Chandigarh: मौत के बाद एक व्यक्ति बचा सकता 8 लोगों की जान, जानें- जीवित रहते कौन-कौन से अंग कर सकते दान
अंगदान वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा जैविक ऊतकों या अंगों को एक मृत या जीवित व्यक्ति से निकालकर किसी दूसरे के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को हार्वेस्टिंग के रूप में जाना जाता है। इसे ही अंगदान कहा जाता है।
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चंडीगढ़ पीजीआई हर साल लाखों मरीजों की जान बचा रहा है। अंगदान से दूसरा जीवन पाने वाले मरीजों की संख्या भी हजारों में है। मानवता के लिए अंगदाता परिवारों के त्वरित फैसले और डॉक्टरों की मेहनत से लगातार लोगों को नया जीवन मिल रहा है। हालांकि अभी भी बड़ी संख्या में मरीज इंतजार में हैं। ऐसे में हम सबको अंगदान के प्रति जागरूक होना होगा क्योंकि अपने लिए जिए तो क्या जिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस रफ्तार से गंभीर बीमारियां मानव अंगों को खराब कर रही हैं, उसके अनुपात में अंगदाताओं की संख्या बेहद कम है। ऐसे में जागरूकता बढ़ाकर अंगदान और प्रतीक्षा सूची में शामिल मरीजों के बीच के अंतर को कम किया जा सकता है। पीजीआई इलाज के साथ ही रीजनल ऑर्गन एंड टिस्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (रोटो) के जरिए लोगों को जागरूक करने के प्रयास में दिन-रात जुटा हुआ है।
पीजीआई में अब तक हुए अंग प्रत्यारोपण के आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि जान बचाने वाले अंगों में सबसे ज्यादा किडनी प्रत्यारोपित की गईं हैं। वर्ष 1973 से अब तक यहां 4792 मरीजों में किडनी का प्रत्यारोपण किया गया है। हालांकि अभी भी प्रतीक्षा सूची में 3707 मरीज हैं। वहीं, कॉर्निया का प्रत्यारोण कर पीजीआई ने अब तक 6713 नेत्रहीनों की जिंदगी में उजाला किया है।
पीजीआई के रीनल ट्रांसप्लांट सर्जरी के प्रमुख डॉ. आशीष शर्मा का कहना है कि मौजूदा समय में गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रहीं हैं। ये बीमारियां अंगों को खराब कर रहीं हैं। इससे अंग प्रत्यारोपण की मांग तेजी से बढ़ रही है। हमें यह बात ठीक से समझनी होगी कि किसी की मौत पर उसके शरीर से गहने उतारने से ज्यादा जरूरी उन अंगों को जलने से बचाना है, जो किसी बीमार या जरूरतमंद को नया जीवन दे सकते हैं। नेफ्रोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. एचएस कोहली का कहना है कि अंगदान से मिले अंग को मरीज में प्रत्यारोपित करने के बीच का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। अंगदान हम सभी की जिम्मेदारी है। जो व्यक्ति इस दुनिया में नहीं रहा, उसके बाद उसके परिवार को उसका अंगदान करना चाहिए।
क्या है अंगदान
अंगदान वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा जैविक ऊतकों या अंगों को एक मृत या जीवित व्यक्ति से निकालकर किसी दूसरे के शरीर में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को हार्वेस्टिंग के रूप में जाना जाता है। इसे ही अंगदान कहा जाता है।
इन अंगों को कर सकते हैं दान
डॉक्टरों के मुताबिक मौत के बाद एक व्यक्ति के अंगदान से कम से कम आठ लोगों की जान बचाई जा सकती है। ब्रेन डेड घोषित होने के बाद सभी अंग डोनेट किए जा सकते हैं। इसके लिए परिजनों की स्वीकृति जरूरी है। ब्रेन डेड मरीज की किडनी, लीवर, फेफड़ा, पैंक्रियाज, छोटी आंत, वॉयस बॉक्स, हाथ, गर्भाशय, अंडाशय, चेहरा, आंखें, मिडिल ईयर बोन, स्किन, बोन, कार्टिलेज, तंतु, धमनी व शिराएं, कॉर्निया, हार्ट वॉल्व, नर्व्स, अंगुलियां और अंगूठे दान किए जा सकते हैं।
कौन कर सकता है अंगदान
कुछ कैंसर व डायबिटीज से पीड़ित व्यक्ति अंगदान कर सकते हैं। कैंसर और एचआईवी से पीड़ित व्यक्ति, सेप्सिस या इन्ट्रावेनस दवाओं का इस्तेमाल करने वाले अंगदान नहीं कर सकते।
जीवित रहते हुए दान किए जाने वाले अंग
- यकृत: यकृत (लीवर) में पुन: निर्माण की क्षमता होती है। यदि यकृत का एक हिस्सा दान कर दिया जाए तो वह फिर से वृद्धि या उसी स्थिति को प्राप्त कर लेता है।
- गुर्दा: मनुष्य एक गुर्दे (किडनी) से भी जीवित रह सकता है, इसलिए दूसरे गुर्दे को दान किया जा सकता है।
- फेफड़े: फेफड़े के एक भाग को दान किया जा सकता है। यह यकृत के विपरीत है अर्थात फेफड़ों में पुन: निर्माण की क्षमता नहीं होती है।
- आंत: दुर्लभ मामलों में दाताओं के द्वारा आंत का एक हिस्सा दान किया जा सकता है।
पीजीआई सभी बहादुर अंगदाता परिवारों के कारण अंग प्रत्यारोपण में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। दानदाता परिवारों के कठोर निर्णयों और मानवता के लिए नि:स्वार्थ भाव के बिना यहां तक पहुंचना संभव नहीं था। शब्द उनकी उदारता को श्रद्धांजलि देने में विफल हैं। पीजीआई में प्रतीक्षा सूची और प्रत्यारोपण के बीच अंतर को पाटने के लिए कई पहल कर रहे हैं। पहले किडनी प्रत्यारोपण केवल एक ही विभाग द्वारा किया जाता था लेकिन अब यूरोलॉजी विभाग ने भी किडनी प्रत्यारोपण शुरू कर दिया गया है। - प्रो. विवेक लाल, निदेशक, पीजीआई।
हमने एक क्यूआर कोड भी जारी किया है ताकि सामान्य समुदाय के लिए आगे आना और अपने अंगों को दान करने की प्रतिज्ञा करना आसान हो सके। आइए बदलाव लाएं और अंगदान के लिए प्रतिज्ञा का पहला कदम उठाकर बहुमूल्य जीवन बचाने में सहायक बनें। - प्रो. विपिन कौशल, चिकित्सा अधीक्षक, पीजीआई व रोटो के नोडल अधिकारी।