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यादें 2015: पंजाब सरकार पर साल भर छाए मुश्किलों के बादल

Thu, 31 Dec 2015 01:42 PM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 31 Dec 2015 01:42 PM IST
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parkash singh badal government year ender 2016

पंजाब को विकास के रास्ते पर ले जाने का दावा करने वाली बादल सरकार के लिए साल 2015 चुनौतीपूर्ण रहा। सरकार मुश्किलों से घिरी रही। कभी सीमा पार से आए आतंकियों ने दहशत फैलाई, तो कभी मौसम की बेरुखी के कारण खेती पर संकट आया। सरकार के लिए सबसे बड़ी परेशानी श्रीगुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूपों की बेअदबी के बाद खड़ी हुई। ऐसी घटनाओं से पंजाबी आहत हुए।

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हालत यह हो गई कि सरकार के मंत्रियों और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के मेंबरों का लोगों के बीच जाना मुश्किल हो गया, उन पर हमले होने लगे। इसके बाद डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने सद्भावना रैलियों के जरिए डैमेज कंट्रोल किया। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम को माफी देने से एसजीपीसी और सरकार की साख गिरी।
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दूसरी ओर डिप्टी सीएम की ऑर्बिट बसों ने सड़क पर आतंक मचाया और पूरे साल यह बसें बादल परिवार के लिए मुसीबत बनी रहीं। मोगा में ऑर्बिट बस में छेड़छाड़ के बाद मां-बेटी के नीचे कूदने से बेटी की मौत हुई। अबोहर में एक दलित युवक के हाथ-पैर काट कर बेरहमी से उसकी हत्या कर दी गई। इसमें मुख्य आरोपी एक अकाली नेता है।
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इन दोनों घटनाओं से पंजाब में कौमी और सामाजिक एकता को झटका लगा। विपक्ष ने सरकार पर जम कर हमले बोले। खेती के लिए यह साल बेहद निराशाजनक रहा। पहले मौसम की मार से गेहूं की फसल खराब हुई। फिर कपास पर सफेद मक्खी का हमला हुआ। अब धान की अदायगी के लिए किसान परेशान हैं। प्रदेश में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं के कारण भी बादल सरकार विपक्षी दलों के निशाने पर रही। 

सरकार पर भारी पड़ा मोगा ऑर्बिट बस कांड

parkash singh badal government year ender 2016

अप्रैल के अंत में ऑर्बिट की बस में छेड़छाड़ और मां-बेटी को बस से धकेलने की घटना हुई। मोगा में हुई इस घटना से डिप्टी सीएम सुखबीर बादल पर उंगलियां उठीं। वजह यह था कि बस का मालिकाना उन्हीं के हाथ में है। हादसे में बेटी की मौत हो गई थी। गांव लंडेके निवासी शिंदर कौर ने अपनी बेटी अर्शदीप और नौवीं में पढ़ने वाले बेटे आकाशदीप सिंह के साथ मोगा-कोटकपूरा बाईपास से बस पकड़ी थी।

इस घटना के बाद विपक्ष ने सरकार पर तीखे हमले किए। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने लोक सभा में यह मुद्दा उठाया। चंडीगढ़ में सीएम प्रकाश सिंह बादल ने माना कि बस बादल परिवार की थी, तो दिल्ली में हरसिमरत ने कहा कि वह पता कराएंगी कि बस बादल परिवार की ही है या नहीं। शिअद की साझीदार भाजपा ने भी घटना की निंदा की।

आखिर क्त्रसइसिस मैनेजमेंट करते हुए डिप्टी सीएम सुखबीर बादल ने ऑर्बिट की सभी बसें बंद कर स्टाफ के लिए ओरिएंटेशन प्रोग्राम कराने का ऐलान किया। पर कुछ ही दिन बाद ऑर्बिट की बसें फिर सड़कों पर दौड़ने लगीं। यह मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा। हालांकि बाद में अर्शदीप के परिजन ही बयानों से मुकर गए। मामला अब भी लंबित है, लेकिन ऑर्बिट की बसों से हादसों का सिलसिला जारी रहा।

नौकरी को लेकर उठी सरकार पर उंगली
पंजाब की सरजमीं पर सालों बाद कोई आतंकी हमला हुआ, लेकिन इस बार दहशतगर्द सीमा पार से आए थे। 27 जुलाई को आर्मी की यूनिफॉर्म में आए तीन युवकों ने गुरदासपुर के दीनानगर में दहशत फैलाई। पंजाब पुलिस की स्वाट टीम के 28 सदस्यों ने आतंकी हमले का जवाब दिया। हमला शुरू होने के ग्यारह घंटे बाद आखिरी आतंकी भी मारा गया।

यह स्वाट का पहला काउंटर टैररिज्म ऑपरेशन था। हमले में एसपी समेत चार पुलिसकर्मी और तीन लोगों की जान गई। इस घटना के बाद सरकार पर तब उंगली उठी, जब मृतक आश्रितों को नौकरी देने और घायल मुलाजिमों को प्रमोशन का वादा पूरा करने का मामला चर्चा में आया।

एक घायल मुलाजिम का मामला हाईकोर्ट भी पहुंचा। सरकार पर आरोप लगा कि उसे प्रमोशन देने की घोषणा के बावजूद उसकी अनदेखी की गई।

