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Hindi News ›   Chandigarh ›   Padma Awards 2019, Padma Shri Award to Narender Singh of Haryana to Preserve Murrah Breed

एक शख्स, जिसने पशुओं की देखभाल करते-करते कर दिया ऐसा काम, सरकार दे रही पद्मश्री अवार्ड

Tue, 29 Jan 2019 09:15 AM IST
खुशबू गोयल कुलदीप सिंह आर्य, अमर उजाला, इसराना(पानीपत)
कुलदीप सिंह आर्य, अमर उजाला, इसराना(पानीपत) Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 29 Jan 2019 09:15 AM IST
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Padma Awards 2019, Padma Shri Award to Narender Singh of Haryana to Preserve Murrah Breed
नरेंद्र सिंह को मिलेगा पद्मश्री अवार्ड
मिलिए उस शख्स से, जिसने पशुओं की देखभाल करते-करते ऐसा काम कर दिया, जिसे आज तक कोई न कर पाया। अब इन्हें भारत सरकार पद्म अवार्ड से सम्मानित करने जा रही है।
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पानीपत जिले के इसराना में गांव डिडवाडी निवासी नरेंद्र सिंह द्वारा मुर्रा व साही वाल नस्ल को संरक्षित करने पर सरकार उन्हें पद्म श्री अवॉर्ड देगी। नरेंद्र सिंह ने अमर उजाला को बताया कि बचपन से उसे पशुओं की देखभाल व लगाव के शौक था। उसका घर पर बीतने वाला ज्यादातर समय पशुओं की बेहतर ढंग से देखभाल करने लगता था। चूंकि वह किसान के साथ पंचायत विभाग में ग्राम सचिव भी है।
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ड्यूटी के बाद पशुओं की देखभाल के समय यही प्रयास रहता था कि कुछ लीक से हट कर किया जाए। करीब 20 साल पहले नरेंद्र सिंह ने दस पशुओं के साथ गांव में अपने प्लॉट पर डेयरी की शुरूआत की थी। अब भैंस, झोटे व सांड़ समेत आज उनकी डेयरी फार्म पर करीब 150 पचास पशु हैं। उसे वर्ष 2013 व 2015 में राष्ट्रीय अवॉर्ड, 2017 में गोपाल रतन अवार्ड व वर्ष 2018 में मुर्रा रतन अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है।
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विदेशी प्रतिनिधि भी आए थे पशुपालन तकनीक जानने को

मुर्रा नस्ल का झोटा घोलू, प्रिंस व शहंशाह समेत भैंसों की ख्याति देश भर के अलावा विदेशों में छाने के बाद करीब पांच वर्ष पहले उनकी डेयरी पर कोलंबिया के राजकुमार समेत कई देशों के प्रतिनिधियों ने विजिट कर पशुपालन की तकनीक को नजदीक से जाना था। उनकी डेयरी के हरियाणा साहिवाल सांड़ नंदी व मुर्रा नस्ल की भैंस प्रतियोगिताओं में प्रथम रह कर चैंपियन बनी व झोटा शहंशाह दूसरे स्थान पर रहा है।

पच्चीस करोड़ी शहंशाह रहा चर्चा में
पशु पालक नरेंद्र सिंह ने बताया कि करीब 10 साल पहले उसके मुर्रा नस्ल के झोटे घोलू ने धूम मचाई थी बाद में प्रिंस व अब शहंशाह चर्चा में है। नरेंद्र सिंह ने बताया कि उसके झोटे शहंशाह को खरीदने के लिए देश के अलावा बाहर से भी लोग आए। कीमत पच्चीस करोड़ भी लगाई लेकिन उन्होंने बेचने से मना कर दिया। तभी से शहंशाह पच्चीस करोड़ी के नाम से चर्चा में है।  

घाटे का काम नहीं है पशुपालन व्यवसाय: नरेंद्र सिंह
पशु पालक नरेंद्र सिंह ने बताया कि पशु पालन व्यवसाय को अगर बदलते समय की तकनीक के साथ अपेडेट रह कर किया जाए तो पशु पालन कभी भी घटे का सौदा साबित नही हो सकता।
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