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Chandigarh News: बिजली दर बढ़ोतरी का विरोध... सवाल उठा-200 करोड़ के फायदे से घाटे में कैसे आ गए

Sat, 26 Jul 2025 01:38 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 26 Jul 2025 01:38 AM IST
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Opposition to hike in electricity rates... question raised- how did a profit of 200 crores go into loss
चंडीगढ़। चंडीगढ़ पावर डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (सीपीडीएल) की ओर से प्रस्तावित बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर शहरवासियों में भारी विरोध देखने को मिला। शुक्रवार को सेक्टर-10 स्थित आर्ट व म्यूजियम गैलरी में जॉइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जेईआरसी) के सामने हुई सुनवाई में राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संघों और रेजिडेंट वेलफेयर सोसाइटियों ने एक स्वर में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अधिकांश शहरवासियों का तर्क है कि जब सीपीडीएल को बिजली वितरण का जिम्मा सौंपा गया था तब विभाग 200 करोड़ रुपये से अधिक के मुनाफे में था, अचानक इतना बड़ा घाटा दिखाकर दरें बढ़ाने का औचित्य समझ से बाहर है।
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पहले काम करके दिखाएं, फिर बात करें
विरोध कर रहे लोगों ने साफ-साफ कहा कि सीपीडीएल को कम से कम दो साल तक अपनी कार्यक्षमता साबित करनी चाहिए। उसके बाद ही दरों में बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव स्वीकार किया जाना चाहिए। हॉल में मौजूद सभी लोगों ने हाल के दिनों में शहर की चरमराई बिजली व्यवस्था पर जताई। उनका कहना था कि बिजली कटौती व अन्य समस्याओं से लोग परेशान हैं। ऐसे में दरों में वृद्धि करना स्वीकार्य नहीं है।
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जनता पर सीधा आर्थिक हमला : आप
आम आदमी पार्टी (आप) चंडीगढ़ ने 12 प्रतिशत बिजली दर वृद्धि को जनता पर सीधा आर्थिक हमला बताया। पार्टी के राज्य मीडिया प्रभारी विक्रांत ए तंवर ने कहा कि साल 2020-21 में बिजली विभाग ने 258.85 करोड़ रुपये का लाभ कमाया था लेकिन अब निजी कंपनी 2025-26 में 158.01 करोड़ रुपये का घाटा और अगले पांच साल में 982 करोड़ रुपये का घाटा दिखा रही है। आप ने इसकी स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की है। इसके साथ चेतावनी दी है कि यदि सीपीडीएल सेवा नहीं दे सकती, तो सरकार को बिजली विभाग फिर से अपने हाथों में लेना चाहिए।
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बढ़ोतरी हुई तो जन आंदोलन होगा : कांग्रेस
कांग्रेस पार्टी ने भी इस प्रस्तावित वृद्धि का कड़ा विरोध किया है। पार्टी सचिव अजय कुमार सहित कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने इसे निजी कंपनी की ओर से जनता के पैसों की खुली लूट बताते कहा है कि निजीकरण के बाद बिजली विभाग का प्रदर्शन औसत से भी कम रहा है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष एचएस लक्की ने कहा कि यदि जेईआरसी इस वृद्धि को मंजूरी देता है तो कांग्रेस पार्टी पूरे शहर में व्यापक आंदोलन शुरू करेगी।

लाइन लॉस कम कर मुनाफा बढ़ाने का सुझाव

बिजली विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर एएस गुलाटी ने प्रस्तावित बढ़ोतरी को गलत बताते कहा कि चंडीगढ़ में वर्तमान लाइन लॉस करीब 12 प्रतिशत है जो शहरी क्षेत्र के लिए काफी अधिक है। उन्होंने सुझाव दिया कि इसे 5 से 8 फीसदी के बीच लाया जाना चाहिए, जिससे कंपनी 4 प्रतिशत लाइन लॉस कम करके अपना मुनाफा बढ़ा सकती है।

सुनवाई के दौरान उठीं प्रमुख मांगें
फिक्स चार्ज बढ़ाने के बजाय कम किया जाए क्योंकि कई घरों में महीनों बिजली का उपयोग नहीं होता।

बारिश आते ही कई सेक्टरों में घंटों बिजली कट जाती है और छोटी-छोटी कटौती भी परेशान करती है।

शहर के कई इलाकों में तारों का जाल फैला हुआ है, शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती।

हेल्पलाइन नंबर पर घंटों इंतजार के बाद भी बात नहीं हो पाती।

गैर-आवासीय बिजली के दरों को कम किया जाए, जो बहुत अधिक बढ़ा दिए गए हैं।

कंपनी पहले बेहतर काम दिखाए, उसके बाद ही दरों में वृद्धि का प्रस्ताव लाए।


इन लोगों ने विरोध में रखी अपनी बात
सीपीडीएल की ओर से प्रस्तावित बिजली दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ सुनवाई के दौरान पार्षद हरदीप सिंह, कजहेड़ी निवासी शकील मोहम्मद, चंडीगढ़ व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजीव चड्ढा व चेयरमैन चरणजीव सिंह, आरएस गुजराल, मनमोहन सिंह, अजय कुमार सहित कई प्रमुख नागरिक शामिल थे।

उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ
यदि यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो 500 यूनिट तक की खपत वाले उपभोक्ता को लगभग 166 रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे। वर्तमान में 500 यूनिट खपत पर 2182 रुपये का बिल आता है जो नई दरों के अनुसार बढ़कर 2348 रुपये हो जाएगा। शहर में लगभग 60,000 ऐसे बिजली उपभोक्ता हैं जिन पर बढ़ी हुई दरों का सबसे अधिक असर पड़ेगा क्योंकि 400 यूनिट से अधिक बिजली इस्तेमाल करने वालों के लिए दरें सबसे ज्यादा रखी गई हैं। वर्तमान में 400 यूनिट खपत करने वाले उपभोक्ताओं को हर महीने लगभग 1612 रुपये देने पड़ते हैं लेकिन नई दरें लागू होने के बाद यह बिल 1755 रुपये हो जाएगा।
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