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पद्मश्री और अर्जुन अवार्डी जीव मिल्खा सिंह ने कहा कि मां- पिता के सपोर्ट और स्कूल से मिले अनुशासन ने बनाया पेशेवर गोल्फर
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चंडीगढ़। पद्मश्री और अर्जुन अवार्डी जीव मिल्खा सिंह कोरोना महामारी के चलते इन दिनों भले ही इंटरनेशनल टूर्नामेंट नहीं खेल पा रहे हों, लेकिन वह गोल्फ को काफी मिस कर रहे हैं। जीव मिल्खा सिंह को दो बार के एशियन टूर ऑर्डर ऑफ मेरिट चैंपियन, भारत के सबसे सफल पेशेवर गोल्फर के रूप में माना जाता है।
वे दिन दिनों घर पर ही अधिकतर समय बिता रहे हैं और चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में अभ्यास के लिए भी जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने की प्ररेणा उन्हें पिता मिल्खा सिंह से मिली। वहीं अनुशासन में रहना बोर्डिंग स्कूल में (बिशप कॉटन, शिमला) से सीखा, जहां से उन्होंने अपनी पढ़ाई की। जीव ने कहा कि पिता मिल्खा सिंह धावक और मां निर्मल मिल्खा सिंह वॉलीबाल की खिलाड़ी रही हैं। इसलिए खेलों के प्रति शुरू से ही लगाव होता चला गया। जीव मिल्खा सिंह के बेहतर प्रदर्शन की बदौलत ही उन्हें 1999 में अर्जुन पुरस्कार और 2007 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
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वे दिन दिनों घर पर ही अधिकतर समय बिता रहे हैं और चंडीगढ़ गोल्फ क्लब में अभ्यास के लिए भी जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने की प्ररेणा उन्हें पिता मिल्खा सिंह से मिली। वहीं अनुशासन में रहना बोर्डिंग स्कूल में (बिशप कॉटन, शिमला) से सीखा, जहां से उन्होंने अपनी पढ़ाई की। जीव ने कहा कि पिता मिल्खा सिंह धावक और मां निर्मल मिल्खा सिंह वॉलीबाल की खिलाड़ी रही हैं। इसलिए खेलों के प्रति शुरू से ही लगाव होता चला गया। जीव मिल्खा सिंह के बेहतर प्रदर्शन की बदौलत ही उन्हें 1999 में अर्जुन पुरस्कार और 2007 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।
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