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युवक को चार दिन अवैध हिरासत में रखने पर पंजाब पर लगाया एक लाख जुर्माना, जानिए मामला
Sun, 19 May 2019 02:41 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Sun, 19 May 2019 02:41 PM IST
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एक निर्दोष को अवैध हिरासत में रखने और बाद में एफआईआर दर्ज करने के मामले में हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार पर एक लाख रुपये जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने जुर्माने की यह राशि चार सप्ताह के भीतर पीड़ित को बतौर मुआवजा दिए जाने के आदेश दिए हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि निर्दोष पर पुलिस की ज्यादती के मामले में जुर्माना लगाना बहुत जरूरी है।
इस मामले में पीड़ित के पिता ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। अगर मामला हाईकोर्ट तक नहीं पहुंचता तो पीड़ित किस मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजरता, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। ऐसे में पुलिस द्वारा की गई इस ज्यादती पर उसे दंडित किया जाना बेहद जरूरी है।
लुधियाना के मनप्रीत सिंह के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि 11 अप्रैल 2017 को मोबाइल चोरी के आरोप में पुलिस ने उसके बेटे को अवैध तरीके से हिरासत में ले लिया। हाईकोर्ट ने 13 अप्रैल 2017 को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्काल वारंट ऑफिसर नियुक्त कर थाने की जांच के आदेश दिए थे।
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इसके बाद हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल को सीजेएम को मामले की जांच के आदेश दे दिए थे। सीजेएम ने रिपोर्ट में कहा था कि पुलिस ने युवक को 11 अप्रैल को हिरासत में लिया था लेकिन उसके चार दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई, जो कि पूरी तरह से गलत है।
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इस मामले में पीड़ित के पिता ने हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। अगर मामला हाईकोर्ट तक नहीं पहुंचता तो पीड़ित किस मानसिक और शारीरिक पीड़ा से गुजरता, इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। ऐसे में पुलिस द्वारा की गई इस ज्यादती पर उसे दंडित किया जाना बेहद जरूरी है।
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लुधियाना के मनप्रीत सिंह के पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर बताया था कि 11 अप्रैल 2017 को मोबाइल चोरी के आरोप में पुलिस ने उसके बेटे को अवैध तरीके से हिरासत में ले लिया। हाईकोर्ट ने 13 अप्रैल 2017 को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्काल वारंट ऑफिसर नियुक्त कर थाने की जांच के आदेश दिए थे।
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इसके बाद हाईकोर्ट ने 28 अप्रैल को सीजेएम को मामले की जांच के आदेश दे दिए थे। सीजेएम ने रिपोर्ट में कहा था कि पुलिस ने युवक को 11 अप्रैल को हिरासत में लिया था लेकिन उसके चार दिन बाद एफआईआर दर्ज की गई, जो कि पूरी तरह से गलत है।
गिरफ्तारी का कारण भी नहीं साबित हुआ
पुलिस ने यह सब कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए किया था। पुलिस यह भी साबित नहीं कर पाई कि युवक को किस आधार पर गिरफ्तार किया गया। इसके बाद युवक ने एडवोकेट दमनजीत सिंह सिंह संधू के जरिये हाई कोर्ट में याचिका दायर कर अपने खिलाफ दर्ज की गई इस एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी।
पुलिस रवैये के लिए दंड जरूरी
जस्टिस सिंधु ने युवक की मांग को स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करते हुए कहा कि जिस तरह से पुलिस ने निर्दोष को फंसाने की कोशिश की है और मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया है उसके लिए दंड दिया जाना बेहद ही जरूरी है। लिहाजा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए यह राशि पीड़ित को मुआवजे के तौर पर सौंपने के आदेश दिए हैं।
पुलिस रवैये के लिए दंड जरूरी
जस्टिस सिंधु ने युवक की मांग को स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को खारिज करते हुए कहा कि जिस तरह से पुलिस ने निर्दोष को फंसाने की कोशिश की है और मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया है उसके लिए दंड दिया जाना बेहद ही जरूरी है। लिहाजा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए यह राशि पीड़ित को मुआवजे के तौर पर सौंपने के आदेश दिए हैं।