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Chandigarh News: बीमा कंपनी को 1.10 लाख रुपये देने के आदेश

Mon, 10 Jun 2024 06:17 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Jun 2024 06:17 AM IST
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Order to pay Rs 1.10 lakh to the insurance company
चंडीगढ। कोयंबटूर से माल लेकर उत्तराखंड जा रहे ट्रक के औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में साल 2018 में सड़क हादसे में क्षतिग्रस्त होने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ याचिकाकर्ता को 1.10 लाख रुपये ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। ट्रक मालिक ने मरम्मत पर खर्च 3 लाख रुपये के बिल इंश्योरेंस कंपनी को भेजे थे लेकिन कंपनी ने 1.28 लाख रुपये ही पास किया। अब आयोग ने मामले की सुनवाई के बाद इंश्योरेंस कंपनी को 1.10 लाख रुपये 9 प्रतिशत ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता प्रभ कमल ने बताया कि उन्होंने अपने ट्रक का बीमा 15 दिसंबर 2017 से 14 दिसंबर 2018 तक 15 लाख 48 हजार 500 रुपये में आईडीवी के साथ किया था। ट्रक कोयंबटूर से उत्तराखंड में माल पहुंचाने के लिए जा रहा था लेकिन औरंगाबाद में 4 मई 2018 को सड़क हादसा हो गया। हादसे में ट्रक का केबिन पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। उक्त दुर्घटना में हेल्पर को गंभीर चोटें आई थीं। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। इस बारे में उन्होंने बीमा कंपनी श्रीराम जनरल इंश्योरेंस लुधियाना और राजस्थान के साथ संपर्क किया। कंपनी की ओर से सर्वेक्षक को नियुक्त किया गया, जिसने औरंगाबाद में मौके पर क्षतिग्रस्त ट्रक का निरीक्षण किया। इसके बाद ट्रक को पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया और शिकायतकर्ता की ओर से स्थानीय अदालत से 28 मई 2018 के आदेश के तहत उसे छुड़वाया गया। ट्रक को मरम्मत के लिए स्थानीय एजेंसी में ले जाया गया, जहां इसकी मरम्मत का खर्च 9 लाख 17 हजार 587 रुपये बताया गया। लेकिन वह इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थ था। इसी कारण वह ट्रक को पंजाब में मरम्मत के लिए मोगा ले गया, जहां करीब मरम्मत पर तीन लाख रुपये खर्च हुए। उसने इंश्योरेंस कंपनी में मरम्मत करवाने के तीन लाख रुपये के बिल भेज दिए लेकिन कंपनी ने केवल 1.28 लाख 406 रुपये का ही बिल पास किया और 1.10 लाख रुपये का बिल रोक लिया। इसके बाद आयोग में याचिका दायर की गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अब शनिवार को जारी आदेशों में फोरम ने 29 मार्च 2023 से 9 प्रतिशत प्रतिवर्ष ब्याज के साथ शिकायतकर्ता को 1 लाख 10 हजार 94 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिए। इसके साथ ही मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए मुआवजे के रूप में शिकायतकर्ता को 30 हजार और मुकदमेबाजी की लागत के रूप में शिकायतकर्ता को 10 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया।
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