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यहां 4500 मरीजों के लिए मात्र एक मेडिकल शॉप
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 02 Apr 2014 02:00 PM IST
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सेक्टर 16 मल्टी स्पेशलिएटी हॉस्पिटल में हर मरीज को कम से कम 20 मिनट का इंतजार करने के बाद दवाई मिल रही है। कई बार तो 35 मिनट भी दवा लेने में लग जाते हैं। दरअसल पूरे हास्पिटल में सिर्फ एक ही केमिस्ट शॉप है।
सिविल अस्पताल में भी बहुत ही कम दवाएं मिलती हैं। हाल ही में दोबारा से खुले जन औषधि केंद्र का भी कोई फायदा मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। दूसरी शॉप नहीं होने के कारण लोगों को इसी दुकान से दवा लेनी पड़ रही है।
यदि स्टोर में दवा नहीं मिलती है, तो लोगों को इंतजार करने के बाद सेक्टर 16 के मार्केट या सेक्टर 11 जाना पड़ता है। प्रशासनिक ब्लाक के नीचे केमिस्ट की सिर्फ एक शॉप जबकि रिफ्रेशमेंट के लिए तीन दुकानें अलॉट हैं।
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परेशान मरीजों का कहना है कि हॉस्पिटल में कम से कम दो से तीन दुकानें होनी चाहिए। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अब तक इस बारे में मरीजों की ओर से कोई शिकायत नहीं आई है। यदि शिकायत आएगी तो इस पर गौर जरूर किया जाएगा।
हॉस्पिटल में 4500 मरीज
हॉस्पिटल में रोजाना ओपीडी में अलग-अलग विभागों में कम से कम तीन हजार मरीज आते हैं। इमरजेंसी में 200-250 मरीज रोज आते हैं। हॉस्पिटल में करीब 700-800 मरीज इनडोर में होते हैं। कुल मिलाकर 4200-4500 मरीज यहां पर आते हैं, लेकिन इन मरीजों के लिए सिर्फ एक केमिस्ट शॉप रखा गया है। जाहिर सी बात है कि जब इतने मरीज होंगे और केमिस्ट शॉप एक तो दिक्कतें तो आएंगी।
सिर्फ नाम का खुला जन औषधि केंद्र
दो फरवरी को दोबारा से खुले जनऔषधि केंद्र सिर्फ नाम का है। यहां पर फिलहाल 42 दवाओं का ही स्टॉक है, लेकिन इन दवाओं से मरीजों का रत्ती भर भी भला नहीं हो रहा। इनमें अधिकतर दवाएं पेनकिलर व एंटीबायोटिक है। बताया जा रहा है कि स्टाक बढ़ाने के लिए बात चल रही है। करीब 200 कैटेगिरी की दवाएं केंद्र में आनी है, लेकिन कब तक आएंगी इस बारे में कोई जवाब नहीं मिला।
अस्पताल में दवा आने पर लगेगा समय
सेक्टर 16 हॉस्पिटल दवाओं का टोटा भी चल रहा है। बताया गया कि नया टेंडर अलॉट कर आर्डर दे दिया गया है। स्टॉक आने में कम से कम दो से तीन हफ्ते का समय लगेगा। ऐसे में मरीजों को दिक्कतें तो आती रहेंगी। हालांकि अस्पताल की दवाओं से मरीजों को ज्यादा फायदा नहीं मिलता। कोटे से आने वाली दवाएं सिर्फ नाम की होती है। डाक्टरों की लिखी अधिकतर दवाएं अस्पताल में नहीं होती, इसके लिए भी मरीजों को केमिस्ट शॉप का रुख करना पड़ता है।
क्या कहते हैं लोग
मुझे खांसी की दवा चाहिए थी, लेकिन फिर भी 15 मिनट लग गए। राजनीतिक पार्टियों को इन मुद्दों को भी अपने घोषणा पत्र में शामिल करना चाहिए।
रमन, निवासी सेक्टर 56
दवाएं देरी से मिलने से काफी परेशानी आती है। इस बारे में प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। कभी भी किसी मरीज को आफत आ सकती है।
अरविंद, निवासी नयागांव
मैं पहले भी दवा ले चुका है। मुझे दोनों बार 20 मिनट इंतजार करना पड़ा। उसके बाद ही मुझे दवा मिली। यह काफी गंभीर मुद्दा है। पार्टियों को इस बारे में सोचना होगा।
