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अर्थी और समर्थी इन दोनों शर्तों को पूर्ण करने वाला ही वेदांत के रहस्य को समझ सकता है: रसिक महाराज
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चंडीगढ़। सिद्ध बाबा बालकनाथ मंदिर मलोया के 41वें वार्षिकोत्सव पर आयोजित पांच दिवसीय शिव कथा के दूसरे दिन रविवार को नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज ने दिव्य प्रवचन दिए। उन्होंने बताया कि अर्थी और समर्थी इन दोनों शर्तों को पूर्ण करने वाला ही सचमुच में वेदांत के रहस्य को समझ सकता है।
उन्होंने कहा कि अर्थी का मतलब चाहना और समर्थी का मतलब साधन संपन्न होना। जैसे किसी को कश्मीर देखने की इच्छा तो हो परंतु पास में पैसे न हो तो नहीं जा सकेगा। अथवा जिस प्रकार से किसी के पास में पैसे तो बहुत है परंतु कश्मीर देखने की इच्छा ही न हो तब भी नहीं जा सकेगा।
ठीक इसी प्रकार से परमात्मा को जानने की इच्छा तो बहुत है परंतु साधन संपन्न नहीं है अर्थात् ब्रह्मचर्य अभ्यास वैराग्य आदि नहीं है। या फिर कुछ लोगों में यह लक्षण प्रतीत भी होते हैं परंतु जन्म मरण के बंधन से छूटने की तड़पन ही नहीं है। ऐसे दोनों प्रकार के व्यक्ति सचमुच में परमात्मा तत्व को नहीं जान सकते। इस दौरान सिद्ध बाबा बालकनाथ मंदिर मलोया के संस्थापक गुरु माम चंद राणा, नरेंद्र वर्मा, सुभाष बंसल, संदीप सिंह, प्रताप सिंह ,चमेली देवी, पूजा बंसल, अमर सिंह, वीरचंद, अभिलाष सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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उन्होंने कहा कि अर्थी का मतलब चाहना और समर्थी का मतलब साधन संपन्न होना। जैसे किसी को कश्मीर देखने की इच्छा तो हो परंतु पास में पैसे न हो तो नहीं जा सकेगा। अथवा जिस प्रकार से किसी के पास में पैसे तो बहुत है परंतु कश्मीर देखने की इच्छा ही न हो तब भी नहीं जा सकेगा।
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ठीक इसी प्रकार से परमात्मा को जानने की इच्छा तो बहुत है परंतु साधन संपन्न नहीं है अर्थात् ब्रह्मचर्य अभ्यास वैराग्य आदि नहीं है। या फिर कुछ लोगों में यह लक्षण प्रतीत भी होते हैं परंतु जन्म मरण के बंधन से छूटने की तड़पन ही नहीं है। ऐसे दोनों प्रकार के व्यक्ति सचमुच में परमात्मा तत्व को नहीं जान सकते। इस दौरान सिद्ध बाबा बालकनाथ मंदिर मलोया के संस्थापक गुरु माम चंद राणा, नरेंद्र वर्मा, सुभाष बंसल, संदीप सिंह, प्रताप सिंह ,चमेली देवी, पूजा बंसल, अमर सिंह, वीरचंद, अभिलाष सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
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