फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   OT sheet being washed near Bio Medical Waste in pgi chandigarh, corona virus

पीजीआई चंडीगढ़ में ये क्या हो रहा है...बायो मेडिकल वेस्ट के पास धुल रहीं ओटी की चादरें-कपड़े

Wed, 18 Mar 2020 10:09 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 18 Mar 2020 10:09 AM IST
विज्ञापन
OT sheet being washed near Bio Medical Waste in pgi chandigarh, corona virus
पीजीआई लॉन्ड्री सेक्शन - फोटो : अमर उजाला
चंडीगढ़ पीजीआई में ये हो क्या रहा है.. देशभर के मरीज बेहतर इलाज की उम्मीद लिए यहां आते हैं, लेकिन उन्हें खतरनाक वातावरण में इलाज दिया जा रहा है। मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए बायो मेडिकल वेस्ट के सामने ओटी और आइसोलेशन वार्ड की चादर धुल रही हैं। इस समय पूरे विश्व में कोरोना का खौफ छाया हुआ है। आइसोलेशन वार्ड में कोरोना के संदिग्ध मरीजों को भर्ती किया जा रहा है। उस वार्ड में भी बायो मेडिकल वेस्ट के पास धुली जाने वाली चादरें बिछाई जा रही हैं। इधर, कोरोना वायरस से बचाव के लिए डॉक्टर साफ सफाई बरतने की सलाह दे रहे हैं।
विज्ञापन


मौजूदा हालात में भी हर दिन 10 से 15 हजार लोग पीजीआई में आ रहे हैं। इसके बावजूद बायो मेडिकल वेस्ट जैसे जहर को खुले में डंप किया जा रहा है। उसके पास ऑपरेशन थियेटर, आइसोलेशन वार्ड के चादर और मरीजों के कपड़े धुले जा रहे हैं। स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि पीजीआई कर्मचारी भी इसे लेकर कई बार विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं। मानवाधिकार आयोग भी जवाब-तलब कर चुका है, लेकिन स्थिति जस की तस है। मंगलवार को अमर उजाला की ओर से की गई पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आएं-
विज्ञापन


सीन- 1: पीजीआई की लॉन्ड्री में धुलाई के बाद चादर, ओटी के ड्रेस और मरीजों के कपड़े सुखाये जा रहे थे। सामने स्थित डंपिंग ग्राउंड में बायोमेडिकल वेस्ट का अंबार लगा था। हर आधे घंटे में वहां बायो मेडिकल वेस्ट लाकर डंप किया जा रहा था। दुर्गंध के चलते वहां एक मिनट भी रूकना मुश्किल हो रहा था। बीच-बीच में चल रही तेज हवा से डंपिंग एरिया से धूल और गंदगी उड़कर लॉन्ड्री में फैलाये गये कपड़ों पर जा रही थी। जैसे-जैसे कपड़े सूख रहे थे कर्मचारी उसे झाड़कर तह करता जा रहा था।
विज्ञापन
विज्ञापन


सीन- 2: नेहरू एक्सटेंशन ब्लॉक के पास स्थित सेंट्रल रिफ्यूज स्टेशन के सामने भी बायो मेडिकल वेस्ट रखा हुआ है। अलग-अलग वार्ड से एकत्र बायो मेडिकल वेस्ट पहले यहां एकत्र किया जाता है। यहां से अलग करने केबाद उसे डंपिंग ग्राउंड में भेजा जाता है। इस स्थान के आसपास कई गंभीर यूनिट स्थित हैं। कूड़े से सटे बिल्डिंग में ऊपर मरीजों के लिए भोजन पक रहा था। किचन की खिड़की भी कूड़े वाले साइड खुली हुई थी। पास में ही डायलिसिस यूनिट, आईसीयू, बोनमैरो ट्रांसप्लांट सेंटर और रिनल ट्रांसप्लांट यूनिट की बिल्डिंग भी है, जहां मास्क लगाये सुरक्षा गार्ड ड्यूटी कर रहा था।

वाह री व्यवस्था.. कूड़ा नीचे ऊपर पक रहा मरीजों के लिए भोजन

नेहरू अस्पताल एक्सटेंशन बिल्डिंग के बगल में सेंट्रल रिफ्यूज स्टेशन के पास डेली डंप किये जाने वाले वेस्ट के पास स्थित बिल्डिंग के चौथे तल पर मरीजों के लिए भोजन बनाया जा रहा है। इसे लेकर किचन का स्टाफ भी कई बार शिकायत कर चुका है। उनका कहना है कि तेज हवा के दौरान वेस्ट से उठने वाली दुर्गंध के बीच वहां काम करना मुश्किल है।

व्यवस्था धड़ाम.. किडनी के मरीजों के बगल में भी कूड़ा
पीजीआई की व्यवस्था इस कदर बिगड़ चुकी है कि यहां भर्ती बेहद गंभीरमरीजों की सेहत को भी नजरअंदाज किया जाने लगा है। इसका ही परिणाम है कि सेंट्रल रिफ्यूज स्टेशन के पास ही डायलिसिस यूनिट, आईसीयू, बोनमैरो ट्रांसप्लांट सेंटर और रिनल ट्रांसप्लांट यूनिट के बगल में बायो मेडिकल वेस्ट रखा जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि बेहद कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले इन मरीजों को बायो मेडिकल वेस्ट जैसे जहर के पास भर्ती किया जा रहा है।

जल्द तलाशेंगे समस्या का समाधान
बायो मेडिकल वेस्ट को ले जाने के लिए बंद वाहनों की खरीद की जा चुकी है। डंपिंग ग्राउंड को कहीं दूर शिफ्ट करने को लेकर भी प्रयास जारी है। लेकिन कोई स्थान तय नहीं हो पा रहा है। शीघ्र इस समस्या का समाधान तलाश लिया जाएगा।
- डॉ. अशोक कुमार, पीजीआई प्रवक्ता

पांच साल से बायो मेडिकल वेस्ट कर रहा निस्तारण का इंतजार

- 29 जून 2015 को मानवाधिकार आयोग में इस संबंध में शिकायत की गई
- 23 जुलाई 2015 को इसकी पहली सुनवाई हुई
- 24 अगस्त 2016 को आयोग ने पीजीआई को मामले में उचित कार्रवाई करते हुए उसकी रिपोर्ट चार हफ्ते के अंदर देने का आदेश दिया
- 12 जुलाई 2017 क ो आयोग ने पीजीआई को इस संबंध में दोबारा निर्देश दिया
- आदेश को पूरा करने के क्रम में पीजीआई ने जांच कमेटी गठित की
- 4 सितंबर 2017 को पीजीआई से भेजी गई रिपोर्ट को स्वास्थ्य मंत्रालय ने आयोग को भेजा
- 7 मई 2019 मेंआयोग ने पुन: मामले का संज्ञान लेते हुए 6 हफ्ते के अंदर वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट मांगी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed