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वेदों से पहले की है हमारी संस्कृति : पुरोहित

Mon, 03 Apr 2023 02:00 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 03 Apr 2023 02:00 AM IST
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Our culture is before the Vedas: Purohit
चंडीगढ़। भारत की संस्कृति महान और पुरानी है। हमारी संस्कृति वेदों से पहले की है। वेद करीब तीन से पांच हजार वर्ष पहले की है। यह विद्वानों का मत है। हमारी संस्कृति आज भी कायम है। हमारी संस्कृति को खत्म करने की बहुत कोशिश हुई। मुगलों में मंदिरों को तोड़ा, लेकिन हमारी संस्कृति को नष्ट नहीं कर पाए। हमारी संस्कृति धर्म पर आधारित है। यह बात पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने कही। वे रविवार को सेक्टर-15 के रामकृष्ण मिशन आश्रम के 125 वर्ष पूरे होने पर आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक समारोह के अंतिम दिन श्रीरामकृष्ण के जीवन और शिक्षा विषय पर बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम के सचिव स्वामी नरसिम्हा नंद ने की। पिंजौर संत विवेकानंद मिलेनियम स्कूल के प्रिंसिपल पीयूष पुंज ने भी श्रीरामकृष्ण के जीवन और शिक्षा पर अपने विचार रखे। बनवारीलाल पुरोहित ने कहा कि त्रेता युग में गुरु वशिष्ठ और विश्वामित्र थे। उस समय भी उनका सम्मान था। आज हम यहां पर देख रहे हैं स्वामी नरसिम्हानंद और स्वामी अनुपमा नंद के रूप में। हम सभी यहां पर आए हैं। वही प्रेम और वही आदर है।
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उन्होंने कहा कि श्रीरामकृष्ण को अद्भुत शक्ति प्राप्त थी। उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा कि इन्हें जरूर पढ़ें, आप सभी में परिवर्तन आएगा। आध्यात्म और भगवान पर विश्वास करिए। उन्होंने कहा कि रामकृष्ण जी ने विवेकानंद को अपना उत्तराधिकारी बनाया।
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भारत विश्व गुरु बनेगा
पुरोहित ने कहा कि भारत विश्वगुरु बनेगा। कोई रोक नहीं सकता। फरिश्ते उतरकर नहीं आएंगे। विश्वगुरु बनने के लिए यही लोग करेंगे। इनसे सीखिए और मिशन से जुड़ जाइए। आपकी व्यक्तित्व में चमक आएगी। तब हमारा देश आगे बढ़ जाएगा। उन्होंने जापान और भारत के बारे में कहा कि जापान कितना आगे बढ़ गया। उन्होंने कहा कि सच्चाई से चलेंगे तो कुछ भी असंभव नहीं है। साधारण जीवन जीना चाहिए। देखा देखी न करें।
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जब चुनाव हारा तो पिता ने दी प्रेरणा
एक बार आठ हजार वोट से चुनाव हार गया। पिता ने बुलाया और पूछा दुखी है। तब मैंने कहा कि चुनाव हार गया हूं। उसके बाद पिता ने कहा कि जो लिखा है वहीं होगा। चिंता मत करो। आगे बढ़ो। पिता ने प्रेरणा दी।
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