पलसौरा बेबी मर्डर केस में महिला समेत 3 दोषी करार
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नवंबर 2013 में पलसौरा में 11 वर्षीय बच्ची की अपहरण के बाद निर्मम हत्या के मामले में मंगलवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंशु शुक्ला की कोर्ट ने तीन को आपराधिक धाराओं में दोषी करार दिया। वहीं, नाबालिग आरोपी जुवेनाइल होम से पिछले वर्ष सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर भाग गया था। उसे इसी वर्ष अदालत ने भगोड़ा करार दिया था।
अन्य दोषियों में पलसौरा का भगत उर्फ मंगा (25), सुनीता उर्फ बिल्ली (32) और रोपड़ का राजकुमार उर्फ राजा (23) शामिल हैं, जबकि नाबालिग आरोपी मूलरूप से फैजाबाद का रहने वाला है। तीनों दोषियों को 28 अगस्त को सजा सुनाई जाएगी। वहीं, दोषी करार दिए जाने के बाद सुनीता कोर्ट रूम में ही बेहोश हो गई। बाद में उसे दो महिला कांस्टेबल पकड़कर बक्शीखाने ले गईं।
ये है पूरा मामला
सेक्टर-54 के सरकारी स्कूल में छठवीं में पढ़ने वाली और पलसौरा निवासी 11 वर्षीय बच्ची 27 नवंबर 2013 की शाम चार बजे घर से खेलने के लिए निकली थी। वह घर से 20 रुपये लेकर सहेली के पास जाने की बात कह कर गई थी। देर शाम तक जब बेटी वापस नहीं आई तो परिजनों ने उसकी तलाश की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। इसके बाद उन्होंने सेक्टर-39 थाने में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई। बच्ची के पिता पलसौरा में ही सब्जी बेचते थे। वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रहने वाले हैं।
बोरे में मिला था बच्ची का शव
चार दिन बाद 1 दिसंबर 2013 की शाम बच्ची का लहूलुहान शव सेक्टर-52 की फर्नीचर मार्केट के पास जंगली इलाके में बोरी में बंद मिला। इसके बाद गुस्साएं लोगों ने खूब हंगामा किया और पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पलसौरा रोड पर जाम लगा दिया।
गुस्साई भीड़ ने पुलिस पर आरोप लगाया था कि खुशप्रीत मामले से भी उन्होंने कोई सबक नहीं सीखा और बच्ची को तलाशने में वैसी ही लापरवाही बरती। इसी कारण बच्ची की जान गई। साथ ही शव भी पुलिस ने नहीं बल्कि एक राहगीर ने तलाश किया। बच्ची के गले में प्लास्टिक की रस्सी लिपटी थी और गला दबाने के निशान थे। उसके मुंह और कपड़ों पर खून लगा था।
डेढ़ महीने बाद हुआ खुलासा
20 जनवरी 2014 को चंडीगढ़ पुलिस की साइबर सेल टीम सेक्टर-17 थाने में धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, जालसाजी तथा आईटी एक्ट की धाराओं के तहत दर्ज एक मामले में राजकुमार और एक नाबालिग को पंजाब पुलिस से प्रोडक्शन वारंट पर लाई थी। उन पर पटियाला सेंट्रल जेल से कार्ड क्लोनिंग का केस दर्ज था। यहां पूछताछ में उन्होंने बच्ची की हत्या की बात कबूली।
उन्होंने बताया था कि पिंकी का अपहरण करने के बाद दुष्कर्म कर उसकी हत्या कर दी गई थी। साथ ही वारदात में उन्होंने पलसौरा की सुनीता और भगत के नामों का भी खुलासा किया था। इसके बाद 23 जनवरी 2014 को सुनीता और भगत की भी गिरफ्तारी की गई। वहीं राजकु मार और जुवेनाइल के खिलाफ डेराबस्सी में एक एटीएम सिक्योरिटी गार्ड की हत्या का केस दर्ज था।
बचाव पक्ष की ओर से दी गई दलील
