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Chandigarh News: खुले दरवाजे, ओवरलोड बस... आयोग ने लिया संज्ञान
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चंडीगढ़। शहर में स्कूली बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ का मामला सामने आने के बाद पंजाब राज्य एवं चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने खुले दरवाजे, बिना कंडक्टर और निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाकर सड़क पर दौड़ रही स्कूल बस का स्वत: संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग और ट्रैफिक पुलिस को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों विभागों से पूरे मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।
आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार 23 जुलाई को आयोग के सदस्य एवं पद्मश्री से सम्मानित जतिंदर सिंह शंटी नयागांव पुलिस थाने के निरीक्षण के लिए जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर सीएच-01-टीए-5163 नंबर की एक स्कूल बस पर पड़ी। बस में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे बैठे थे। बस तेज रफ्तार और जिगजैग तरीके से चलाई जा रही थी जिससे बस में सवार बच्चों के साथ-साथ सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान भी खतरे में पड़ गई थी।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आयोग के सदस्य ने तत्काल बस रुकवाई और चालक अमरिंदर सिंह से पूछताछ की। पूछताछ में चालक ने बताया कि बस का कंडक्टर छुट्टी पर होने के कारण मौजूद नहीं था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बस का दरवाजा खराब होने के कारण पूरी तरह बंद नहीं हो रहा था और बस खुले दरवाजे के साथ ही बच्चों को लेकर दौड़ रही थी। चालक ने स्वीकार किया कि उसे दरवाजा खराब होने की जानकारी थी।
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आयोग ने इसे बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही मानते हुए कहा कि छोटे-छोटे बच्चों को खुले दरवाजे, बिना कंडक्टर और ओवरलोड बस में ले जाना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। यदि अचानक ब्रेक लग जाता या बस का संतुलन बिगड़ता तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि स्कूल परिवहन में इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। बिना कंडक्टर के बस चलाना, क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना और खराब बस का संचालन करना स्कूल बसों के लिए लागू सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन है। नियमों के अनुसार स्कूल बस पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में होनी चाहिए, उसमें निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए, कंडक्टर की मौजूदगी अनिवार्य है और सभी सुरक्षा उपकरण सही स्थिति में होने चाहिए।
मानवाधिकार आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति संत प्रकाश, सदस्य न्यायमूर्ति गुरबीर सिंह और सदस्य जतिंदर सिंह शंटी शामिल हैं, ने चंडीगढ़ के स्कूल शिक्षा निदेशक और ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जांच कर जवाबदेही तय करने व विस्तृत रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने संकेत दिए हैं कि रिपोर्ट के आधार पर आगे आवश्यक कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा।
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आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार 23 जुलाई को आयोग के सदस्य एवं पद्मश्री से सम्मानित जतिंदर सिंह शंटी नयागांव पुलिस थाने के निरीक्षण के लिए जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर सीएच-01-टीए-5163 नंबर की एक स्कूल बस पर पड़ी। बस में निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे बैठे थे। बस तेज रफ्तार और जिगजैग तरीके से चलाई जा रही थी जिससे बस में सवार बच्चों के साथ-साथ सड़क पर चल रहे अन्य लोगों की जान भी खतरे में पड़ गई थी।
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स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आयोग के सदस्य ने तत्काल बस रुकवाई और चालक अमरिंदर सिंह से पूछताछ की। पूछताछ में चालक ने बताया कि बस का कंडक्टर छुट्टी पर होने के कारण मौजूद नहीं था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि बस का दरवाजा खराब होने के कारण पूरी तरह बंद नहीं हो रहा था और बस खुले दरवाजे के साथ ही बच्चों को लेकर दौड़ रही थी। चालक ने स्वीकार किया कि उसे दरवाजा खराब होने की जानकारी थी।
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आयोग ने इसे बच्चों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही मानते हुए कहा कि छोटे-छोटे बच्चों को खुले दरवाजे, बिना कंडक्टर और ओवरलोड बस में ले जाना किसी बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है। यदि अचानक ब्रेक लग जाता या बस का संतुलन बिगड़ता तो गंभीर दुर्घटना हो सकती थी। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि स्कूल परिवहन में इस तरह की लापरवाही किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती। बिना कंडक्टर के बस चलाना, क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाना और खराब बस का संचालन करना स्कूल बसों के लिए लागू सुरक्षा मानकों का सीधा उल्लंघन है। नियमों के अनुसार स्कूल बस पूरी तरह सुरक्षित स्थिति में होनी चाहिए, उसमें निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चे नहीं होने चाहिए, कंडक्टर की मौजूदगी अनिवार्य है और सभी सुरक्षा उपकरण सही स्थिति में होने चाहिए।
मानवाधिकार आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष न्यायमूर्ति संत प्रकाश, सदस्य न्यायमूर्ति गुरबीर सिंह और सदस्य जतिंदर सिंह शंटी शामिल हैं, ने चंडीगढ़ के स्कूल शिक्षा निदेशक और ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले की जांच कर जवाबदेही तय करने व विस्तृत रिपोर्ट आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने संकेत दिए हैं कि रिपोर्ट के आधार पर आगे आवश्यक कार्रवाई पर भी विचार किया जाएगा।