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बहिबल गोलीकांडः बिना मजिस्ट्रेट की इजाजत के हुई थी फायरिंग, कोर्ट में दिखाए गए वीडियो क्लिप
Sun, 24 Feb 2019 11:59 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदकोट(पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फरीदकोट(पंजाब)
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 24 Feb 2019 11:59 AM IST
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आईजी उमरानंगल
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अक्तूबर 2015 के बरगाड़ी बेअदबी मामले से जुड़े कोटकपूरा गोलीकांड में चार दिन के पुलिस रिमांड के बाद आरोपी आईजी परमराज सिंह उमरानंगल को एसआईटी ने स्थानीय अदालत में पेश किया। एसआईटी ने अदालत से आईजी का रिमांड 10 दिन बढ़ाने की मांग रखी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने रिमांड को 26 फरवरी तक बढ़ाने के आदेश दिए।
शनिवार को दोबारा अदालत में पेशी के दौरान सरकारी पक्ष ने दावा किया कि उमरानंगल जांच में किसी तरह का सहयोग नहीं कर रहे हैं और एसआईटी को अभी उनसे घटना वाले दिन फोन पर हुई उनकी बातचीत के बारे में पूछताछ करनी है। सरकारी पक्ष ने यह भी दावा किया कि एसआईटी जांच में सामने आया है कि उस दिन कोटकपूरा में धरना देने वालों पर पुलिस ने बिना मजिस्ट्रेट की इजाजत के गोलियां दागी थीं। घटना सुबह करीब सात बजे की है, इस संबंध में थाना सिटी कोटकपूरा पुलिस ने करीब पौने चार घंटे बाद प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज किया था।
इसमें पुलिस ने बल प्रयोग करने के संबंध में किसी मजिस्ट्रेट से इजाजत लेने का कोई उल्लेख नहीं किया। यह भी सामने आया कि उस दिन घटनास्थल पर तैनात एसडीएम ने पुलिस को सिर्फ हवाई फायरिंग की इजाजत दी थी, लेकिन पुलिस ने धरनाकारियों पर सीधे फायरिंग कर दी। सरकारी पक्ष का आरोप है कि घटना स्थल से संबंधित मुख्य चौक में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे जिसका कंट्रोल थाना सिटी में था। लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उस दिन की फुटेज को ही नष्ट करवा दिया।
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एसआईटी ने किसी और व्यक्ति से मिली एक वीडियो फुटेज भी अदालत को दिखाई, जिसमें पुलिस द्वारा घटना के प्रमुख गवाह अजीत सिंह पर गोलियां चलाती दिख रही है। इसी गवाह के बयान पर पिछले साल 7 अगस्त को कोटकपूरा की घटना में अज्ञात पुलिस अधिकारियों पर इरादा- ए- कत्ल का केस दर्ज किया गया था। एसआईटी के दावे पर एतराज जताते हुए बचाव पक्ष के वकीलों ने भी अदालत को एक वीडियो दिखाई जिसमें प्रदर्शनकारी तलवारें लहरा रहे हैं और पुलिस पर हमला करने के मूड में दिख रहे हैं।
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शनिवार को दोबारा अदालत में पेशी के दौरान सरकारी पक्ष ने दावा किया कि उमरानंगल जांच में किसी तरह का सहयोग नहीं कर रहे हैं और एसआईटी को अभी उनसे घटना वाले दिन फोन पर हुई उनकी बातचीत के बारे में पूछताछ करनी है। सरकारी पक्ष ने यह भी दावा किया कि एसआईटी जांच में सामने आया है कि उस दिन कोटकपूरा में धरना देने वालों पर पुलिस ने बिना मजिस्ट्रेट की इजाजत के गोलियां दागी थीं। घटना सुबह करीब सात बजे की है, इस संबंध में थाना सिटी कोटकपूरा पुलिस ने करीब पौने चार घंटे बाद प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज किया था।
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इसमें पुलिस ने बल प्रयोग करने के संबंध में किसी मजिस्ट्रेट से इजाजत लेने का कोई उल्लेख नहीं किया। यह भी सामने आया कि उस दिन घटनास्थल पर तैनात एसडीएम ने पुलिस को सिर्फ हवाई फायरिंग की इजाजत दी थी, लेकिन पुलिस ने धरनाकारियों पर सीधे फायरिंग कर दी। सरकारी पक्ष का आरोप है कि घटना स्थल से संबंधित मुख्य चौक में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे जिसका कंट्रोल थाना सिटी में था। लेकिन पुलिस अधिकारियों ने उस दिन की फुटेज को ही नष्ट करवा दिया।
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एसआईटी ने किसी और व्यक्ति से मिली एक वीडियो फुटेज भी अदालत को दिखाई, जिसमें पुलिस द्वारा घटना के प्रमुख गवाह अजीत सिंह पर गोलियां चलाती दिख रही है। इसी गवाह के बयान पर पिछले साल 7 अगस्त को कोटकपूरा की घटना में अज्ञात पुलिस अधिकारियों पर इरादा- ए- कत्ल का केस दर्ज किया गया था। एसआईटी के दावे पर एतराज जताते हुए बचाव पक्ष के वकीलों ने भी अदालत को एक वीडियो दिखाई जिसमें प्रदर्शनकारी तलवारें लहरा रहे हैं और पुलिस पर हमला करने के मूड में दिख रहे हैं।