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Haryana: नहीं बदलेगी हरियाणा विधानसभा की तस्वीर, पांच में सिर्फ एक विधायक ही जीत सका लोकसभा चुनाव
Wed, 05 Jun 2024 03:59 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 05 Jun 2024 03:59 PM IST
सार
लोकसभा के परिणाम आने के बाद हरियाणा की राजनीतिक परिस्थितियां भी बदल गई है। ऐसे में सत्ता पक्ष के सदस्यों के विपक्ष में जाने से इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल यह सब तभी संभव है, जब सदन में बहुमत साबित होने की स्थिति उत्पन्न हो।
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सियासी समीकरण
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
हरियाणा के लोकसभा चुनाव में इस बार पांच विधायकों ने भाग्य आजमाया। इनमें सिर्फ एक विधायक वरुण चौधरी ही चुनाव जीत पाए, बाकी चारों को हार का सामना करना पड़ा। संसद बनने पर वरुण मुलाना को अगले 14 दिन के भीतर विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना पड़ेगा।
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सीएम नायब सिंह सैनी भी जीतकर विधानसभा के निर्वाचित सदस्य बन गए हैं। चौधरी के इस्तीफे के बाद सीट खाली होने और सैनी के विधायक बनने के बाद हरियाणा विधानसभा में सदस्यों की संख्या 87 ही रहेगी। इस हिसाब से बहुमत का आंकड़ा 44 होगा।
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41 हुए भाजपा विधायक
सीएम नायब सिंह सैनी के जीतने के बाद भाजपा विधायकों की संख्या 41 पहुंच गई। भाजपा को निर्दलीय विधायक नयन पाल रावत और हरियाणा लोकहित पार्टी के विधायक गोपाल कांडा का समर्थन प्राप्त है। इससे भाजपा के पास विधायकों का आंकड़ा 43 है। उन्हें सिर्फ एक विधायक का समर्थन चाहिए। हालांकि सीएम नायब सिंह सैनी और पूर्व सीएम मनोहर लाल दावा करते आए हैं कि उनके पास जजपा के विधायकों का समर्थन प्राप्त है।
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पिछले दिनों मनोहर लाल ने खुलकर जजपा के दो विधायकों का नाम लेकर कहा था कि उनका समर्थन भाजपा को प्राप्त है। ऐसे में फिलहाल सैनी सरकार संकट में नहीं है। हरियाणा में विधानसभा के 90 सदस्य थे। लोकसभा चुनाव के दौरान मनोहर लाल व रणजीत चौटाला ने इस्तीफा दे दिया था। उसके बाद निर्दलीय विधायक राकेश दौलताबाद का निधन हो गया था। इस प्रकार 90 में से 87 सीट सदस्य ही बचे हैं।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि सरकार अल्पमत में है या बहुमत में, इसका फैसला सदन में ही हो सकेगा। यदि ऐसा होता है तो विपक्ष को भी अपने पास 44 विधायकों का समर्थन दिखाना होगा। वरुण चौधरी के इस्तीफा देने से कांग्रेस के पास 29 विधायक हैं।
वहीं, जजपा के दस, चार निर्दलीय विधायक और इनेलो के अभय सिंह चौटाला हैं। कांग्रेस के अलावा बाकी विधायक किसके समर्थन में जाते हैं यह तो कह पाना अभी मुश्किल है। हालांकि यदि ऐसा होता है तो भाजपा विपक्ष विधायकों में सेंधमारी कर अपनी संख्या बढ़ा सकती है।