दोषी करार दिए जाने के बाद बचाव पक्ष ने कहा कि मामले में पुलिस के पास कोई ठोस सबूत नहीं था। केवल राजकुमार और एक जुवेनाइल के कथित कबूलनामे के आधार पर संगीन आरोप लगाए गए। मामले में आरोपियों ने जिस प्रापर्टी डीलर के सामने कबूलनामा किया, वह अदालत में मुकर गया था।
वहीं, अदालत में इंस्पेक्टर जसबीर सिंह ने सुनीता और भगत को पहचानने से इंकार कर दिया था। इसके अलावा सीएफएसएल रिपोर्ट में भी आरोपियों का डीएनए मैच नहीं हुआ था। बचाव पक्ष ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर करने की बात कही है।
मोबाइल कॉल की डिटेल बनी सबूत
राजकुमार और नाबालिग आरोपी वारदात के समय पलसौरा में रह रहे थे। पुलिस के अनुसार दोनों की गिरफ्तारी के दौरान इनके नशेड़ी प्रवृत्ति का पता चला। इन दोनों के कबूलनामे के बाद सुनीता और भगत की गिरफ्तारी हुई। आरोप के मुताबिक, रंजिश के कारण सुनीता ने भगत समेत राजकुमार और जुवेनाइल के जरिए संबंधित अपराध को अंजाम दिया था।
पुलिस ने मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर मोबाइल की काल डिटेल्स भी निकलवाई थी। बच्ची के अपहरण से लेकर उसकी हत्या तक के समय के बीच दो मोबाइल फोन नंबर सामने आए थे। उन्हें फर्जी आईडी से खरीदा गया था। इस जानकारी के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची।
आरोपियों ने बच्ची को अपहृत कर पलसौरा के पास सेक्टर-52 के जंगली क्षेत्र में कैद कर रखा था। वहां शराब के नशे में उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया गया। अपहरण के दो दिन बाद बच्ची की रस्सी से गला घोंट हत्या कर दी गई और उसे एक बोरी में बांध कर फेंक दिया गया। 27 नवंबर 2013 को अपहृत बच्ची का शव एक दिसंबर को फर्नीचर मार्केट के पास जंगली क्षेत्र से बरामद किया गया।
खुशप्रीत हत्याकांड के बाद दूसरी बड़ी घटना
2010 में बुड़ैल में 5 वर्षीय बच्चे खुशप्रीत की अपहरण व हत्या के बाद यह सबसे दुखद और चर्चित घटना थी। खुशप्रीत हत्याकांड के दौरान लोगों ने रोष प्रदर्शन किया था। उस वक्त डीएसपी, थाना-34 के तत्कालीन प्रभारी और बुड़ैल चौकी इंचार्ज पर इसकी गाज गिरी थी। पड़ोस के दो भाइयों ने नौकर के साथ मिल खुशप्रीत की हत्या की थी।
दो बार बेहोश हुई सुनीता
दोषी करार दिए जाने के बाद जैसे ही पुलिस ने सुनीता को अपनी कस्टडी में लिया वह कोर्ट रूम में रोते-रोते बेहोश हो गई। थोड़ी देर में होश में आने पर उसे कोर्ट रूम से बाहर लाया गया। वहां अपने बच्चों से लिपटकर रोती रही और गिरकर फिर बेहोश हो गई। इसी बीच महिला पुलिसकर्मियों को बुलाया गया और उसे बक्शीखाने ले जाया गया।
टाइम लाइन
27 नवंबर 2013 शाम 4:00 से 6:00 बजे के बीच हुआ बच्ची का अपहरण
30 नवंबर 2013 को दोपहर 2:00 से रात दो बजे के बीच किसी समय हुई हत्या (पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार)
01 दिसंबर 2013 को शाम 6:00 बजे के करीब सेक्टर-52 की फर्नीचर मार्केट के पास बोरे में बंद मिला शव
इन धाराओं में पाया दोषी
सुनीता- अपहरण, हत्या, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश रचने की धाराओं में दोषी करार
राजकुमार और भगत- अपहरण, हत्या, सबूत मिटाने, आपराधिक साजिश रचने, दुष्कर्म और पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत दोषी करार
नाबालिग आरोपी- भगोड़ा करार