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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल का बड़ा बयान- किसान आंदोलन के बीच प्रदेश में नहीं होंगे पंचायत चुनाव

Tue, 02 Mar 2021 09:42 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 02 Mar 2021 09:42 PM IST
सार

  • मुख्यमंत्री बोले- वातावरण ठीक होने पर ही प्रदेश में पंचायत चुनाव संभव
  • कहा- दबाव के विषयों के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों का होता है हनन

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Panchayat elections will not be held in Haryana amid Kisan Andolan
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हरियाणा सरकार किसान आंदोलन के बीच पंचायत चुनाव नहीं कराएगी। आंदोलन से बने वातावरण के ठीक होने के बाद ही चुनाव कराने का निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव के लिए अभी वातावरण ठीक नहीं है। दबाव के विषय चले होने से लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन होता है। 

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जैसे ही वातावरण ठीक होगा, वैसे ही चुनाव कराएंगे। सीएम ने कहा कि पंचायतों का कार्यकाल 23 फरवरी को खत्म हो चुका है। पंचायतों में प्रशासक लगाए जा चुके हैं। विकास कार्यों में कोई दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। सरकार चुनावों के लिए तैयार है और नई पंचायतों का गठन भी किया जा चुका है।
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विकास एवं पंचायत विभाग के अनुसार अधिकतर पंचायतों ने प्रशासकों को रिकॉर्ड सौंप दिया है। कुछ पंचायतें रिकॉर्ड देने में आनाकानी कर रही हैं, अगर उन्होंने रिकॉर्ड नहीं सौंपा और जांच में गड़बड़ी पाई गई तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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किसानों के नाम से राजनीति न चमकाए विपक्ष

मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विपक्ष, किसानों के नाम से राजनीति न चमकाए। किसान भी राजनीतिक दलों के बहकावे में आकर आंदोलन न करें। केंद्र सरकार किसानों का हित चाहती है, उनकी आय दोगुना करने में लगी है।

सड़क पर धरना उचित नहीं, जनता को परेशानी नहीं होनी चाहिए। वर्तमान आंदोलन से जनता के अधिकारों का हनन हो रहा है। ऐसे फरमान जारी नहीं करने चाहिए जिनसे किसानों का नुकसान हो। फसल उजाड़ना व दूध के दाम 100 रुपये करना अनुचित है। 

किसानों को इतना न बहकाएं कि उनका आर्थिक नुकसान हो
उन्होंने कहा कि किसानों को इतना न बहकाएं कि आर्थिक तौर पर उनका नुकसान हो। फसल अच्छी होगी तो किसान को ही फायदा होगा और उपभोक्ताओं को अच्छा व उचित मूल्य पर खाद्यान्न मिलेगा। दूध जिस दाम पर बेचना है बेचें लेकिन उसे व्यर्थ न करें। पहले भी महंगे दामों पर दूध बेचने के वाकया हो चुके हैं। गलत फरमान जारी करने से अच्छा संदेश नहीं जाता।

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