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Hindi News ›   Chandigarh ›   Parties Strategy for Haryana Assembly Elections 2014

जानिए, विस चुनाव के लिए बड़े दलों का 'गुप्त प्लान'

Mon, 15 Sep 2014 02:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 15 Sep 2014 02:30 PM IST
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Parties Strategy for Haryana Assembly Elections 2014

मोदी लहर और एंटी इंकंबेंसी का सामना कर रहे भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हाथों में ही हरियाणा कांग्रेस की बागडोर है। वही यहां के स्टार प्रचारक हैं और मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी हैं।

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वह भारतीय जनता पार्टी के पास मुख्यमंत्री का चेहरा न होने का आरोप रहे हैं। इसके साथ ही वह मोदी पर महंगाई में नियंत्रण न कर पाने और आम आदमी को राहत न मिलने के आरोप भी लगा रहे हैं।
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40 विधायकों के साथ गुणा गणित से पांच साल तक सरकार चलाने वाले मुख्यमंत्री अब अपने कार्यकाल में कराए गए विकास कार्यों के बल पर जनता के बीच पहुंचने का दावा कर रहे हैं। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष भी उनके विकास के रथ को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं।
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लेकिन कांग्रेस के नेताओं में भाजपा में जाने की जो होड़ मची हुई उससे प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर कांग्रेस आलाकमान तक परेशान है और टिकटों की घोषणा भी नहीं कर पा रहा है।

वह इस इंतजार में है कि भाजपा की पूरी सूची जारी हो जाए और उसमें क्या स्थिति रहती है उसके बाद अपनी टिकट जारी की जाएं।

हालांकि प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर यह कह चुके हैं कि हम विकास के मुद्दे पर ही जनता के बीच जाएंगे और 15 सितंबर के बाद पहली सूची जारी कर दी जाएगी।

इनेलो भी पीछे नहीं है

Parties Strategy for Haryana Assembly Elections 2014

पिछले दस वर्षों से सत्ता से बाहर चल रहा इनेलो इस बार कोई मौका चूकना नहीं चाहता है। पिछले विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर जीत हासिल करने वाली ओम प्रकाश चौटाला की पार्टी का लोकसभा चुनाव में भी शानदार प्रदर्शन रहा। उसने हिसार और सिरसा लोकसभा सीट पर विजय हासिल की।

दो लोकसभा सीटों की इस जीत ने पार्टी में संजीवनी का काम किया है, लोकसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद से इनेलो के पदाधिकारी और कार्यकर्ता पूरे जोश ओ खरोस से मैदान में हैं।

शिक्षक भर्ती घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल में बंद पार्टी प्रमुख ओम प्रकाश चौटाला और अजय चौटाला की गैर मौजूदगी में भी पार्टी राज्य में अपना प्रतिनिधित्व दमदारी से दिखा रही है।

तीसरी पीढ़ी के दुष्यंत चौटाला, दिग्विजय चौटाला ने पूरी तरह से मोर्चा संभाला हुआ है। सूबे के सियासी समीकरणों को देखते हुए इनेलो ने सबसे पहले अपने 73 उम्मीदवार घोषित किए और प्रचार प्रसार शुरू कर दिया।

गैर जाट जोड़ने में जुटी हजकां

Parties Strategy for Haryana Assembly Elections 2014

हरियाणा में जोड़तोड़ के मास्टर कहे जाने वाले भजनलाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई इस बार भाजपा से गठबंधन करने में सफल नहीं रहे हैं।

भाजपा ने उनकी शर्तों से इंकार कर दिया और नई शर्तों पर कुलदीप राजी नहीं हुए। ऐसे में भाजपा ने तो एकला चलो की राह पकड़ ली पर कुलदीप बिश्नोई राज्य में गैर जाट मतदाताओं को रिझाने के लिए छोटे दलों से गठबंधन के प्रयास में जुट गए।

इस कड़ी में उन्होंने सबसे पहला गठबंधन कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी बनाने वाले विनोद शर्मा की जन चेतना पार्टी से किया। इसके बाद वह बसपा को भी जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं हालांकि अभी उसमें सफल नहीं हो पाए हैं।

इस तरह सभी छोटे दलों का एक महागठबंधन बनाकर वह गैर जाट मतदाताओं पर डोरे डालकर सूबे की सत्ता संभालना चाहते हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में हजकां की छह सीटें थीं, लोकसभा चुनाव में भी छह-सात सीटों पर आगे रहे लेकिन वह सिरसा और हिसार दोनों लोकसभा सीट हार गए।

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