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पंजाब में एक महीने के लिए टाले गए पंचायत चुनाव, अब अक्टूबर में होने के आसार

Sat, 04 Aug 2018 09:42 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 04 Aug 2018 09:42 AM IST
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Panchayat elections extended for one month in Punjab
सांकेतिक तस्वीर
पंजाब सरकार ने सूबे में पंचायत चुनाव को एक और माह के लिए टाल दिया है। अब चुनाव अक्तूबर माह के दौरान हो सकते हैं। इसका कारण यह बताया गया है कि सीटों के आरक्षण संबंधी नीति को अभी विधानसभा की मंजूरी नहीं मिल सकी है। पंजाब विधानसभा का आगामी सत्र सितंबर के दूसरे सप्ताह में बुलाए जाने की संभावना है। इसे देखते हुए विधानसभा सत्र के बाद ही पंचायत चुनाव की नई तिथि का एलान किया जाएगा।
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 इसके साथ ही, राज्य सरकार ने इस चुनाव में प्रत्याशियों के लिए डोप टेस्ट अनिवार्य करने का इरादा भी त्याग दिया है। पंचायत चुनाव के लिए प्रत्याशी का डोप टेस्ट कराना जरूरी नहीं होगा, हालांकि कोई प्रत्याशी अगर डोप टेस्ट कराना चाहे तो अपने खर्च पर करा सकता है।
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यह जानकारी शुक्रवार को सूबे के ग्रामीण विकास एवं पंचायत मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने दी। उन्होंने बताया कि आरक्षण संबंधी नियम बनाने में हो रही देरी के कारण ही चुनाव को आगे टाला गया है। वैसे पंचायत मंत्री ने चुनाव में 15 दिन की देरी होने की बात कही है लेकिन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चुनाव कराने में 15 दिन से एक महीने तक का समय लग सकता है। यह माना जा रहा है कि विधानसभा सत्र 8-9 सितंबर को आरंभ हो सकता है हालांकि इसकी तिथियों पर अभी फैसला नहीं लिया गया है।
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 विधानसभा में आरक्षण संबंधी नियम को मंजूरी देने के बाद ही इसे पंचायत चुनाव में लागू किया जा सकेगा। पंचायत चुनाव में महिलाओं उम्मीदवारों को 50 फीसदी सीटें दिए जाने के फैसले बारे बाजवा ने कहा कि अगर इस चुनाव में महिला प्रत्याशियों की गिनती निर्धारित 50 फीसदी के आंकड़े के अनुसार नहीं हो सकी तो प्रत्याशियों के बारे में नए सिरे से विचार किया जा सकता है।

डोप टेस्ट को लेकर राज्य सरकार द्वारा इरादा बदलने के पीछे के कारणों के बारे में पता चला है कि कांग्रेस हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस को इन चुनाव में डोप टेस्ट जैसी सख्ती बरतने से परहेज करने को कहा है। हाईकमान ने यह फार्मूला अगले चुनाव में लागू करने की सलाह दी है। पार्टी हाईकमान का मानना है कि अगर पंचायत चुनाव में डोप टेस्ट का विरोध हुआ तो उसका असर आगामी लोकसभा चुनाव पर भी पड़ सकता है।


उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने पंजाब में 30 सितंबर को पंचायत चुनाव कराने का ऐलान किया था। उसके बाद 11 जुलाई को प्रदेश की सभी पंचायतों के भंग करके प्रबंधक नियुक्त कर दिए गए थे।
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