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Chandigarh News: नौ साल बाद भी फ्लैट का कब्जा नहीं, ओमैक्स को तीन महीने की मोहलत
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उपभोक्ता आयोग ने 9% ब्याज और 1.10 लाख रुपये देने के दिए आदेश
मानसिक पीड़ा के लिए 75 हजार और मुकदमे के खर्च के 35 हजार रुपये देने होंगे
चंडीगढ़। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ओमैक्स न्यू चंडीगढ़ डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को तीन महीने के भीतर खरीदार को फ्लैट का कब्जा देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने 29 दिसंबर 2024 से वास्तविक कब्जा मिलने तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज देने के साथ मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के लिए 1.10 लाख रुपये देने के निर्देश भी दिए हैं। पटियाला निवासी अमरजीत लाल और उनकी पत्नी अंजना कुमारी ने वर्ष 2015 में कंपनी की आवासीय परियोजना ‘द लेक’ में फ्लैट बुक कराया था। समझौते के अनुसार, कब्जा 16 जून 2019 तक मिलना था, लेकिन निर्माण पूरा नहीं हुआ। बाद में कंपनी ने फिट-आउट पत्र जारी कर अतिरिक्त राशि की मांग की। आयोग ने स्पष्ट किया कि फिट-आउट पत्र वास्तविक कब्जे का विकल्प नहीं है। जरूरी सुविधाओं और कानूनी औपचारिकताओं के बिना खरीदार को कब्जा लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कंपनी ने देरी के लिए कोविड महामारी का हवाला दिया, लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया, क्योंकि कब्जे की तय तारीख महामारी से पहले की थी। आयोग ने शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए खरीदारों से विलंबित ब्याज, दंड और होल्डिंग शुल्क नहीं वसूलने के निर्देश भी दिए
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मानसिक पीड़ा के लिए 75 हजार और मुकदमे के खर्च के 35 हजार रुपये देने होंगे
चंडीगढ़। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ओमैक्स न्यू चंडीगढ़ डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड को तीन महीने के भीतर खरीदार को फ्लैट का कब्जा देने के आदेश दिए हैं। आयोग ने 29 दिसंबर 2024 से वास्तविक कब्जा मिलने तक नौ प्रतिशत सालाना ब्याज देने के साथ मानसिक पीड़ा और मुकदमे के खर्च के लिए 1.10 लाख रुपये देने के निर्देश भी दिए हैं। पटियाला निवासी अमरजीत लाल और उनकी पत्नी अंजना कुमारी ने वर्ष 2015 में कंपनी की आवासीय परियोजना ‘द लेक’ में फ्लैट बुक कराया था। समझौते के अनुसार, कब्जा 16 जून 2019 तक मिलना था, लेकिन निर्माण पूरा नहीं हुआ। बाद में कंपनी ने फिट-आउट पत्र जारी कर अतिरिक्त राशि की मांग की। आयोग ने स्पष्ट किया कि फिट-आउट पत्र वास्तविक कब्जे का विकल्प नहीं है। जरूरी सुविधाओं और कानूनी औपचारिकताओं के बिना खरीदार को कब्जा लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कंपनी ने देरी के लिए कोविड महामारी का हवाला दिया, लेकिन आयोग ने इसे स्वीकार नहीं किया, क्योंकि कब्जे की तय तारीख महामारी से पहले की थी। आयोग ने शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए खरीदारों से विलंबित ब्याज, दंड और होल्डिंग शुल्क नहीं वसूलने के निर्देश भी दिए