मेरे पास इस बारे में कोई शिकायत नहीं आई है। यदि आती तो गौर जरूर किया जाता। मरीजों को इन दिक्कतों के बारे में जरूर बताना चाहिए। वैसे हास्पिटल में नई दवाओं का टेंडर जारी किया जा चुका है। जल्द ही हॉस्पिटल में दवाएं आ जाएंगी।
डा. जी दीवान, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट सेक्टर 16 हॉस्पिटल
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सिविल अस्पताल में भी बहुत ही कम दवाएं मिलती हैं। हाल ही में दोबारा से खुले जन औषधि केंद्र का भी कोई फायदा मरीजों को नहीं मिल पा रहा है। दूसरी शॉप नहीं होने के कारण लोगों को इसी दुकान से दवा लेनी पड़ रही है।
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यदि स्टोर में दवा नहीं मिलती है, तो लोगों को इंतजार करने के बाद सेक्टर 16 के मार्केट या सेक्टर 11 जाना पड़ता है। प्रशासनिक ब्लाक के नीचे केमिस्ट की सिर्फ एक शॉप जबकि रिफ्रेशमेंट के लिए तीन दुकानें अलॉट हैं।
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परेशान मरीजों का कहना है कि हॉस्पिटल में कम से कम दो से तीन दुकानें होनी चाहिए। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अब तक इस बारे में मरीजों की ओर से कोई शिकायत नहीं आई है। यदि शिकायत आएगी तो इस पर गौर जरूर किया जाएगा।
हॉस्पिटल में 4500 मरीज
हॉस्पिटल में रोजाना ओपीडी में अलग-अलग विभागों में कम से कम तीन हजार मरीज आते हैं। इमरजेंसी में 200-250 मरीज रोज आते हैं। हॉस्पिटल में करीब 700-800 मरीज इनडोर में होते हैं। कुल मिलाकर 4200-4500 मरीज यहां पर आते हैं, लेकिन इन मरीजों के लिए सिर्फ एक केमिस्ट शॉप रखा गया है। जाहिर सी बात है कि जब इतने मरीज होंगे और केमिस्ट शॉप एक तो दिक्कतें तो आएंगी।
सिर्फ नाम का खुला जन औषधि केंद्र
दो फरवरी को दोबारा से खुले जनऔषधि केंद्र सिर्फ नाम का है। यहां पर फिलहाल 42 दवाओं का ही स्टॉक है, लेकिन इन दवाओं से मरीजों का रत्ती भर भी भला नहीं हो रहा। इनमें अधिकतर दवाएं पेनकिलर व एंटीबायोटिक है। बताया जा रहा है कि स्टाक बढ़ाने के लिए बात चल रही है। करीब 200 कैटेगिरी की दवाएं केंद्र में आनी है, लेकिन कब तक आएंगी इस बारे में कोई जवाब नहीं मिला।
अस्पताल में दवा आने पर लगेगा समय
सेक्टर 16 हॉस्पिटल दवाओं का टोटा भी चल रहा है। बताया गया कि नया टेंडर अलॉट कर आर्डर दे दिया गया है। स्टॉक आने में कम से कम दो से तीन हफ्ते का समय लगेगा। ऐसे में मरीजों को दिक्कतें तो आती रहेंगी। हालांकि अस्पताल की दवाओं से मरीजों को ज्यादा फायदा नहीं मिलता। कोटे से आने वाली दवाएं सिर्फ नाम की होती है। डाक्टरों की लिखी अधिकतर दवाएं अस्पताल में नहीं होती, इसके लिए भी मरीजों को केमिस्ट शॉप का रुख करना पड़ता है।
क्या कहते हैं लोग
मुझे खांसी की दवा चाहिए थी, लेकिन फिर भी 15 मिनट लग गए। राजनीतिक पार्टियों को इन मुद्दों को भी अपने घोषणा पत्र में शामिल करना चाहिए।
रमन, निवासी सेक्टर 56
दवाएं देरी से मिलने से काफी परेशानी आती है। इस बारे में प्रशासन को ध्यान देना चाहिए। कभी भी किसी मरीज को आफत आ सकती है।
अरविंद, निवासी नयागांव
मैं पहले भी दवा ले चुका है। मुझे दोनों बार 20 मिनट इंतजार करना पड़ा। उसके बाद ही मुझे दवा मिली। यह काफी गंभीर मुद्दा है। पार्टियों को इस बारे में सोचना होगा।
मेरे पास इस बारे में कोई शिकायत नहीं आई है। यदि आती तो गौर जरूर किया जाता। मरीजों को इन दिक्कतों के बारे में जरूर बताना चाहिए। वैसे हास्पिटल में नई दवाओं का टेंडर जारी किया जा चुका है। जल्द ही हॉस्पिटल में दवाएं आ जाएंगी।
डा. जी दीवान, डिप्टी सुपरिंटेंडेंट सेक्टर 16 हॉस्पिटल