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पीयू शिक्षकों के कैश प्रमोशन में देरी करने पर जताया आक्रोश, पुटा के पूर्व अध्यक्ष व सचिव ने वीसी को भेजा पत्र
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चंडीगढ़। शिक्षकों के कैश प्रमोशन में पीयू प्रशासन द्वारा देरी किए जाने पर पुटा के पूर्व पदाधिकारियों ने आक्रोश जाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि अब बिना देरी किए इन पर काम किया जाए अन्यथा की स्थिति में शिक्षक धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
पुटा की पूर्व अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल व सचिव प्रो. जेके गोस्वामी ने वीसी को पत्र लिखकर कहा है कि पिछले साल फरवरी में यह मुद्दा उठाया गया था जो अक्तूबर आते-आते कुछ आगे बढ़ा। उसी दौरान आंदोलन की चेतावनी दी थी, लेकिन कुछ ही कार्य इस दिशा में हो पाया। शिक्षक समाज इसका इंतजार करता रहा। पीयू प्रशासन लगातार देरी कर रहा था। कई बार इसको लेकर पत्र लिखे गए, लेकिन एक नहीं सुनी गई। इस प्रमोशन के साक्षात्कार आदि कार्य ऑनलाइन भी हो सकते थे। इसके लिए भी हमने मांग उठाई थी। लगातार इस कार्य में देरी से शिक्षकों में उबाल है। इस दिशा में अब जल्द से जल्द कदम उठाए जाएं।
पास्ट सर्विस काउंट का मुद्दा क्यों भूले
खालिद-सिद्धू ग्रुप ने कहा कि अब चुनाव आए हैं तो वायदे याद आ रहे हैं। कैश प्रमोशन पिछले साल अक्तूबर से लेकर मार्च तक आसानी से हो सकते थे, लेकिन इसके लिए धरना नहीं दिया गया। धरना होता तो आज यह नौबत नहीं आती। पास्ट सर्विस काउंट से लेकर सातवें वेतनमान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को क्यों भूला जा रहा है। उनके लिए धरना क्यों नहीं दिया जा रहा।
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पुटा की पूर्व अध्यक्ष प्रो. राजेश गिल व सचिव प्रो. जेके गोस्वामी ने वीसी को पत्र लिखकर कहा है कि पिछले साल फरवरी में यह मुद्दा उठाया गया था जो अक्तूबर आते-आते कुछ आगे बढ़ा। उसी दौरान आंदोलन की चेतावनी दी थी, लेकिन कुछ ही कार्य इस दिशा में हो पाया। शिक्षक समाज इसका इंतजार करता रहा। पीयू प्रशासन लगातार देरी कर रहा था। कई बार इसको लेकर पत्र लिखे गए, लेकिन एक नहीं सुनी गई। इस प्रमोशन के साक्षात्कार आदि कार्य ऑनलाइन भी हो सकते थे। इसके लिए भी हमने मांग उठाई थी। लगातार इस कार्य में देरी से शिक्षकों में उबाल है। इस दिशा में अब जल्द से जल्द कदम उठाए जाएं।
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पास्ट सर्विस काउंट का मुद्दा क्यों भूले
खालिद-सिद्धू ग्रुप ने कहा कि अब चुनाव आए हैं तो वायदे याद आ रहे हैं। कैश प्रमोशन पिछले साल अक्तूबर से लेकर मार्च तक आसानी से हो सकते थे, लेकिन इसके लिए धरना नहीं दिया गया। धरना होता तो आज यह नौबत नहीं आती। पास्ट सर्विस काउंट से लेकर सातवें वेतनमान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को क्यों भूला जा रहा है। उनके लिए धरना क्यों नहीं दिया जा रहा।
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