉजिस्ट और आहार विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सुविधा मिलेगी जो मेटाबोलिक क्लिनिक का प्रबंधन करेंगे।
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