महंगी पड़ी डेरा प्रमुख राम रहीम को माफी

parkash singh badal government year ender 2016

मोगा कांड की आग अभी बुझी नहीं थी कि श्री अकाल तख्त साहिब ने एक विवादित आदेश जारी कर पंजाब का माहौल गरमा दिया। 24 सितंबर को आदेश जारी कर डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख संत गुरमीत राम रहीम का माफीनामा स्वीकार कर लिया गया। गुरमीत राम-रहीम पर 2007 में श्री गुरु गोबिंद सिंह जैसी वेशभूषा में आने का आरोप था।

माफी के फैसले से पूरे पंजाब में आक्रोश फैल गया। जगह-जगह रोष प्रदर्शन हुए। विरोधियों ने इसे विधानसभा चुनाव से पहले सरकार की साजिश बताया। आखिर 16 अक्तूबर को श्री अकालतख्त साहिब के जत्थेदार की अगुवाई में हुई बैठक में माफीनामा रद्द कर दिया गया।

बेअदबी ने किया आहत, फायरिंग से उपजा रोष
बरगाड़ी में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप की बेअदबी का मामला प्रदेश के लोगाें की धार्मिक भावना को आहत करने वाला था। सूबे में कई जगह बेअदबी की घटनाएं हुईं। इसी बीच बेहबल कलां में बेअदबी के विरोध में शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रही सिख संगत पर पुलिस की ओर से फायरिंग करने की कार्रवाई ने आग में घी का काम किया।

फायरिंग में दो युवक गुरजीत सिंह और कृष्ण सिंह मारे गए। वहीं 80 से ज्यादा लोग जख्मी हुए। गुस्साई भीड़ ने भी पुलिस को निशाना बनाया। इस घटना ने सरकार, एसजीपीसी और अकाली दल को बिल्कुल ही बैकफुट पर ला खड़ा किया। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर बड़े सवाल उठे।

पुलिस ने बेअदबी मामले में दो भाइयों रुपिंदर सिंह व जसविंदर सिंह को गिरफ्तार कर दावा किया कि घटना के तार विदेश से जुड़े हैं। युवकों की गिरफ्तारी का विरोध हुआ। आखिर पुलिस यह साबित नहीं कर सकी कि वे दोषी हैं और उन्हें रिहा कर दिया गया। आखिरकार इस मामले ने डीजीपी सुमेध सैनी की बलि ले ली, सरकार की काफी किरकिरी होने के बाद 26 अक्तूबर को उन्हें पद से हटा दिया गया।

इस घटना हालत यह हो गई कि मंत्री, अकाली नेता और एसजीपीसी मेंबर लोगों के बीच जाने से कतराने लगे, कई जगह उन पर हमले हुए। विपक्षी दलों ने भी सरकार के प्रति लोगों में गुस्से वाले माहौल को भुनाने की बखूबी कोशिश की।

सड़कों से संसद तक गूंजा अबोहर कांड

parkash singh badal government year ender 2016

1 दिसंबर को अबोहर में कुछ लोगों ने एक दलित युवक भीम टांक के हाथ-पैर काट कर उसकी हत्या कर दी। जबकि, उसका साथी गुरजंट सिंह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस मामले में अकाली नेता शिवलाल डोडा और उसका भतीजा मुख्य आरोपी थे। इस हैवानगी पूर्ण घटना से पूरा पंजाब दहल गया। कांग्रेस ने लोकसभा में इस मुद्दे पर जम कर हंगामा किया।

जबकि, केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि यह दलित उत्पीड़न का नहीं, बल्कि गैंगवार का मामला है। जबकि, शिअद की साझीदार भाजपा के के केंद्रीय राज्यमंत्री विजय सांपला ने पीड़ित के घर जाकर कहा कि यह साफ तौर पर दलित उत्पीड़न का मामला है।

कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सरकार पर तीखे हमले बोले। सीएम प्रकाश सिंह बादल ने कहा कि डोडा का अकाली दल से कोई संबंध नहीं है। हाल ही में हाईकोर्ट ने दोनों पीड़ित परिवारों को सुरक्षा देने के आदेश दिए हैं।

किसानों का आत्महत्या करना अखर गया
यह साल खेती और किसानों के लिए बेहद निराशाजनक रहा। साल की शुरुआत में ही बेमौसम बरसात से गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार ने केंद्र को प्रस्ताव भेज कर 717 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की, पर किसानों को कोई मदद नहीं मिली। सितंबर-अक्तूबर में सफेद मक्खी कपास की फसल पर कहर बन कर टूटी।

सफेद मक्खी के हमले से करीब दो तिहाई फसल तबाह हो गई। जिससे करीब 4200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बड़ी संख्या में आर्थिक तंगी के बोझ तले किसानों ने आत्महत्या कर ली। इस मामले में नकली कीटनाशकों का खुलासा होने के बाद माहौल और गर्मा गया। पुलिस ने खेतीबाड़ी विभाग के डायरेक्टर डॉ. मंगल सिंह को गिरफ्तार किया।

खेतीबाड़ी मंत्री तोता सिंह तक भी आंच पहुंची। किसानों राज्य भर में बड़े आंदोलन किए। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी सरकार पर हमला बोला। इसके बाद बासमती के रेट बुरी तरह गिरने से किसानों पर और मार पड़ी। साल के आखिर में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने धान की कैश क्रेडिट लिमिट बढ़ाने से इंकार कर दिया। इसके चलते करीब पांच हजार करोड़ की अदायगी अभी तक नहीं हो सकी है।

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